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बारह दिन बाद हो गई मौत, नहीं मिल पाए स्वास्थ्य मंत्री
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला कैंट।
Updated Sat, 23 Jul 2016 12:27 AM IST
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अंबाला कैंट। रेफर के खेल में उलझने की बजाय यदि विक्रम को समय पर इलाज मिल जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अंबाला के स्वास्थ्य महकमे ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए विक्रम को बेहतर इलाज के लिए पीजीआई रेफर कर दिया, लेकिन रेफरल सिस्टम के इस खेल में विक्रम की जिंदगी हार गई। विक्रम ने शुक्रवार को अंबाला कैंट सिविल अस्पताल में दम तोड़ दिया।
विक्रम की मौत के बाद जहां परिजनों और घसीटपुर इलाके में मातम का माहौल है, वहीं इस घटना ने स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली और मौजूदा अपर्याप्त सुविधाओं पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इसी बात का शिकवा लेकर व अपना दर्द बयां करने विक्रम के परिजन और अन्य इलाकावासी शुक्रवार को ही विक्रम की मौत के बाद स्वास्थ्य मंत्री के आवास पर पहुंचे, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री उनसे मिल नहीं पाए। उनके पीए ने उन्हें बताया कि मंत्री कहीं बाहर हैं, इसलिए वे उनकी बात मंत्री महोदय तक पहुंचा देंगे। लिहाजा सभी लोग मायूस होकर लौट गए और विक्रम का दाह संस्कार कर दिया।
इस तरह से हुआ था हादसा
उल्लखेनीय है कि लगभग 24 साल का विक्रम अपने घर घसीटपुर से बाइक पर काम के लिए निकला था। विक्रम के पिता नहीं हैं। विक्रम पर घर की बड़ी जिम्मेदारी थी। वह 10 जुलाई को अपनी ड्यूटी पर जा रहा था, लेकिन तभी नेशनल हाईवे नंबर एक पर आईओसी के पास एक तेज रफ्तार और अनियंत्रित वाहन ने इसे टक्कर मार दी थी। इसके चलते वे बुरी तरह जख्मी होकर सड़क पर पड़ा हुआ था। अंबाला की पड़ाव पुलिस ने सूचना मिलते ही उसे तुरंत उठाया और उसे कैंट सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया।
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पहले दांव पर लगी थी विक्रम की जिंदगी
दस जुलाई को अंबाला सिविल अस्पताल में दाखिल होने के बाद अंबाला कैंट अस्पताल के चिकित्सकों ने विक्रम की गंभीर हालत देखी और उसे प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया गया। अभी तक विक्रम की पहचान नहीं हो पाई थी, लिहाजा उसकी रेफर स्लिप पर अज्ञात करार उसे गंभीर हालत में बेहतर इलाज के लिए पीजीआई रेफर किया गया था। अंबाला से ही एंबुलेंस चालक विक्रम को फटाफट पीजीआई चंडीगढ़ ले गया। लेकिन वहां विक्रम के साथ कोई व्यक्ति न होने के कारण उसे दाखिल नहीं किया गया और वापस अंबाला जाने के लिए कह दिया गया।
एंबुलेंस चालक को विक्रम की बिगड़ती हालत दिख रही थी, इसलिए वे पीजीआई से सीधे अंबाला आने की बजाय विक्रम को सेक्टर-32 स्थित जीएमसीएच में इलाज के लिए ले गया। लेकिन वहां चूंकि विक्रम की रेफर स्लिप पर पीजीआई अंकित था, इसलिए उसे सेक्टर 32 जीएमसीएच में भी दाखिल करने से इनकार करते हुए वापस भेज दिया।
