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बनौंदी चीनी मिल पर मंडराए संकट के बादल, गन्ना आयुक्त ने सुनाया चीनी मिल बंद करने का फरमान
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Clouds of crisis hover over Banundi sugar mill, Cane commissioner ordered to close sugar mill,
- फोटो : Ambala
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अंबाला सिटी। नारायणगढ़ हलका में पड़ने वाली नारायणगढ़ वासियों की जीवन रेखा कही जाने वाली बनौंदी चीनी मिल पर संकट के बादल छा रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर इलाके के सैकड़ों किसानों ने सोमवार को जिला मुख्यालय पर सरकार व मिल प्रबंधकों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
इस दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम सीटीएम को ज्ञापन सौंपते हुए सैकड़ों की संख्या में नारायणगढ़ हलका से पहुंचे किसानों ने मिल प्रबंधकों पर आरोप लगाते हुए कहा है कि मिल किसानों का पिछला गन्ने का करीब 66 करोड़ रुपये का भुगतान दबा कर बैठी है। किसानों ने मांग की है कि यह रकम दिलाई जाए। वहीं जो कर्मचारी मिल में सालों से काम कर रहे हैं, उन्हें नौकरी के दौरान मिलने वाले लाभ दिए जाएं। इसके साथ ही किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग की है कि बनौंदी चीनी मिल को सरकार खुद अपने हाथों में लेकर इसे चलाए। क्योंकि नारायाणगढ़ हलका की जीवन रेखा कही जाने वाली यह चीनी मिल अगर बंद हो गई तो हजारों किसानों के लिए आर्थिक मुसीबत खड़ी हो जाएगी।
वहीं दूर दराज की चीनी मिल में गन्ना बेचने में करीब 50 रुपये क्विंटल अतिरिक्त भार पड़ेगा, जो कि किसानों के साथ नाइंसाफी होगी। किसानों की अगुवाई कर रहे गुलशन सैनी का कहना है कि एक तरफ तो सरकार किसानों की फसल के दाम दोगुना करने की बात कह रही है। वहीं दूसरी तरफ मिल को बंद कर किसानों के पेट पर लाठी मारने का काम कर रही है। किसानों ने सरकार से मिल चलाने की मांग करते हुए कहा है कि अगर मिल बंद होती है तो इलाके के किसानों का जीवन अंधकारमय हो जाएगा। इसकी वजह से सीधे तौर पर हजारों किसान प्रभावित होंगे। वहीं मिल में काम कर रहे सैकड़ों कर्मचारियों का परिवार सड़क पर आ जाएगा। ऐसे में किसान चीनी मिल बचाने के लिए आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
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इस दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम सीटीएम को ज्ञापन सौंपते हुए सैकड़ों की संख्या में नारायणगढ़ हलका से पहुंचे किसानों ने मिल प्रबंधकों पर आरोप लगाते हुए कहा है कि मिल किसानों का पिछला गन्ने का करीब 66 करोड़ रुपये का भुगतान दबा कर बैठी है। किसानों ने मांग की है कि यह रकम दिलाई जाए। वहीं जो कर्मचारी मिल में सालों से काम कर रहे हैं, उन्हें नौकरी के दौरान मिलने वाले लाभ दिए जाएं। इसके साथ ही किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग की है कि बनौंदी चीनी मिल को सरकार खुद अपने हाथों में लेकर इसे चलाए। क्योंकि नारायाणगढ़ हलका की जीवन रेखा कही जाने वाली यह चीनी मिल अगर बंद हो गई तो हजारों किसानों के लिए आर्थिक मुसीबत खड़ी हो जाएगी।
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वहीं दूर दराज की चीनी मिल में गन्ना बेचने में करीब 50 रुपये क्विंटल अतिरिक्त भार पड़ेगा, जो कि किसानों के साथ नाइंसाफी होगी। किसानों की अगुवाई कर रहे गुलशन सैनी का कहना है कि एक तरफ तो सरकार किसानों की फसल के दाम दोगुना करने की बात कह रही है। वहीं दूसरी तरफ मिल को बंद कर किसानों के पेट पर लाठी मारने का काम कर रही है। किसानों ने सरकार से मिल चलाने की मांग करते हुए कहा है कि अगर मिल बंद होती है तो इलाके के किसानों का जीवन अंधकारमय हो जाएगा। इसकी वजह से सीधे तौर पर हजारों किसान प्रभावित होंगे। वहीं मिल में काम कर रहे सैकड़ों कर्मचारियों का परिवार सड़क पर आ जाएगा। ऐसे में किसान चीनी मिल बचाने के लिए आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
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