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Ambala News: ब्राह्मण माजरा विवाद के निष्पक्ष जांच की मांग, एसपी को सौंपा ज्ञापन
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। ब्राह्मण माजरा गांव में गत 31 मई की शाम जातिगत विवाद और मारपीट के मामले में ग्रामीणों ने शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक अंबाला को मांग पत्र सौंपा है। ग्रामीणों ने दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच करने, झूठे मामले को रद्द करने और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की गुहार लगाई है। इस दौरान भीम आर्मी के सदस्य भी रहे।
ग्रामीण सविता रानी, दया रानी और सरोज रानी का आरोप है कि 31 मई को शाम 7 बजे गांव में जातिगत विवाद हुआ था। इसमें दूसरे पक्ष के लोगों ने उनके साथ मारपीट की और जातिसूचक शब्द कहे। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एससी-एसटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर संख्या 183 दर्ज की थी। आरोप है कि इस मामले में अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि दूसरे पक्ष के लोगों ने उन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से छेड़छाड़ का झूठा मामला दर्ज करवा दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मामले की जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों ने वीडियो साक्ष्यों को नजरअंदाज करते हुए आठ नामजद आरोपियों के नाम निकाल दिए हैं, जबकि वीडियो में वे लाठी-डंडों, ईंटों व रोडों के साथ साफ दिखाई दे रहे हैं।
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ग्रामीणों ने मांग की है कि छेड़छाड़ के झूठे केस को तुरंत रद्द किया जाए, एफआईआर से हटाए गए आरोपियों के नाम दोबारा शामिल किए जाएं और खुलेआम घूम रहे नामजद दोषियों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए।
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अंबाला सिटी। ब्राह्मण माजरा गांव में गत 31 मई की शाम जातिगत विवाद और मारपीट के मामले में ग्रामीणों ने शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक अंबाला को मांग पत्र सौंपा है। ग्रामीणों ने दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच करने, झूठे मामले को रद्द करने और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की गुहार लगाई है। इस दौरान भीम आर्मी के सदस्य भी रहे।
ग्रामीण सविता रानी, दया रानी और सरोज रानी का आरोप है कि 31 मई को शाम 7 बजे गांव में जातिगत विवाद हुआ था। इसमें दूसरे पक्ष के लोगों ने उनके साथ मारपीट की और जातिसूचक शब्द कहे। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एससी-एसटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर संख्या 183 दर्ज की थी। आरोप है कि इस मामले में अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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ग्रामीणों का कहना है कि दूसरे पक्ष के लोगों ने उन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से छेड़छाड़ का झूठा मामला दर्ज करवा दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मामले की जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों ने वीडियो साक्ष्यों को नजरअंदाज करते हुए आठ नामजद आरोपियों के नाम निकाल दिए हैं, जबकि वीडियो में वे लाठी-डंडों, ईंटों व रोडों के साथ साफ दिखाई दे रहे हैं।
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ग्रामीणों ने मांग की है कि छेड़छाड़ के झूठे केस को तुरंत रद्द किया जाए, एफआईआर से हटाए गए आरोपियों के नाम दोबारा शामिल किए जाएं और खुलेआम घूम रहे नामजद दोषियों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए।