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ग्राउंड रिपोर्ट: अंबाला छावनी में विकास तेज, चुनौतियां बड़ी; इस सीट पर BJP व कांग्रेस में शुरू से रहा मुकाबला

Wed, 04 Sep 2024 08:44 AM IST
नवीन दलाल माई सिटी रिपोर्टर, अंबाला (हरियाणा)
माई सिटी रिपोर्टर, अंबाला (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Wed, 04 Sep 2024 08:44 AM IST
सार

अंबाला छावनी विधानसभा जिला में ऐसा विधानसभा है जहां पर सबसे करोड़ों रुपये विकास कार्यों के आए हैं। इसमें सड़क से लेकर सीवर, एयरपोर्ट से लेकर शहीद स्मारक तक की सौगात लोगों को मिली है।

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Development is fast in Ambala Cantonment, challenges big; BJP and Congress competing on seat since beginning
अंबाला कैंट का स्वागत द्वार। - फोटो : संवाद

विस्तार

हरियाणा के पुराने शहरों में एक अंबाला कैंट कभी अंग्रेजों की छावनी हुआ करता था। इसके बाद से यह भारतीय सेना और वायु सेना का प्रमुख केंद्र बना। यहां से गुजरने वाले जीटी रोड जैसे राजमार्ग इसकी महत्ता को और बढ़ा देते हैं। व्यापारिक दृष्टि से साइंस उद्योग को दिशा देने वाला छावनी विधानसभा चुनावों में प्रमुख रहेगा।

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राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो छावनी सीट पर भाजपा और कांग्रेस में शुरू से मुकाबला रहा है। यहां से पांच बार कांग्रेस तो छह बार भाजपा से विधायक बने। इस बार इस सीट के चर्चा में रहने कारण छह बार विधायक और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का मैदान में उतरना तय माना जा रहा है। यदि बात करें कांग्रेस की तो वह भी पूरी तरह से तैयार है।
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कांग्रेस की ओर से हुड्डा और सैलजा गुट के दावेदार मैदान में हैं। अब कांग्रेस आलाकमान किसे टिकट देगा यही सीट का भविष्य को तय करेगा। इस सीट से इनेलो-बसपा गठबंधन भी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। इस सीट पर विकास कार्य हुए हैं मगर कई चुनौतियां अब भी हैं।

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विकास कार्यों पर लेटलतीफी का ग्रहण

अंबाला छावनी विधानसभा जिला में ऐसा विधानसभा है जहां पर सबसे करोड़ों रुपये विकास कार्यों के आए हैं। इसमें सड़क से लेकर सीवर, एयरपोर्ट से लेकर शहीद स्मारक तक की सौगात लोगों को मिली है। मगर छावनी में सबसे अधिक दिक्कत यह है कि अफसरशाही ने काम अधिक होने के कारण गंभीरता नहीं दिखाई। लिहाजा छोटी-छोटी कमियों के कारण कई बड़े प्रोजेक्ट कछुआ चाल चले।

इसके साथ ही खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर का फुटबॉल स्टेडियम बनाया मगर इस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। विकास कार्यों पर विपक्ष की तिरछी निगाह रही है। अगर रिपोर्ट कार्ड देखें तो इस लोकसभा चुनाव में भाजपा बेशक हार गई लेकिन छावनी में कांग्रेस से आगे रही थी। ऐसे में इस सीट पर भाजपा, कांग्रेस दोनों के लिए ही चुनौतियां हैं।

विकास हुआ लेकिन लेटलतीफी भी रही : मानसिंह

वरिष्ठ अधिवक्ता मान सिंह बताते हैं कि पूर्व गृहमंत्री अनिल विज के कार्यकाल में छावनी में अधिक विकास कार्य हुए। यहां अत्याधुनिक नागरिक अस्पताल, कैंसर केयर सेंटर, फीफा अप्रूव्ड फुटबॉल स्टेडियम, शहीद स्मारक, बैंक स्क्वायर और घरेलू एयरपोर्ट जैसे विकास कार्य हुए। ये हरियाणा के बड़े प्रोजेक्ट थे। मगर विभाग की लापरवाही कहें या बजट का अभाव, ये काम समय से पूरे नहीं हो पाए। सरकार कोई भी हो उन्हें ध्यान देना चाहिए कि देरी परियोजनाओं का बजट बढ़ाती है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

योजनाएं कागजों में दब जाती हैं : गाैरव सोनी

साइंस कारोबारी गौरव सोनी ने बताया कि सरकार की योजनाएं कागजों में रह जाती हैं। वह लोगों तक नहीं पहुंच पा रहीं। सरकार ने व्यापारी वर्ग को अनदेखा किया है। पिछले साल बाढ़ आई तो प्रशासन की तरफ से संदेश था कि नुकसान बताएं। यह प्रक्रिया इतनी जटिल थी कि व्यापारी कुछ लाभ नहीं ले सके। अभी तक कोई अनुदान नहीं मिला। हर साल टैक्स बढ़ता जा रहा है मगर व्यापारियों को कोई लाभ नहीं मिल रहा। फिर भी सरकार कुछ करने को कहती है व्यापारी वर्ग साथ् होता है।

सड़कें हो ठीक, सफाई पर दें ध्यान

हरियाणा बैंक एंप्लाइज फेडरेशन के महासचिव पीसी चौहान ने बताया कि पहले और अब छावनी के हालातों में काफी अंतर है। अब भी कई समस्याएं हैं मगर पहले की तरह इतना परेशान नहीं होना पड़ता। यहां से कनेक्टिविटी, सुभाष पार्क, चिकित्सकीय सुविधाएं मिलने से लाभ हुआ है। लोगों को पहले अपने प्रशासनिक कार्याें के लिए अंबाला सिटी भागना पड़ता था, अब यह भी बंद हो गया है।

छावनी के जातिगत समीकरण
हिंदू- 90.00 प्रतिशत
मुस्लिम- 2.67 प्रतिशत
ईसाई- 1.26 प्रतिशत
सिख- 5.48 प्रतिशत
बौद्ध- 0.07 प्रतिशत
जैन- 0.2 प्रतिशत

नोट : 2011 की जनगणना के अनुसार

वर्ष- विधायक- पार्टी
1967- देवराज आनंद- कांग्रेस
1968- भगवान दास सहगल- भारतीय जनसंघ
1972- हंसराज सूरी- कांग्रेस
1977- सुषमा स्वराज- जनता पार्टी
1982- रामदास धमीजा- कांग्रेस
1987- सुषमा स्वराज- भाजपा
1990- अनिल विज- भाजपा
1991- बृजआनंद- कांग्रेस
1996 से 2000 तक- अनिल विज- आजाद
2005- देवेंद्र कुमार बंसल- कांग्रेस
2009 से वर्तमान तक- अनिल विज- भाजपा

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