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भगवान श्रीकृष्ण के कीर्तन करने से पवित्र हो जाते हैं भक्त : पं. रोहित कृष्ण शास्त्री
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अंबाला सिटी सेक्टर-9 में आयोजित पितृ मोक्ष हेतु श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में कथा सुनाते पं.
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अंबाला सिटी। सेक्टर- 9 स्थित गेट नंबर तीन के नजदीक श्रीराधा-माधव संकीर्तन पथ एवं श्रीजी सखी मंडल के तत्वाधान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन सर्वप्रथम पंडितों द्वारा मंत्रोच्चारण कर विधिवत कथा व्यास गद्दी का पूजन किया गया। पथ के सदस्यों की ओर से कथा व्यास पंडित रोहित कृष्ण शास्त्री का भी फूल मालाओं से स्वागत हुआ। इस मौके पर कथा व्यास शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के यश का श्रवण और कीर्तन मनुष्यों के मन व शरीर को पवित्र बना देता हैं।
भगवान का नाम सुनने मात्र से ही कृपासिंधु भगवान अपने उस भक्त के हृदय में आकर स्थित हो जाते हैं और उनकी अशुभ वासनाओं को नष्ट कर देते हैं। श्रीमद्भागवत के निरंतर सेवन से अशुभ वासनाएं नष्ट हो जाती है, तब पवित्र कीर्ति भगवान श्रीकृष्ण के प्रति स्थायी प्रेम की प्राप्ति हो जाती है। भगवान की प्रेममयी भक्ति से जब संसार की समस्त अशक्तियां मिट जाती हैं, तब हृदय आनंद का भाव उमड़ता है और तब भगवान के तत्व का अनुभव अपने आप ही प्राणी को होने लग जाता है।
हृदय में आत्म स्वरूप भगवान का साक्षात्कार होते ही हृदय की ग्रंथि टूट जाती है, सारे संदेह मिट जाते हैं और कर्मबंधन क्षीण हो जाता है। जिससे आत्मप्रसाद की प्राप्ति होती है। इसी बीच भगवान के अवतारों की कथा सुनाते हुए पंडित रोहित कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान अपने भक्तों पर सदैव अपनी समदृष्टि रखते हैं, किंतु जो भक्त अपनी जीवन की डोर को भगवान के चरणों में समर्पित कर देता है, फिर हर कदम पर भगवान उसके साथ खड़े रहते हैं और संसारिक दुखों व संकटों से भगवान स्वयं रक्षा करते हैं। जिस प्रकार पांडवों के साथ रहकर उन्हें महाभारत जैसे युद्ध में जीत हासिल करवाते हैं। जैसे अगाध समुद्र से हजारों छोटी-छोटी नदियां निकलती हैं, वैसे ही सत्वनिधि भगवान श्री हरि के असंख्य अवतार हुआ करते हैं। इसी प्रसंग के साथ कथा को विराम दिया गया, वहीं सभी भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण जी की आरती में श्रद्धापूर्वक भाग लिया।
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भगवान का नाम सुनने मात्र से ही कृपासिंधु भगवान अपने उस भक्त के हृदय में आकर स्थित हो जाते हैं और उनकी अशुभ वासनाओं को नष्ट कर देते हैं। श्रीमद्भागवत के निरंतर सेवन से अशुभ वासनाएं नष्ट हो जाती है, तब पवित्र कीर्ति भगवान श्रीकृष्ण के प्रति स्थायी प्रेम की प्राप्ति हो जाती है। भगवान की प्रेममयी भक्ति से जब संसार की समस्त अशक्तियां मिट जाती हैं, तब हृदय आनंद का भाव उमड़ता है और तब भगवान के तत्व का अनुभव अपने आप ही प्राणी को होने लग जाता है।
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हृदय में आत्म स्वरूप भगवान का साक्षात्कार होते ही हृदय की ग्रंथि टूट जाती है, सारे संदेह मिट जाते हैं और कर्मबंधन क्षीण हो जाता है। जिससे आत्मप्रसाद की प्राप्ति होती है। इसी बीच भगवान के अवतारों की कथा सुनाते हुए पंडित रोहित कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान अपने भक्तों पर सदैव अपनी समदृष्टि रखते हैं, किंतु जो भक्त अपनी जीवन की डोर को भगवान के चरणों में समर्पित कर देता है, फिर हर कदम पर भगवान उसके साथ खड़े रहते हैं और संसारिक दुखों व संकटों से भगवान स्वयं रक्षा करते हैं। जिस प्रकार पांडवों के साथ रहकर उन्हें महाभारत जैसे युद्ध में जीत हासिल करवाते हैं। जैसे अगाध समुद्र से हजारों छोटी-छोटी नदियां निकलती हैं, वैसे ही सत्वनिधि भगवान श्री हरि के असंख्य अवतार हुआ करते हैं। इसी प्रसंग के साथ कथा को विराम दिया गया, वहीं सभी भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण जी की आरती में श्रद्धापूर्वक भाग लिया।

अंबाला सिटी सेक्टर-9 में आयोजित पितृ मोक्ष हेतु श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में कथा सुनाते पं.
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