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Ambala News: वर्ष 2020 में अजय से प्रीतम कौर ने खरीदी थी जमीन, लोग बोले- निगम अफसराें को थी जानकारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2026 03:10 AM IST
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corporation officials were aware
तीन मंजिला भवन का एक हिस्सा। संवाद
इस अवैध क्षेत्र में व्यवसायिक भवन निर्माण की एनओसी मिलती ही नहीं
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वैभव शर्मा
अंबाला सिटी। नगर निगम की सीमा में कुछ वर्ष पहले ही शामिल हुए धूलकोर्ट गांव में रविवार को तीन मंजिला निर्माणाधीन भवन गिर गया। जिस जमीन पर गोदाम का निर्माण हो रहा था, उसे वर्ष 2020 में प्रीतम कौर पत्नी सुखजीत सिंह जग्गी ने पंचकूला निवासी अजय कुमार से खरीदा था। यह पूरी जमीन दो कनाल 10 मरले के आसपास है।
इस पर गोदाम बनाने का ठेका हाल ही में डंगडेहरी निवासी ठेकेदार मलकीत को दिया गया था। काम इतनी तेजी से हो रहा था कि 41 दिन में तीन मंजिल खड़ी कर दी गईं थी। स्थानीय निवासी प्रदीप ने बताया कि जब इस भवन का निर्माण शुरू हुआ था तो उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी थी। बिल्डिंग विभाग की एक टीम मौके पर ही आई थी, मगर कार्रवाई कुछ नहीं की गई। जबकि यहां अवैध एरिया है व्यवसायिक भवन निर्माण की एनओसी मिलती ही नहीं है।
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एयरफोर्स स्टेशन के करीब बनाए ऊंचे-ऊंचे भवन

धूलकोट में एक दो लापरवाहियां नहीं बल्कि कई कमियां देखने को मिलीं। यहां पर लोगों के घरों के अलावा गोदाम भी बने हुए हैं। जबकि इस क्षेत्र में से एयरफोर्स स्टेशन बिल्कुल नजदीक है। यहां भवनों की ऊंचाई इतनी है कि कोई भी निगरानी कर सकता है। यह संवेदनशील क्षेत्र होने के बावजूद नगर निगम की नाक के नीचे संबंधित मालिक तीन मंजिला भवन तैयार कर रहे थे।
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एक तरफ जहां प्रशासन व एजेंसियां बचाव अभियान में जुटी हुई थीं तो वहीं अस्पताल में कुछ और ही कहानी चल रही थी। यहां पर कुछ लोग मजदूराें व उनके परिजनों से संपर्क कर रहे थे। उनसे कह रहे थे कि पुलिस को कोई बयान न दो और तुम्हारा उपचार प्राइवेट अस्पताल में करा देते हैं। इसकी शिकायत राजेंद्र नाम के श्रमिक ने सिटी थाना प्रभारी सुनीता ढाका से भी की। श्रमिक बता रहे थे कि कह रहे थे कि तुम्हें बयान देने की कोई आवश्यकता नहीं है, तुम्हारा जो कुछ होगा हम देख लेंगे।

शटरिंग का काम सही करने को कहा था, नहीं माने तो दो दिन पहले ले ली छुट्टी
बिहार के पूर्णिया जिला निवासी श्रमिक शुभ राम चंद्र ने बताया कि धूलकोट में यह हादसा लापरवाही और गलत शटरिंग के कारण हुआ है। मैं भी यहां काम कर रहा था। जब मैंने शटरिंग का काम अपने हिसाब से सही तरीके से करने को कहा तो मिस्त्री ने मना कर दिया। अपनी मनमानी की। इस भवन की दीवार को महज चार इंच की बनाया गया था। जब ढांचा मजबूत ही नहीं था, तो एक गलत शटरिंग के कारण पूरी बिल्डिंग गिर गई। हादसे के वक्त 21 मजदूर काम कर रहे थे, लेंटर ढहने से कई घायल हो गए और कई मलबे में दब गए। मेरा भतीजा सतीश कुमार भी घायल हुआ है और अस्पताल में भर्ती है। मुझे शटरिंग का तरीका सही नहीं लग रहा था, इसीलिए मैंने दो दिन पहले ही यहां से छुट्टी ले ली थी।


अधिकारियों की जवाबदेही बनती है : अमीषा चावला

कांग्रेस नेता अमीषा चावला भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने कहा कि धूलकोट में तीन मंजिला निर्माणाधीन भवन का गिरना और इसके नीचे दबकर बेकसूर मजदूरों की जान जाना गंभीर मामला है। इस घटना के लिए शहर के संबंधित प्रशासनिक अधिकारी भी पूरी तरह से जवाबदेह हैं। प्रशासन को जनता के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर निर्माण प्रक्रिया में कहां इतनी बड़ी कोताही हुई और बिना पुख्ता सुरक्षा मानकों के यह बहुमंजिला भवन कैसे खड़ा हो गया, इस हादसे की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जवाबदेही तय की जानी चाहिए। जितने भी लोग या अधिकारी इस लापरवाही में कसूरवार पाए जाते हैं, उन सभी पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
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