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Ambala News: बूम बैरियर की सुविधा पर लगेगा ग्रहण, ठेकेदार काम छोड़ने की तैयारी में
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अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन के आगमन द्वार पर कार्यरत एक बूम बैरियर। संवाद
अंबाला। हरियाणा के सबसे पहले रेलवे स्टेशन अंबाला छावनी पर शुरू की गई बूम बैरियर की सुविधा दम तोड़ती नजर आ रही है। ठेकेदार ने काम छोड़ने की तैयारी कर ली है। इसी ठेकेदार के पास पहले सहारनपुर पार्किंग का काम भी था जो उसने बंद कर दिया है। प्रतिमाह हो रहे नुकसान की भरपाई न होने के कारण ठेकेदार जल्द ही इस पार्किंग को भी सरेंडर कर देगा, इसलिए उसने बूम बैरियर पर कर्मचारियों की संख्या में भी कमी कर दी है। पहले जहां आवागमन के रास्तों पर दो-दो कर्मचारी तैनात किए गए थे, अब वहां सिर्फ एक-एक ही कर्मचारी को तैनात किया गया है और अन्य रास्ते को बंद कर दिया गया है।
2.5 करोड़ की पार्किंग
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर कार पार्किंग का ठेका लगभग ढाई करोड़ रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से जारी किया गया था, इसमें दोपहिया पार्किंग की सुविधा उपलब्ध करवाई गई, वहीं कारों के लिए दो प्रकार की सुविधाएं प्रदान की गईं, इनमें एक के तहत पिक एंड ड्रॉप सुविधा और दूसरी सीधा पार्किंग में वाहन को खड़ा करने की थी। कार पार्किंग की सुविधा तो सिरे चढ़ गई, लेकिन दोपहिया पार्किंग की सुविधा सिरे नहीं चढ़ पाई क्योंकि स्टेशन पर कार्यरत अधिकांश कर्मचारियों ने पास ही नहीं बनवाए। इस दौरान कभी यूनियन ने ठेकेदार पर दबाव बनाया तो कभी बाहरी तत्वों ने, इन सबको देखते हुए ठेकेदार ने दोपहिया वाहनों पर शिकंजा ही नहीं कसा।
10 लाख रुपये का नुकसान
ठेकेदार को प्रतिमाह पार्किंग का खर्च लगभग 21 लाख रुपये पड़ रहा है और आमदनी 10 से 11 लाख के बीच है, यानी प्रतिमाह 10 लाख रुपये का नुकसान ठेकेदार को हो रहा है। ऐसे में उसने बड़ी मुश्किल से पांच माह का समय स्टेशन पर काटा है और अब वह धीरे-धीरे काम को समेटने में लग गया है ताकि रेलवे को पत्र लिखकर पार्किंग से छुटकारा पाया जा सके। इस वजह से ठेकेदार कारिंदों की तनख्वाह का भी खर्च नहीं निकाल पा रहा है।
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अभी ऐसी कोई जानकारी मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ठेकेदार को कोई परेशानी है तो वह उनसे आकर मिल सकता है। यह भी जानकारी मिली है कि वह सिर्फ कारों की ही पार्किंग फीस ले रहा है, जबकि उसने दोपहिया वाहनों के लिए कोई भी कार्रवाई नहीं की है।
- नवीन कुमार झा, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल।
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2.5 करोड़ की पार्किंग
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर कार पार्किंग का ठेका लगभग ढाई करोड़ रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से जारी किया गया था, इसमें दोपहिया पार्किंग की सुविधा उपलब्ध करवाई गई, वहीं कारों के लिए दो प्रकार की सुविधाएं प्रदान की गईं, इनमें एक के तहत पिक एंड ड्रॉप सुविधा और दूसरी सीधा पार्किंग में वाहन को खड़ा करने की थी। कार पार्किंग की सुविधा तो सिरे चढ़ गई, लेकिन दोपहिया पार्किंग की सुविधा सिरे नहीं चढ़ पाई क्योंकि स्टेशन पर कार्यरत अधिकांश कर्मचारियों ने पास ही नहीं बनवाए। इस दौरान कभी यूनियन ने ठेकेदार पर दबाव बनाया तो कभी बाहरी तत्वों ने, इन सबको देखते हुए ठेकेदार ने दोपहिया वाहनों पर शिकंजा ही नहीं कसा।
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10 लाख रुपये का नुकसान
ठेकेदार को प्रतिमाह पार्किंग का खर्च लगभग 21 लाख रुपये पड़ रहा है और आमदनी 10 से 11 लाख के बीच है, यानी प्रतिमाह 10 लाख रुपये का नुकसान ठेकेदार को हो रहा है। ऐसे में उसने बड़ी मुश्किल से पांच माह का समय स्टेशन पर काटा है और अब वह धीरे-धीरे काम को समेटने में लग गया है ताकि रेलवे को पत्र लिखकर पार्किंग से छुटकारा पाया जा सके। इस वजह से ठेकेदार कारिंदों की तनख्वाह का भी खर्च नहीं निकाल पा रहा है।
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अभी ऐसी कोई जानकारी मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ठेकेदार को कोई परेशानी है तो वह उनसे आकर मिल सकता है। यह भी जानकारी मिली है कि वह सिर्फ कारों की ही पार्किंग फीस ले रहा है, जबकि उसने दोपहिया वाहनों के लिए कोई भी कार्रवाई नहीं की है।
- नवीन कुमार झा, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल।