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Ambala News: आंदोलन में किसान, पड़ोसियों के जिम्मे फसल और पशु
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सतनाम सिंह
अंबाला सिटी। किसान आंदोलन में युवाओं और बुजुर्ग किसान 13 फरवरी से डटे हैं। बुजुर्ग किसानों का कहना है कि वे तब तक यहां से नहीं जाएंगे, जब तक उनकी मांगें पूरी न हो जाएं। रविवार को सभी एक साथ बैठे नजर आए।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी चोला साहिब अमृतसर के कालके निवासी बलदेव सिंह ने बताया कि वे फैसल की जिम्मेदारी पड़ोसी को देकर आए हैं। आंदोलन के शुरू होने से लेकर अभी तक वे डटे हैं। यही नहीं उनके पुशओं की देखरेख भी उनके पड़ोसी कर रहे हैं। जब वे घर जाएंगे तो उनके पड़ोसी आंदोलन में आएंगे और वे उनके खेतों और पशुओं की देखरेख करेंगे। उन्होंने तालमेल बनाकर आंदोलन में भाग लिया है, जिससे कि घर का काम, खेती और आंदोलन प्रभावित न हो। अब गेहूं की फसल को पानी देने का समय है तो उनके पड़ोसी ही उनकी फसलों को पानी लगा रहे हैं।
मांगें पूरी होने तक तंबू और सड़क पर सोएंगे
पंजाब की तरफ बुजुर्ग और युवा किसान अपनी ट्रालियों, तंबू और सड़क पर ही गद्दे बिछाकर बैठे हैं। किसान अपने साथ ट्रालियां लेकर आए हैं। किसान बलदेव सिंह ने बताया कि अमृतसर से उनके कालके गांव से एक नहीं बल्कि चार ट्रालियां आई हैं। एक ट्रॉली में महिलाएं हैं। तीन ट्रॉलियों में रहने खाने का सामान हैं, हालांकि अभी तक लंगर चलने के कारण खाना नहीं बनाया है। कई बुजुर्ग महिलाएं भी आंदोलन में डटी हैं। ये महिलाएं लंगर की सेवा कर रही हैं।
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साढ़े चार लाख का ट्रैक्टर, एसी की भी सुविधा
किसान जसबीर सिंह ने बताया कि उसने साढ़े चार लाख में 1990 माॅडल का अपना पुराना ट्रैक्टर नए सिरे से तैयार करवाया है। यह पिछली बार हुए आंदोलन में तैयार करवाया था। इस ट्रैक्टर में एसी से लेकर सीसीटीवी, एलसीडी समेत तमाम अन्य कई सुविधाएं की गई है। इस ट्रैक्टर के टॉयर भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। वहीं, पंजाब पुलिस शंभू बॉर्डर की तरफ आने वाले वाहनों को डायवर्ट कर रही है और उनको बॉर्डर की तरफ आने नहीं दिया जा रहा है। लोग अपने गंतव्य तक जाने के लिए गांवों से होकर पहुंच रहे हैं।
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अंबाला सिटी। किसान आंदोलन में युवाओं और बुजुर्ग किसान 13 फरवरी से डटे हैं। बुजुर्ग किसानों का कहना है कि वे तब तक यहां से नहीं जाएंगे, जब तक उनकी मांगें पूरी न हो जाएं। रविवार को सभी एक साथ बैठे नजर आए।
किसान मजदूर संघर्ष कमेटी चोला साहिब अमृतसर के कालके निवासी बलदेव सिंह ने बताया कि वे फैसल की जिम्मेदारी पड़ोसी को देकर आए हैं। आंदोलन के शुरू होने से लेकर अभी तक वे डटे हैं। यही नहीं उनके पुशओं की देखरेख भी उनके पड़ोसी कर रहे हैं। जब वे घर जाएंगे तो उनके पड़ोसी आंदोलन में आएंगे और वे उनके खेतों और पशुओं की देखरेख करेंगे। उन्होंने तालमेल बनाकर आंदोलन में भाग लिया है, जिससे कि घर का काम, खेती और आंदोलन प्रभावित न हो। अब गेहूं की फसल को पानी देने का समय है तो उनके पड़ोसी ही उनकी फसलों को पानी लगा रहे हैं।
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मांगें पूरी होने तक तंबू और सड़क पर सोएंगे
पंजाब की तरफ बुजुर्ग और युवा किसान अपनी ट्रालियों, तंबू और सड़क पर ही गद्दे बिछाकर बैठे हैं। किसान अपने साथ ट्रालियां लेकर आए हैं। किसान बलदेव सिंह ने बताया कि अमृतसर से उनके कालके गांव से एक नहीं बल्कि चार ट्रालियां आई हैं। एक ट्रॉली में महिलाएं हैं। तीन ट्रॉलियों में रहने खाने का सामान हैं, हालांकि अभी तक लंगर चलने के कारण खाना नहीं बनाया है। कई बुजुर्ग महिलाएं भी आंदोलन में डटी हैं। ये महिलाएं लंगर की सेवा कर रही हैं।
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साढ़े चार लाख का ट्रैक्टर, एसी की भी सुविधा
किसान जसबीर सिंह ने बताया कि उसने साढ़े चार लाख में 1990 माॅडल का अपना पुराना ट्रैक्टर नए सिरे से तैयार करवाया है। यह पिछली बार हुए आंदोलन में तैयार करवाया था। इस ट्रैक्टर में एसी से लेकर सीसीटीवी, एलसीडी समेत तमाम अन्य कई सुविधाएं की गई है। इस ट्रैक्टर के टॉयर भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। वहीं, पंजाब पुलिस शंभू बॉर्डर की तरफ आने वाले वाहनों को डायवर्ट कर रही है और उनको बॉर्डर की तरफ आने नहीं दिया जा रहा है। लोग अपने गंतव्य तक जाने के लिए गांवों से होकर पहुंच रहे हैं।