अब एंबुलेंस चालक को जब कुछ समझ नहीं आया तो वे तुरंत अंबाला कैंट सिविल अस्पताल पहुंच गया और विक्रम को यही अस्पताल में भर्ती करवा दिया। लेकिन थोड़ी ही देर बाद विक्रम की पहचान हो गई और उसके परिजन उसे ढूंढते हुए सिविल अस्पताल कैंट पहुंच गए। परिजनों के आने के बाद अंबाला के स्वास्थ्य महकमे के चिकित्सकों ने फिर से विक्रम को नई रेफर स्लिप बनाकर पीजीआई चंडीगढ़ के लिए रेफर कर दिया।
अब चूंकि घायल विक्रम की शिनाख्त भी हो चुकी थी और उसकी मां भी उसके साथ थी, लिहाजा उसे पीजीआई में दाखिल कर लिया गया। लेकिन इस दौरान जितने घंटे गंभीर घायल विक्रम के इलाज के इंतजार बर्बाद हो गए, वो ही घंटे विक्रम की जिंदगी पर भारी पड़ गए, क्योंकि इस हादसे में उसके सिर व दिमाग पर गंभीर चोट लगी हुई थी और विक्रम को तुरंत इलाज मिलने की बजाए वह रेफरल खेल का हिस्सा बना हुआ था।
इस तरह टूट गई जिंदगी की लड़ी
घसीटपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर सभा के प्रधान भगत राम व माता लीला देवी ने बताया कि विक्रम को पीजीआई में इलाज दिया गया, लेकिन छह दिन बात उसे वहां से वापस अंबाला कैंट यह कहकर भेज दिया गया कि विक्रम की दिमाग की नस दबी हुई, जिसे ठीक होने में काफी वक्त लगेगा, इसलिए इसे अंबाला अस्पताल वापस ले जाएं और वहीं इसकी नर्सिंग केयर करवाएं। उन्होंने बताया कि वे विक्रम को अंबाला सिविल अस्पताल वापस ले आए और यहां अब शुक्रवार को विक्रम ने दम तोड़ दिया। वे यहां गंभीर हालत में नर्सिंग केयर में था, लेकिन फिर भी उसकी जिंदगी मौजूदा हालात से हार गई।
विक्रम की मौत का जिम्मेवार कौन?
विक्रम की जिंदगी भले ही मौजूदा सिस्टम में उलझकर दम तोड़ गई, लेकिन विक्रम की मौत को जिम्मेवार कौन है? ये सवाल प्रत्यक्ष रूप से मौजूदा सिस्टम, अफसरों और अंबाला से ही ताल्लुक रखने वाले स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के समक्ष खड़ा है। समाज सेवी एवं रिटायर्ड मास्टर मदन लाल शर्मा कहते हैं कि विक्रम की मौत बहुत ही दुखद परिस्थितियों में हुई है। सरकार और मौजूदा प्रशासन से यही सवाल करना चाहता हूं कि यहां अंबाला में कब सभी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो पाएंगी, ताकि विक्रम जैसे मामले आगे न दोहरा पाएं। उनके अनुसार यदि यहीं अंबाला में पर्याप्त इलाज विक्रम को समय पर मिल जाता, तो शायद विक्रम बच सकता था, लेकिन जिंदगी से जूझते हुए विक्रम के शुरूआत घंटे जो अंबाला से चंडीगढ़, चंडीगढ़ से अंबाला और फिर अंबाला से चंडीगढ़ में बर्बाद हो गए, उसी वजह से विक्रम की हालत बिगड़ गई और अंतत: उसकी मौत हो गई। यह घटना बहुत ही दर्दनाक घटना है।
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मौत का अफसोस है, थोड़ा बदलाव जरूरी
मुझे विक्रम की मौत का अफसोस है। कई मामलों में पीजीआई से नर्सिंग केयर के लिए मरीज वापस अंबाला भेजे जाते हैं, यहां अंबाला में उन्हे नर्सिंग केयर भी दी जाती है। लेकिन इस मामले में पहली बार विक्रम को पीजीआई से वापस अंबाला इसलिए भेजना कि उसके साथ कोई परिजन नहीं है, ये गलत है, इस सिस्टम में पीजीआई स्तरप पर जरूर बदलाव होना चाहिए। क्योंकि हमारा मकसद पहले गंभीर मरीज को बचाना है, बाकी औपचारिकताएं बाद में। ये मामला भी इसी तरह उलझ गया, इस हादसे का विभाग को अफसोस है, लेकिन अंबाला चिकित्सकों व स्टाफ ने विक्रम को पूरी तरह नर्सिंग केयर में रखा। लेकिन उसकी हालत थोड़ी खराब थी।
