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Ambala News: रेलयात्रियों पर भारी, पानी की कालाबाजारी
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वैभव शर्मा
अंबाला। महंगाई के दौर में रेलवे ने कुछ उत्पादों पर राहत दी है। मगर इससे भी जनता महरूम है। स्टेशनों पर बिकने वाले खाने-पीने के उत्पादों की कालाबाजारी चल रही है। यहां तक कि स्टेशनों पर बिकने वाले खुले फिल्टर पानी में भी प्रति लीटर दो रुपये ज्यादा लिए जा रहे हैं। सुनने में दो रुपये ज्यादा लेने की बात महज सामान्य लगे, लेकिन बात जब दिन और महीने भर की आंकड़ों की हो तो तस्वीर बदल जाती है।
मामला संज्ञान में आने के बाद अमर उजाला ने छावनी रेलवे स्टेशन पर धरातलीय हकीकत को जाना तो यह धांधली उजागर हुई। प्लेटफार्म एक से लेकर सात तक सभी वाटर वेंडिंग मशीनों पर कार्यरत वेंडर्स एक लीटर पानी के 10 रुपये ही मांगे। जब उनसे आठ रुपये की बात की गई तो बोले मालिक ने 10 रुपये लेने के निर्देश दिए हैं।
ऐसे चलता है कालाबाजारी का खेल
फोटो- 27
प्लेटफार्म नंबर एक
यहां पर वाटर वेंडिंग मशीन पर कार्यरत कर्मचारी से एक लीटर पानी की बोतल के रेट पूछे तो उसने 10 रुपये बताए। जबकि स्टॉल के बाहर ही दामों की सूची पर एक लीटर पानी के आठ रुपये अंकित हैं। जब कर्मचारी से कहा तो कहने लगा कि आप आठ ही दें। जबकि यहां पर रेट को लेकर पहले ही एक ग्राहक बहस कर रहा था।
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फोटो- 28
प्लेटफार्म नंबर दो-तीन
यहां पर भी एक वाटर वेंडिंग मशीन रेलवे ने लगाई है। इसमें बोर्ड पर तो आठ रुपये एक लीटर फिल्टर पानी की बोतल के लिखे हैं, मगर मांग 10 रुपये रहे हैं। जब कारण पूछा तो कर्मचारी बोला हमें ऊपर से ही मालिक ने बोल रखा है।
फोटो- 29
प्लेट फार्म नंबर छह और सात
यहां भी वाटर वेंडिंग मशीन के स्टॉल पर लोगों को पानी की बोतल दी जा रही थी। एक लीटर पानी की बोतल के आठ रुपये के स्थान पर 10 रुपये लिए जा रहे थे। जब कारण पूछा तो कर्मचारी ने कहा मालिक ने कहा है। फिर कहने लगा चलो आप आठ रुपये ही दे दो।
ऐसे समझें कमाई का गणित
एक लीटर की एक बोतल की रेलवे ने आठ रुपये कीमत तय है। बाकायदा वेंडर्स को रेट लिस्ट भी स्टॉल पर लगानी है। मगर यह ऊपर की तरफ या नीचे की तरफ लगा दी जाती है। इससे सीधे लोगों के संज्ञान में रेट न आएं। अब एक दिन में अंबाला छावनी के स्टेशन पर 250 से अधिक ट्रेनें आती हैं। इनमें सिर्फ अंबाला स्टेशन से 55 हजार के करीब यात्री रोजाना आवागमन करते हैं। अन्य क्षेत्रों से ट्रेन में बैठकर आने वालों की संख्या जोड़ें तो यात्रीभार लाखों होता है। अब स्टेशन पर एक दिन लगभग 1000 बोतल औसत खुले पानी की बिकती हैं। ऐसे में एक बोतल से दो रुपये वेंडर ने बचाए तो 2000 रुपये प्रतिदिन बचाए। अगर इसी आंकड़े को महीने के हिसाब से देखें तो 60000 रुपये प्रति माह कमाई हो रही है वह ही रेलवे के परिसर में, जबकि इससे रेलवे की छवि धूमिल हो रही है। आए दिन लोग इन वेंडर्स से बहस कर रहे हैं। इस मामले से जुड़ी कई शिकायतें स्टेशन पर तैनात अधिकारियों के संज्ञान में भी आईं हैं। उन्होंने भी अपने स्तर पर वेंडर्स को चेतावनी दी थी। बावजूद इसके यह खेल खुल्लम खुल्ला चल रहा है।
वर्जन
मामला हमारे संज्ञान में आया है। एक लीटर पानी का बोतल सहित रेट 8 रुपये निर्धारित है। अगर वाटर वेंडिंग मशीन पर कार्यरत वेंडर 10 रुपये ले रहे हैं तो यह गलत है। इस संबंध नियमानुसार जो भी कार्रवाई बनेगी वह की जाएगी ताकि निर्धारित रेट पर ही यात्रियों को साफ व स्वच्छ पानी की सुविधा मिल सके।
-नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला रेल मंडल
