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Ambala News: मारपीट मामले में कोर्ट ने की पीडि़ता की अपील खारिज
Fri, 16 Jan 2026 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 16 Jan 2026 01:24 AM IST
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माई सिटी रिपोर्टर,
अंबाला सिटी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. अशोक कुमार की अदालत ने करीब 10 साल पुराने मारपीट के एक मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के आदेश को सही ठहराते हुए पीड़िता की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने माना कि एफआईआर में देरी और साक्ष्यों में विरोधाभास के चलते अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
दरअसल नारायणगढ़ के पंजलासा निवासी सोहन लाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि 3 अक्टूबर 2015 को उनके बेटे सुरेंद्र का पड़ोसी हरदीप के साथ झगड़ा हुआ था। आरोप था कि अगले दिन 4 अक्टूबर को हरदीप, राम चरण, पालो देवी, विक्रम और संजीव ने उनके घर के पास आकर गाली-गलौज की और सोहन लाल की पत्नी कलावती व बेटे बिंद्र पर डंडों से हमला कर उन्हें घायल कर दिया। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। अदालत ने अपने फैसले में अभियोजन पक्ष की कहानी पर कई सवाल खड़े किए। वारदात अक्टूबर 2015 की बताई गई, जबकि एफआईआर नवंबर में दर्ज हुई। कोर्ट ने कहा कि इस 52 दिनों की देरी का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया, जिससे मामले में कहानी गढ़ने की आशंका बनी रहती है।
गवाहों ने दावा किया कि वे 10-12 दिन अस्पताल में भर्ती रहे, लेकिन कोर्ट में कोई डिस्चार्ज स्लिप या बेड-हेड टिकट पेश नहीं किया गया। डॉक्टर ने भी माना कि चोटें कितनी पुरानी हैं, यह रिकॉर्ड से नहीं बताया जा सकता। जांच अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने डंडा 22 नवंबर को ही बरामद करवा दिया था, जबकि एफआईआर ही 25 नवंबर को दर्ज हुई। कोर्ट ने इसे जांच की गंभीर खामी माना।
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अंबाला सिटी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. अशोक कुमार की अदालत ने करीब 10 साल पुराने मारपीट के एक मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के आदेश को सही ठहराते हुए पीड़िता की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने माना कि एफआईआर में देरी और साक्ष्यों में विरोधाभास के चलते अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
दरअसल नारायणगढ़ के पंजलासा निवासी सोहन लाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि 3 अक्टूबर 2015 को उनके बेटे सुरेंद्र का पड़ोसी हरदीप के साथ झगड़ा हुआ था। आरोप था कि अगले दिन 4 अक्टूबर को हरदीप, राम चरण, पालो देवी, विक्रम और संजीव ने उनके घर के पास आकर गाली-गलौज की और सोहन लाल की पत्नी कलावती व बेटे बिंद्र पर डंडों से हमला कर उन्हें घायल कर दिया। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। अदालत ने अपने फैसले में अभियोजन पक्ष की कहानी पर कई सवाल खड़े किए। वारदात अक्टूबर 2015 की बताई गई, जबकि एफआईआर नवंबर में दर्ज हुई। कोर्ट ने कहा कि इस 52 दिनों की देरी का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया, जिससे मामले में कहानी गढ़ने की आशंका बनी रहती है।
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गवाहों ने दावा किया कि वे 10-12 दिन अस्पताल में भर्ती रहे, लेकिन कोर्ट में कोई डिस्चार्ज स्लिप या बेड-हेड टिकट पेश नहीं किया गया। डॉक्टर ने भी माना कि चोटें कितनी पुरानी हैं, यह रिकॉर्ड से नहीं बताया जा सकता। जांच अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने डंडा 22 नवंबर को ही बरामद करवा दिया था, जबकि एफआईआर ही 25 नवंबर को दर्ज हुई। कोर्ट ने इसे जांच की गंभीर खामी माना।
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