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Ambala News: दैनिक ट्रेनों के लिए रास्ते रोकी जा रहीं विशेष ट्रेनें
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अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर चंडीगढ़-लखनऊ विशेष ट्रेन के इंतजार में प्लेटफार्म एक पर बैठे यात्री
फोटो-27 व 28
यात्री परेशान, बोले समय पर नहीं चला सकते तो घोषणा क्यों करता है रेलवे
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। विशेष ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को समय पर ट्रेन नहीं मिल पा रही है। हालात यह हैं कि शनिवार को यात्री दोपहर दो बजे, चंडीगढ़ से लखनऊ की तरफ जाने वाली यात्री विशेष ट्रेन 04210 का घंटों इंतजार करते रहे।
ट्रेन को सुबह लगभग 11 बजे कैंट स्टेशन पर पहुंचना था और यात्री भी समय से पहले ही परिजनों संग स्टेशन पर पहुंच गए थे। लेकिन ट्रेन लगभग तीन घंटे की देरी से अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर पहुंची। ऐसे हालात रोजाना अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर देखने को मिल रहे हैं। जहां विशेष ट्रेनों के इंतजार में यात्रियों को स्टेशन पर घंटों बैठना पड़ रहा है। ऐसे में परेशान यात्रियों ने तो सोशल मीडिया के माध्यम से रोष भी जताना शुरु कर दिया है।
दैनिक के मुकाबले अधिक किराया
रेलवे द्वारा संचालित की जा रही विशेष ट्रेनों का किराया दैनिक ट्रेनों के मुकाबले अधिक है। लेकिन सुविधाओं के मामले में यह ट्रेनें फिसड्डी साबित हो रही हैं। उदाहरण के तौर पर अंबाला कैंट से बरेली तक स्लीपर श्रेणी का दैनिक ट्रेन में किराया लगभग 300 रुपये है जबकि विशेष ट्रेन में यात्री को इसके लिए लगभग 450 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
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रेलवे के लिए भी सिरदर्दी
भीड़भाड़ को नियंत्रण में रखने के लिए बेशक रेलवे विशेष ट्रेनों का संचालन कर देता है। लेकिन इन ट्रेनों का संचालन रेलवे के लिए भी सिरदर्दी बन जाता है और इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है। शनिवार को चंडीगढ़ से चली विशेष ट्रेन को पहले शताब्दी के संचालन में बीच रास्ते रोक दिया गया। जब ट्रेन अंबाला यार्ड में पहुंची तो मालगाड़ी को प्लेटफार्म एक पर भेज दिया गया।
ऑप्रेटिंग विभाग की लापरवाही
ट्रेन के संचालन में ऑप्रेटिंग विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ट्रेन के गंतव्य स्टेशन से चलते ही इसकी जानकारी रेलवे के साफ्टवेयर में भी अपडेट करनी होती है जोकि समय पर नहीं की जाती। जब राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ सिस्टम पर जानकारी हासिल की जाती है तो इसमें दिखाया जाता है कि ट्रेन अभी काफी पीछे है और उसे अंबाला कैंट आने में आधे घंटे का समय लग जाएगा। जबकि ट्रेन चंद मिनटों बाद ही प्लेटफार्म पर आकर खड़ी हो जाती है। पिछले दिनों अमृतसर से नई दिल्ली के बीच चलाई गई एक दिवसीय वंदेभारत एक्सप्रेस 04616 के भी ऐसे ही हालात नजर आए थे। जब एप यात्रियों ने देखा तो ट्रेन शंभू स्टेशन के नजदीक थी, लेकिन एक से दो मिनट में ही ट्रेन प्लेटफार्म एक पर पहुंच गई थी।
वर्जन
ट्रेनों को समय पर संचालन के लिए हमारा हमेशा प्रयास रहता है। लेकिन कई बार सुरक्षा संबंधित या फिर अन्य कार्याें की वजह से ट्रेनों को बीच रास्ते रोक दिया जाता है। विशेष ट्रेनों को समय पर चलाना भी रेलवे की प्राथमिकता है। इस पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला।