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अंबाला। महंगाई के दौर में रेलवे ने कुछ उत्पादों पर राहत दी है। मगर इससे भी जनता महरूम है। स्टेशनों पर बिकने वाले खाने-पीने के उत्पादों की कालाबाजारी चल रही है। यहां तक कि स्टेशनों पर बिकने वाले खुले फिल्टर पानी में भी प्रति लीटर दो रुपये ज्यादा लिए जा रहे हैं। सुनने में दो रुपये ज्यादा लेने की बात महज सामान्य लगे, लेकिन बात जब दिन और महीने भर की आंकड़ों की हो तो तस्वीर बदल जाती है।
मामला संज्ञान में आने के बाद अमर उजाला ने छावनी रेलवे स्टेशन पर धरातलीय हकीकत को जाना तो यह धांधली उजागर हुई। प्लेटफार्म एक से लेकर सात तक सभी वाटर वेंडिंग मशीनों पर कार्यरत वेंडर्स एक लीटर पानी के 10 रुपये ही मांगे। जब उनसे आठ रुपये की बात की गई तो बोले मालिक ने 10 रुपये लेने के निर्देश दिए हैं।
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ऐसे चलता है कालाबाजारी का खेल
फोटो- 27
प्लेटफार्म नंबर एक
यहां पर वाटर वेंडिंग मशीन पर कार्यरत कर्मचारी से एक लीटर पानी की बोतल के रेट पूछे तो उसने 10 रुपये बताए। जबकि स्टॉल के बाहर ही दामों की सूची पर एक लीटर पानी के आठ रुपये अंकित हैं। जब कर्मचारी से कहा तो कहने लगा कि आप आठ ही दें। जबकि यहां पर रेट को लेकर पहले ही एक ग्राहक बहस कर रहा था।
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फोटो- 28
प्लेटफार्म नंबर दो-तीन
यहां पर भी एक वाटर वेंडिंग मशीन रेलवे ने लगाई है। इसमें बोर्ड पर तो आठ रुपये एक लीटर फिल्टर पानी की बोतल के लिखे हैं, मगर मांग 10 रुपये रहे हैं। जब कारण पूछा तो कर्मचारी बोला हमें ऊपर से ही मालिक ने बोल रखा है।
फोटो- 29
प्लेट फार्म नंबर छह और सात
यहां भी वाटर वेंडिंग मशीन के स्टॉल पर लोगों को पानी की बोतल दी जा रही थी। एक लीटर पानी की बोतल के आठ रुपये के स्थान पर 10 रुपये लिए जा रहे थे। जब कारण पूछा तो कर्मचारी ने कहा मालिक ने कहा है। फिर कहने लगा चलो आप आठ रुपये ही दे दो।
ऐसे समझें कमाई का गणित
एक लीटर की एक बोतल की रेलवे ने आठ रुपये कीमत तय है। बाकायदा वेंडर्स को रेट लिस्ट भी स्टॉल पर लगानी है। मगर यह ऊपर की तरफ या नीचे की तरफ लगा दी जाती है। इससे सीधे लोगों के संज्ञान में रेट न आएं। अब एक दिन में अंबाला छावनी के स्टेशन पर 250 से अधिक ट्रेनें आती हैं। इनमें सिर्फ अंबाला स्टेशन से 55 हजार के करीब यात्री रोजाना आवागमन करते हैं। अन्य क्षेत्रों से ट्रेन में बैठकर आने वालों की संख्या जोड़ें तो यात्रीभार लाखों होता है। अब स्टेशन पर एक दिन लगभग 1000 बोतल औसत खुले पानी की बिकती हैं। ऐसे में एक बोतल से दो रुपये वेंडर ने बचाए तो 2000 रुपये प्रतिदिन बचाए। अगर इसी आंकड़े को महीने के हिसाब से देखें तो 60000 रुपये प्रति माह कमाई हो रही है वह ही रेलवे के परिसर में, जबकि इससे रेलवे की छवि धूमिल हो रही है। आए दिन लोग इन वेंडर्स से बहस कर रहे हैं। इस मामले से जुड़ी कई शिकायतें स्टेशन पर तैनात अधिकारियों के संज्ञान में भी आईं हैं। उन्होंने भी अपने स्तर पर वेंडर्स को चेतावनी दी थी। बावजूद इसके यह खेल खुल्लम खुल्ला चल रहा है।
वर्जन
मामला हमारे संज्ञान में आया है। एक लीटर पानी का बोतल सहित रेट 8 रुपये निर्धारित है। अगर वाटर वेंडिंग मशीन पर कार्यरत वेंडर 10 रुपये ले रहे हैं तो यह गलत है। इस संबंध नियमानुसार जो भी कार्रवाई बनेगी वह की जाएगी ताकि निर्धारित रेट पर ही यात्रियों को साफ व स्वच्छ पानी की सुविधा मिल सके।
-नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला रेल मंडल