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Ambala News: रथयात्रा में गूंजे भगवान जगन्नाथ के जयकारे
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अंबाला। अंबाला छावनी में ओडिशा की तर्ज पर लोग भगवान जगन्नाथ के दर्शन और उनके रथ को खींचने का सौभाग्य प्राप्त कर रहे हैं। भक्त बांधव सोसाइटी की सोसाइटी की तरफ से भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव मंगलवार को मनाया गया। ये रथ यात्रा छावनी के सनातन धर्म मंदिर से शुरु होकर छावनी के विभिन्न क्षेत्रों में गई। इस दौरान लोगाें ने रथ यात्रा का स्वागत किया और भगवान जगन्नाथ जी के दर्शन किए। रथयात्रा का शुभारंभ मुख्यतिथि सनातन धर्म मंदिर प्रधान लक्ष्मी नारायण खन्ना ने झाड़ू लगाकर किया। रथयात्रा सनातन धर्म मंदिर से होते हुए एसडी स्कूल, लाइफलाइन अस्पताल, फतेहचंद बंसी लाल ज्वेलर्स, बीजेपी अहाता, अशोका डेयरी, ज्वैलरी बाजार, हनुमान मार्केट, रामबाजार, डाक्टर कौशिक चौक से होते हुए रथयात्रा हाउसिंग बोर्ड कालोनी स्थित रामदरबार पर पहुंची। जहां पर इस यात्रा का समापन हुआ और श्रद्धालु के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। यात्रा का रास्ते में कई जगह स्वागत किया गया और जलजीरा, लड्डू, ढोकला, ब्रैड पकौड़ा, बिस्किट का प्रसाद बांटा गया। इस अवसर पर संजय गुप्ता, आशीष मित्तल, विरेंद्र सहगल, नवीन जैन, उपेंद्र जिंदल, हरीश बांगा व अन्य मौजूद रहे।
अंबाला में 2012 से शुरू हुआ था श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव
इस अवसर पर भक्त बांधव साेसाइटी के वाइस प्रेसिडेंट संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि भक्ति वेदांत सिद्धांति महाराज के सानिध्य में 2012 से अंबाला में श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव का आयोजन किया जाता है। जहां जगन्नाथ से लाई गई कृष्ण, बलराम व सुभद्रा माता की मूर्तियां स्थापित है। साल 2011 में छावनी बीपीएस प्लेनेटेरियम में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया था। इस कथा में भक्ति वेदांत सिद्धांति महाराज ने भक्तों को कथा सुनाई थी। तब से आज तक वह श्रीमद्भागवत कथा साल में दो बार करवाते आ रहे हैं। श्रीमद्भागवत कथा के एक साल बाद 2012 से भगवान जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। उसी क्रम में मंगलवार को रथयात्रा का आयोजन किया गया।
करधान रोड पर बनाया जा रहा श्री कुज बिहारी गोड़िया मठ मंदिर
प्रभु प्रेमपुरम करधान रोड पर सरकरी स्कूल के पास भक्त बांधव सोसाइटी की ओर से 2015 से श्री कुज बिहारी गोड़िया मठ मंदिर बनाया जा रहा है। ये मंदिर करीब 90 प्रतिशत तक बनकर तैयार हो चुका है। इस मंदिर में गोपेश्वर महादेव, राधा कृष्ण, गिरिराज, शालीग्राम, की मूर्तियां स्थापित हैं। श्री कुंज बिहारी गोड़िया मठ मंदिर में पुरी से लाए गए चावल भी दिए जाते हैं, जिसे एकादशी का व्रत रखने वाले द्वादशी के दिन खाते हैं। संजीव कुमार ने बताया कि रविवार को मंदिर में नेत्र उत्सव मनाया गया था। इसके 15 दिन के बाद भगवान जगन्नाथ भक्तों को दर्शन देते हैं। इससे नेत्रों को आनंद मिलता है, वहीं 15 दिन पहले भगवान की स्नान यात्रा हुई। जिसमें भगवान को 108 मटकों से स्नान करवाया गया। मान्यता है कि पंद्रह दिन के लिए भगवान बीमार हो जाते हैं और भक्तों को दर्शन नहीं देते हैं। 15 दिन बीत जाने के बाद भगवान जगन्नाथ बाहर निकालकर सभी लाेगों को दर्शन देते है। इसलिए जगन्नाथ यात्रा निकाली जाती है। प्रत्येक रविवार को मंदिर में युवाओं को गीता का आध्यात्मिक ज्ञान दिया जाता है। इसके साथ ही युवाओं को नशा व मांसाहार को लेकर जागरूक किया जाता है।
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अंबाला में 2012 से शुरू हुआ था श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव
इस अवसर पर भक्त बांधव साेसाइटी के वाइस प्रेसिडेंट संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि भक्ति वेदांत सिद्धांति महाराज के सानिध्य में 2012 से अंबाला में श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव का आयोजन किया जाता है। जहां जगन्नाथ से लाई गई कृष्ण, बलराम व सुभद्रा माता की मूर्तियां स्थापित है। साल 2011 में छावनी बीपीएस प्लेनेटेरियम में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया था। इस कथा में भक्ति वेदांत सिद्धांति महाराज ने भक्तों को कथा सुनाई थी। तब से आज तक वह श्रीमद्भागवत कथा साल में दो बार करवाते आ रहे हैं। श्रीमद्भागवत कथा के एक साल बाद 2012 से भगवान जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। उसी क्रम में मंगलवार को रथयात्रा का आयोजन किया गया।
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करधान रोड पर बनाया जा रहा श्री कुज बिहारी गोड़िया मठ मंदिर
प्रभु प्रेमपुरम करधान रोड पर सरकरी स्कूल के पास भक्त बांधव सोसाइटी की ओर से 2015 से श्री कुज बिहारी गोड़िया मठ मंदिर बनाया जा रहा है। ये मंदिर करीब 90 प्रतिशत तक बनकर तैयार हो चुका है। इस मंदिर में गोपेश्वर महादेव, राधा कृष्ण, गिरिराज, शालीग्राम, की मूर्तियां स्थापित हैं। श्री कुंज बिहारी गोड़िया मठ मंदिर में पुरी से लाए गए चावल भी दिए जाते हैं, जिसे एकादशी का व्रत रखने वाले द्वादशी के दिन खाते हैं। संजीव कुमार ने बताया कि रविवार को मंदिर में नेत्र उत्सव मनाया गया था। इसके 15 दिन के बाद भगवान जगन्नाथ भक्तों को दर्शन देते हैं। इससे नेत्रों को आनंद मिलता है, वहीं 15 दिन पहले भगवान की स्नान यात्रा हुई। जिसमें भगवान को 108 मटकों से स्नान करवाया गया। मान्यता है कि पंद्रह दिन के लिए भगवान बीमार हो जाते हैं और भक्तों को दर्शन नहीं देते हैं। 15 दिन बीत जाने के बाद भगवान जगन्नाथ बाहर निकालकर सभी लाेगों को दर्शन देते है। इसलिए जगन्नाथ यात्रा निकाली जाती है। प्रत्येक रविवार को मंदिर में युवाओं को गीता का आध्यात्मिक ज्ञान दिया जाता है। इसके साथ ही युवाओं को नशा व मांसाहार को लेकर जागरूक किया जाता है।
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