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Ambala News: श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का किया वर्णन
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कथा में मौजूद श्रद्धालु ।
मुलाना। श्री बालाजी निष्काम सेवा समिति मुलाना द्वारा माता बाला सुंदरी मंदिर मुलाना के प्रांगण में दशम् श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ एवं तुलसी वितरण का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें मंगलवार को विश्व कर्मा मंदिर कमेटी मुलाना सदस्यों और नंदीशाला कमेटी टंगैल सदस्यों की ओर से दीप प्रज्वलित किया।
भागवत कथा के पंचम दिवस में कथा व्यास आचार्य मदन शास्त्री ने मुखारविंद से कृष्ण जी की बाल लीलाओं का वर्णन किया। श्री कृष्ण के जीवन में बहुत कष्ट आये जन्म लेते ही पूतना, आधा सुर बकासुर जैसे राक्षसों ने श्री कृष्ण को मारने का प्रयास किया। इतने कष्ट होने के बाद भी श्री कृष्ण उदास नहीं हुए। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में भी हमेशा दो परिस्थितियां आती है एक सुख की और दूसरी दूसरी दुख की।
हमेशा हमें तो सुखों का ही ध्यान रहता है और सुख का ही स्वागत करते है लेकिन दुखों को हमेशा हमने निराशा भरी दृष्टि से देखा है । श्रीकृष्ण के जीवन में सुख दुख दोनों ही आए । लेकिन विषम परिस्थितियों का भी उन्होंने स्वागत किया। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में गोपियों के चित चोर , रास रसीया भाव सनलिप्त होते हैं।
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जब गोकुल पर संकट आया इंद्रदेव ने लगातार सात दिनों तक वर्षा की तो अपने बाल गोपाल वालों की रक्षा करने के लिए श्री कृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत को सात दिन तक धारण कर कर सभी ग्राम वासियों की रक्षा की उनके प्राण बचाए। भजन रसिका अनु प्रिया जी ने भजनों के द्वारा समा बांधा और सबको हर्षित किया। इस मौके पर विश्व कर्मा मंदिर कमेटी मुलाना सदस्य, नंदीशला कमेटी टंगैल सदस्य, मोनू जिंदल, राजकुमार वालिया, गोगी गोयल, ओम प्रकाश कालड़ा और सुभाष गोयल उपस्थित रहे।
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भागवत कथा के पंचम दिवस में कथा व्यास आचार्य मदन शास्त्री ने मुखारविंद से कृष्ण जी की बाल लीलाओं का वर्णन किया। श्री कृष्ण के जीवन में बहुत कष्ट आये जन्म लेते ही पूतना, आधा सुर बकासुर जैसे राक्षसों ने श्री कृष्ण को मारने का प्रयास किया। इतने कष्ट होने के बाद भी श्री कृष्ण उदास नहीं हुए। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में भी हमेशा दो परिस्थितियां आती है एक सुख की और दूसरी दूसरी दुख की।
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हमेशा हमें तो सुखों का ही ध्यान रहता है और सुख का ही स्वागत करते है लेकिन दुखों को हमेशा हमने निराशा भरी दृष्टि से देखा है । श्रीकृष्ण के जीवन में सुख दुख दोनों ही आए । लेकिन विषम परिस्थितियों का भी उन्होंने स्वागत किया। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में गोपियों के चित चोर , रास रसीया भाव सनलिप्त होते हैं।
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जब गोकुल पर संकट आया इंद्रदेव ने लगातार सात दिनों तक वर्षा की तो अपने बाल गोपाल वालों की रक्षा करने के लिए श्री कृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत को सात दिन तक धारण कर कर सभी ग्राम वासियों की रक्षा की उनके प्राण बचाए। भजन रसिका अनु प्रिया जी ने भजनों के द्वारा समा बांधा और सबको हर्षित किया। इस मौके पर विश्व कर्मा मंदिर कमेटी मुलाना सदस्य, नंदीशला कमेटी टंगैल सदस्य, मोनू जिंदल, राजकुमार वालिया, गोगी गोयल, ओम प्रकाश कालड़ा और सुभाष गोयल उपस्थित रहे।