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Ambala News: सराफा कारोबार 50 फीसदी घटा, जरूरी गहनों की ही खरीद
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अंबाला छावनी में जेवर की खरीदारी करते ग्राहक। फाइल फोटो
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। प्रधानमंत्री की अपील का सराफा बाजार पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है। बाजार में सोने-चांदी की मांग में भारी गिरावट आई है जिससे कारोबार करीब 50 प्रतिशत तक सिमट गया है। कभी खरीदारों से गुलजार रहने वाले बाजारों में सन्नाटा पसरा है, जिसने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी हैं।
प्रमुख सराफा कारोबारियों के मुताबिक, अब शोरूम में सिर्फ वही गिने-चुने लोग पहुंच रहे हैं, जिनके घरों में शादी या कोई अन्य मांगलिक कार्यक्रम हैं। यानी केवल अनिवार्य आभूषणों की ही खरीदारी हो रही है। इसके विपरीत, सोने को सुरक्षित निवेश मानने वाले निवेशक पूरी तरह से बाजार से दूरी बना चुके हैं।
बाहरी राज्यों के ग्राहक भी हुए कम: अंबाला के सराफा बाजार में हिमाचल, पंजाब आदि राज्याें से लोग आभूषणों की खरीदारी करने आते हैं। यहां सोने के आभूषणों के निर्माताओं की भी एक अच्छी संख्या है। इस बाजार पर सैकड़ों कर्मचारी निर्भर हैं।
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व्यापारियों का कहना है कि अब इन बाहरी ग्राहकों की संख्या में भारी कमी आई है। बाजार में काम न के बराबर होने से छोटे और बड़े दोनों तरह के कारोबारी परेशान हैं। व्यापारियों को डर है कि अगर बाजार का यही रुख रहा तो आने वाले दिनों में कारीगरों और कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
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अंबाला सिटी। प्रधानमंत्री की अपील का सराफा बाजार पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है। बाजार में सोने-चांदी की मांग में भारी गिरावट आई है जिससे कारोबार करीब 50 प्रतिशत तक सिमट गया है। कभी खरीदारों से गुलजार रहने वाले बाजारों में सन्नाटा पसरा है, जिसने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी हैं।
प्रमुख सराफा कारोबारियों के मुताबिक, अब शोरूम में सिर्फ वही गिने-चुने लोग पहुंच रहे हैं, जिनके घरों में शादी या कोई अन्य मांगलिक कार्यक्रम हैं। यानी केवल अनिवार्य आभूषणों की ही खरीदारी हो रही है। इसके विपरीत, सोने को सुरक्षित निवेश मानने वाले निवेशक पूरी तरह से बाजार से दूरी बना चुके हैं।
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बाहरी राज्यों के ग्राहक भी हुए कम: अंबाला के सराफा बाजार में हिमाचल, पंजाब आदि राज्याें से लोग आभूषणों की खरीदारी करने आते हैं। यहां सोने के आभूषणों के निर्माताओं की भी एक अच्छी संख्या है। इस बाजार पर सैकड़ों कर्मचारी निर्भर हैं।
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व्यापारियों का कहना है कि अब इन बाहरी ग्राहकों की संख्या में भारी कमी आई है। बाजार में काम न के बराबर होने से छोटे और बड़े दोनों तरह के कारोबारी परेशान हैं। व्यापारियों को डर है कि अगर बाजार का यही रुख रहा तो आने वाले दिनों में कारीगरों और कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।