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नगर निगम में आए 12 गांव का सर्वे डेढ़ साल बाद भी अधूरा
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civic
- फोटो : Ambala
अंबाला सिटी। नगर निगम में शामिल किए गए 12 गांव सहित शहर में नगर निगम चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गए। बता दें कि करीब डेढ़ वर्ष पहले अंबाला के साथ लगते 12 गांव में पंचायतें भंग कर इन्हें शहर में शामिल किया गया था ताकि अलग से शहर में नगर निगम का गठन किया जा सके। इससे पहले छावनी और शहर को जोड़कर संयुक्त रूप से नगर निगम बनाया गया था जिसे वर्ष 2018 में भंग किया गया था। निगम में शामिल होने वाले 12 गांव ने इसका विरोध किया था। सबसे ज्यादा विरोध लोहगढ़ में हुआ था।
निगम में शामिल इन 12 गांव में प्रापर्टी आईडी को लेकर सर्वे शुरू किया गया था जिसका जिम्मा नगर निगम प्रशासन ने जयपुर की एक प्राईवेट कंपनी याशी कंसलटिंग सर्विसज प्राईवेट लिमिटेड को दिया था। कंपनी ने तीन साल में पूरा करना है। यही नहीं कंपनी ने गांव के साथ-साथ अंबाला के सभी रिहायशी भवनों समेत हर बिल्डिंग का भी सर्वे करना है। क्योंकि पिछला सर्वे कई साल पहले हुआ था जब छावनी और शहर संयुक्त रूप से निगम में शामिल थे। अब कंपनी को उन नए बने भवनों को खोजना होगा जो इस अवधि के दौरान बने हैं, या जिन लोगों की प्रापर्टी तो कम है लेकिन उन्हें ज्यादा टैक्स देना पड़ रहा है। वहीं उन लोगों की धड़कनें बढ़ने वाली हैं जिन्होंने अपने रसूख के चलते निगम में अपनी प्रापर्टी कम लिखवाई हुई है। जबकि उनके द्वारा दिया गया प्रापर्टी का ब्यौरा वास्तविक में उससे ज्यादा बनता है।
गांव लोहगढ़ के लोगों ने उस समय सर्वे करवाने से मना कर दिया था। जिसकी वजह से गांव का सर्वे नहीं हो पाया था। अब चुनाव हो गए हैं। दोबारा से गांव में कंपनी के लोग जाएंगे व सर्वे करेंगे। जल्द ही सर्वे का काम पूरा हो जाएगा। उसके बाद बचे हुए घरों पर प्रापर्टी आईडी लगाई जाएगी। जिससे कि निगम का राजस्व भी बढ़ेगा।
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-बलबीर सिंह, टैक्स ब्रांच अधिकारी, नगर निगम अंबाला।
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निगम में शामिल इन 12 गांव में प्रापर्टी आईडी को लेकर सर्वे शुरू किया गया था जिसका जिम्मा नगर निगम प्रशासन ने जयपुर की एक प्राईवेट कंपनी याशी कंसलटिंग सर्विसज प्राईवेट लिमिटेड को दिया था। कंपनी ने तीन साल में पूरा करना है। यही नहीं कंपनी ने गांव के साथ-साथ अंबाला के सभी रिहायशी भवनों समेत हर बिल्डिंग का भी सर्वे करना है। क्योंकि पिछला सर्वे कई साल पहले हुआ था जब छावनी और शहर संयुक्त रूप से निगम में शामिल थे। अब कंपनी को उन नए बने भवनों को खोजना होगा जो इस अवधि के दौरान बने हैं, या जिन लोगों की प्रापर्टी तो कम है लेकिन उन्हें ज्यादा टैक्स देना पड़ रहा है। वहीं उन लोगों की धड़कनें बढ़ने वाली हैं जिन्होंने अपने रसूख के चलते निगम में अपनी प्रापर्टी कम लिखवाई हुई है। जबकि उनके द्वारा दिया गया प्रापर्टी का ब्यौरा वास्तविक में उससे ज्यादा बनता है।
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गांव लोहगढ़ के लोगों ने उस समय सर्वे करवाने से मना कर दिया था। जिसकी वजह से गांव का सर्वे नहीं हो पाया था। अब चुनाव हो गए हैं। दोबारा से गांव में कंपनी के लोग जाएंगे व सर्वे करेंगे। जल्द ही सर्वे का काम पूरा हो जाएगा। उसके बाद बचे हुए घरों पर प्रापर्टी आईडी लगाई जाएगी। जिससे कि निगम का राजस्व भी बढ़ेगा।
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-बलबीर सिंह, टैक्स ब्रांच अधिकारी, नगर निगम अंबाला।