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यात्री परेशान, बोले समय पर नहीं चला सकते तो घोषणा क्यों करता है रेलवे
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। विशेष ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को समय पर ट्रेन नहीं मिल पा रही है। हालात यह हैं कि शनिवार को यात्री दोपहर दो बजे, चंडीगढ़ से लखनऊ की तरफ जाने वाली यात्री विशेष ट्रेन 04210 का घंटों इंतजार करते रहे।
ट्रेन को सुबह लगभग 11 बजे कैंट स्टेशन पर पहुंचना था और यात्री भी समय से पहले ही परिजनों संग स्टेशन पर पहुंच गए थे। लेकिन ट्रेन लगभग तीन घंटे की देरी से अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर पहुंची। ऐसे हालात रोजाना अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर देखने को मिल रहे हैं। जहां विशेष ट्रेनों के इंतजार में यात्रियों को स्टेशन पर घंटों बैठना पड़ रहा है। ऐसे में परेशान यात्रियों ने तो सोशल मीडिया के माध्यम से रोष भी जताना शुरु कर दिया है।
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दैनिक के मुकाबले अधिक किराया
रेलवे द्वारा संचालित की जा रही विशेष ट्रेनों का किराया दैनिक ट्रेनों के मुकाबले अधिक है। लेकिन सुविधाओं के मामले में यह ट्रेनें फिसड्डी साबित हो रही हैं। उदाहरण के तौर पर अंबाला कैंट से बरेली तक स्लीपर श्रेणी का दैनिक ट्रेन में किराया लगभग 300 रुपये है जबकि विशेष ट्रेन में यात्री को इसके लिए लगभग 450 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
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रेलवे के लिए भी सिरदर्दी
भीड़भाड़ को नियंत्रण में रखने के लिए बेशक रेलवे विशेष ट्रेनों का संचालन कर देता है। लेकिन इन ट्रेनों का संचालन रेलवे के लिए भी सिरदर्दी बन जाता है और इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है। शनिवार को चंडीगढ़ से चली विशेष ट्रेन को पहले शताब्दी के संचालन में बीच रास्ते रोक दिया गया। जब ट्रेन अंबाला यार्ड में पहुंची तो मालगाड़ी को प्लेटफार्म एक पर भेज दिया गया।
ऑप्रेटिंग विभाग की लापरवाही
ट्रेन के संचालन में ऑप्रेटिंग विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ट्रेन के गंतव्य स्टेशन से चलते ही इसकी जानकारी रेलवे के साफ्टवेयर में भी अपडेट करनी होती है जोकि समय पर नहीं की जाती। जब राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ सिस्टम पर जानकारी हासिल की जाती है तो इसमें दिखाया जाता है कि ट्रेन अभी काफी पीछे है और उसे अंबाला कैंट आने में आधे घंटे का समय लग जाएगा। जबकि ट्रेन चंद मिनटों बाद ही प्लेटफार्म पर आकर खड़ी हो जाती है। पिछले दिनों अमृतसर से नई दिल्ली के बीच चलाई गई एक दिवसीय वंदेभारत एक्सप्रेस 04616 के भी ऐसे ही हालात नजर आए थे। जब एप यात्रियों ने देखा तो ट्रेन शंभू स्टेशन के नजदीक थी, लेकिन एक से दो मिनट में ही ट्रेन प्लेटफार्म एक पर पहुंच गई थी।
वर्जन
ट्रेनों को समय पर संचालन के लिए हमारा हमेशा प्रयास रहता है। लेकिन कई बार सुरक्षा संबंधित या फिर अन्य कार्याें की वजह से ट्रेनों को बीच रास्ते रोक दिया जाता है। विशेष ट्रेनों को समय पर चलाना भी रेलवे की प्राथमिकता है। इस पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला।