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Ambala News: स्कूलों में किताबों की दुकान, असहाय विभाग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Apr 2025 01:19 AM IST
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Bookstores in schools, helpless departments
शहर में एक निजी स्टोर पर लगी किताबों के रेट की सूची।
अंबाला सिटी। नया शैक्षिक सत्र शुरू होने से निजी स्कूलाें में दाखिले का क्रम जारी है। वहीं, दूसरी तरफ किताबों की दुकानों पर अभिभावकों की भीड़ दिखाई दे रही है। इसके साथ ही अभिभावकों को भारी दामों पर किताबें खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है, मगर हैरानी इस बात की है कि हर साल की तरह इस साल भी शिक्षा विभाग अपने आप को असहाय की तरह प्रदर्शित कर रहा है।
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शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोई शिकायत आएगी तो कार्रवाई होगी, जबकि बाजार में खुलेआम निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने को अभिभावकों को मजबूर किया जा रहा है। अभी तक शिक्षा विभाग की तरफ से किताबों की चेकिंग के लिए न तो कोई कमेटी बनी है और न ही कोई कार्रवाई अमल में लाई गई है। विभाग के हाथ पर हाथ रखकर बैठने से लग रहा है कि हर साल की तरह इस साल भी अभिभावकों को इसी तरह से स्कूल संचालकों और दुकानदारों की मनमानी का सामना करना पड़ेगा।
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सातवीं का कोर्स चार से पांच हजार में
छावनी में जगाधरी राजमार्ग स्थित निजी स्कूल की कक्षा सात की पुस्तकों के दाम दुकानदारों से लिए तो उन्होंने बताया कि चार हजार से पांच हजार रुपये तक की कीमत में कोर्स उपलब्ध है। इसी प्रकार कक्षा आठ की पुस्तकें छह से सात हजार रुपये की आ रही हैं। इसके बाद कापियां और स्टेशनरी का सामान अलग से लेना पड़ेगा। अभिभावकों को बिल तक नहीं दिए जा रहे हैं। यही नहीं नर्सरी विंग की पुस्तकें व कापियों का सेट भी चार हजार से 4500 रुपये तक मिल रहा है।
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मजबूरी में अभिभावक खरीद रहे काेर्स
महंगे कोर्स मजबूरी में खरीदने को लेकर अभिभावक परेशान हैं, क्योंकि अगर उन्होंने शिकायत की तो बच्चे के भविष्य पर बात आने का डर है। यही कारण है कि वह निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर हर साल परेशान होते हैं।


वर्जन
एनसीईआरटी की किताबें स्कूलों में लगनी चाहिए। शिकायत मिलती है तो हम कार्रवाई करेंगे। अगर यह शिकायत भी मिलती है कि स्कूल प्रबंधन निजी संचालकों की किताबें चला रहे हैं तब भी कार्रवाई होगी। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अगर किताब, वर्दी से संबंधित कोई शिकायत आती है तो वह इस पर कार्रवाई करते हुए समाधान करेंगे। कोई भी स्कूल अभिभावकों को स्टोर से किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
सुधीर कालड़ा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, अंबाला।

शहर में एक निजी स्टोर पर लगी किताबों के रेट की सूची।

शहर में एक निजी स्टोर पर लगी किताबों के रेट की सूची।

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