-डा. विनोद गुप्ता, चीफ मेडिकल अफसर, अंबाला-
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विक्रम की मौत के बाद जहां परिजनों और घसीटपुर इलाके में मातम का माहौल है, वहीं इस घटना ने स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली और मौजूदा अपर्याप्त सुविधाओं पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इसी बात का शिकवा लेकर व अपना दर्द बयां करने विक्रम के परिजन और अन्य इलाकावासी शुक्रवार को ही विक्रम की मौत के बाद स्वास्थ्य मंत्री के आवास पर पहुंचे, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री उनसे मिल नहीं पाए। उनके पीए ने उन्हें बताया कि मंत्री कहीं बाहर हैं, इसलिए वे उनकी बात मंत्री महोदय तक पहुंचा देंगे। लिहाजा सभी लोग मायूस होकर लौट गए और विक्रम का दाह संस्कार कर दिया।
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इस तरह से हुआ था हादसा
उल्लखेनीय है कि लगभग 24 साल का विक्रम अपने घर घसीटपुर से बाइक पर काम के लिए निकला था। विक्रम के पिता नहीं हैं। विक्रम पर घर की बड़ी जिम्मेदारी थी। वह 10 जुलाई को अपनी ड्यूटी पर जा रहा था, लेकिन तभी नेशनल हाईवे नंबर एक पर आईओसी के पास एक तेज रफ्तार और अनियंत्रित वाहन ने इसे टक्कर मार दी थी। इसके चलते वे बुरी तरह जख्मी होकर सड़क पर पड़ा हुआ था। अंबाला की पड़ाव पुलिस ने सूचना मिलते ही उसे तुरंत उठाया और उसे कैंट सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया।
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पहले दांव पर लगी थी विक्रम की जिंदगी
दस जुलाई को अंबाला सिविल अस्पताल में दाखिल होने के बाद अंबाला कैंट अस्पताल के चिकित्सकों ने विक्रम की गंभीर हालत देखी और उसे प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत चंडीगढ़ पीजीआई रेफर कर दिया गया। अभी तक विक्रम की पहचान नहीं हो पाई थी, लिहाजा उसकी रेफर स्लिप पर अज्ञात करार उसे गंभीर हालत में बेहतर इलाज के लिए पीजीआई रेफर किया गया था। अंबाला से ही एंबुलेंस चालक विक्रम को फटाफट पीजीआई चंडीगढ़ ले गया। लेकिन वहां विक्रम के साथ कोई व्यक्ति न होने के कारण उसे दाखिल नहीं किया गया और वापस अंबाला जाने के लिए कह दिया गया।
एंबुलेंस चालक को विक्रम की बिगड़ती हालत दिख रही थी, इसलिए वे पीजीआई से सीधे अंबाला आने की बजाय विक्रम को सेक्टर-32 स्थित जीएमसीएच में इलाज के लिए ले गया। लेकिन वहां चूंकि विक्रम की रेफर स्लिप पर पीजीआई अंकित था, इसलिए उसे सेक्टर 32 जीएमसीएच में भी दाखिल करने से इनकार करते हुए वापस भेज दिया।
अब एंबुलेंस चालक को जब कुछ समझ नहीं आया तो वे तुरंत अंबाला कैंट सिविल अस्पताल पहुंच गया और विक्रम को यही अस्पताल में भर्ती करवा दिया। लेकिन थोड़ी ही देर बाद विक्रम की पहचान हो गई और उसके परिजन उसे ढूंढते हुए सिविल अस्पताल कैंट पहुंच गए। परिजनों के आने के बाद अंबाला के स्वास्थ्य महकमे के चिकित्सकों ने फिर से विक्रम को नई रेफर स्लिप बनाकर पीजीआई चंडीगढ़ के लिए रेफर कर दिया।
अब चूंकि घायल विक्रम की शिनाख्त भी हो चुकी थी और उसकी मां भी उसके साथ थी, लिहाजा उसे पीजीआई में दाखिल कर लिया गया। लेकिन इस दौरान जितने घंटे गंभीर घायल विक्रम के इलाज के इंतजार बर्बाद हो गए, वो ही घंटे विक्रम की जिंदगी पर भारी पड़ गए, क्योंकि इस हादसे में उसके सिर व दिमाग पर गंभीर चोट लगी हुई थी और विक्रम को तुरंत इलाज मिलने की बजाए वह रेफरल खेल का हिस्सा बना हुआ था।
इस तरह टूट गई जिंदगी की लड़ी
घसीटपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर सभा के प्रधान भगत राम व माता लीला देवी ने बताया कि विक्रम को पीजीआई में इलाज दिया गया, लेकिन छह दिन बात उसे वहां से वापस अंबाला कैंट यह कहकर भेज दिया गया कि विक्रम की दिमाग की नस दबी हुई, जिसे ठीक होने में काफी वक्त लगेगा, इसलिए इसे अंबाला अस्पताल वापस ले जाएं और वहीं इसकी नर्सिंग केयर करवाएं। उन्होंने बताया कि वे विक्रम को अंबाला सिविल अस्पताल वापस ले आए और यहां अब शुक्रवार को विक्रम ने दम तोड़ दिया। वे यहां गंभीर हालत में नर्सिंग केयर में था, लेकिन फिर भी उसकी जिंदगी मौजूदा हालात से हार गई।
विक्रम की मौत का जिम्मेवार कौन?
विक्रम की जिंदगी भले ही मौजूदा सिस्टम में उलझकर दम तोड़ गई, लेकिन विक्रम की मौत को जिम्मेवार कौन है? ये सवाल प्रत्यक्ष रूप से मौजूदा सिस्टम, अफसरों और अंबाला से ही ताल्लुक रखने वाले स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के समक्ष खड़ा है। समाज सेवी एवं रिटायर्ड मास्टर मदन लाल शर्मा कहते हैं कि विक्रम की मौत बहुत ही दुखद परिस्थितियों में हुई है। सरकार और मौजूदा प्रशासन से यही सवाल करना चाहता हूं कि यहां अंबाला में कब सभी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो पाएंगी, ताकि विक्रम जैसे मामले आगे न दोहरा पाएं। उनके अनुसार यदि यहीं अंबाला में पर्याप्त इलाज विक्रम को समय पर मिल जाता, तो शायद विक्रम बच सकता था, लेकिन जिंदगी से जूझते हुए विक्रम के शुरूआत घंटे जो अंबाला से चंडीगढ़, चंडीगढ़ से अंबाला और फिर अंबाला से चंडीगढ़ में बर्बाद हो गए, उसी वजह से विक्रम की हालत बिगड़ गई और अंतत: उसकी मौत हो गई। यह घटना बहुत ही दर्दनाक घटना है।
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मौत का अफसोस है, थोड़ा बदलाव जरूरी
मुझे विक्रम की मौत का अफसोस है। कई मामलों में पीजीआई से नर्सिंग केयर के लिए मरीज वापस अंबाला भेजे जाते हैं, यहां अंबाला में उन्हे नर्सिंग केयर भी दी जाती है। लेकिन इस मामले में पहली बार विक्रम को पीजीआई से वापस अंबाला इसलिए भेजना कि उसके साथ कोई परिजन नहीं है, ये गलत है, इस सिस्टम में पीजीआई स्तरप पर जरूर बदलाव होना चाहिए। क्योंकि हमारा मकसद पहले गंभीर मरीज को बचाना है, बाकी औपचारिकताएं बाद में। ये मामला भी इसी तरह उलझ गया, इस हादसे का विभाग को अफसोस है, लेकिन अंबाला चिकित्सकों व स्टाफ ने विक्रम को पूरी तरह नर्सिंग केयर में रखा। लेकिन उसकी हालत थोड़ी खराब थी।
-डा. विनोद गुप्ता, चीफ मेडिकल अफसर, अंबाला-