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Ambala News: एक्यूआई 145, फाने जलाने पर 34 लोगों पर जुर्माना
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अंबाला सिटी। फसल अवशेष जलाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। दूसरी तरफ अंबाला का वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 145 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया है। इसको देखते हुए प्रशासन सख्त कार्रवाई करता दिखाई दे रहा है। जिले में 17 अक्तूबर तक हरसेक की सेटेलाइट के माध्यम से 66 और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर तीन मामले सामने आए हैं।
इस जिले में अब तक 69 सूचनाएं फानों में आग लगाने की प्राप्त हो चुकी हैं। इन सूचनाओं में से 35 सूचनाएं सही नहीं पाई गई और 34 सूचनाएं सही पाई गईं। इन सभी के चालान किए गये हैं। इन चालानों के माध्यम से 85 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। एक मामले में कार्रवाई की जा रही है। अंबाला में अभी वायु प्रदूषण येलो अलर्ट पर है। इसका मतलब होता है सतर्क रहें।
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर आएगा लाल निशान
वहीं दूसरी तरफ फसल अवशेष जलाने वाले किसानों के लिए मुसीबत बढ़ने वाली है। सरकार के निर्देशों पर अब धान की फसल के अवशेषों को जलाने वाले लोगों के मेरी फसल मेरा ब्यौरा रिकार्ड में लाल निशान की एंट्री दर्ज की जाएगी। इस लाल एंट्री को दर्ज करने का प्रावधान पोर्टल पर कर दिया गया है। इस लाल एंट्री की प्रविष्टि खेत के खसरा नंबर के अनुसार दर्ज किया जाएगा। लाल निशान की प्रविष्टि होने पर किसान की अगले दो सत्रों तक ई-खरीद पोर्टल के माध्यम से फसल बेचने पर प्रतिबंध लग जाएगा।
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अवशेषों को मशीन से मिट्टी में मिलाएं
डीसी पार्थ गुप्ता ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत अवशेषों को मशीनों की सहायता से मिट्टी में मिलाने पर किसानों को प्रति एकड़ एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि धान अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी तथा वातावरण को स्वच्छ रखने में सहायता मिलेगी। जिला के किसान हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, रिवर्सिबल एमबी प्लॉव और जीरो टिल सीड ड्रील की सहायता से धान अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन कर सकते हैं।
ये होते हैं फसल अवशेष
फसल अवशेष खेत में पौधे का वह हिस्सा होते हैं जो फसल की कटाई के बाद खेत में ही छोड़ दिया जाता है। भूसा, पत्ते, तना, डंठल आदि फसल अवशेष कहलाते हैं। गेहूं, धान व अन्य दूसरी फसलों से काफी मात्रा में फसल अवशेष मिलते हैं। हर बार किसान इन्हें आग के हवाले कर देते हैं जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है।
फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान
- मिट्टी की उर्वरक शक्ति कम हो जाती है।
- मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीवाणु और केचुएं मर जाते हैं।
- जैविक कार्बन जलकर नष्ट हो जाता है।
- वातावरण में वायु प्रदूषण होता है।
- स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं।
बीते पांच दिनों में यह रहा अंबाला का एक्यूआई
14 अक्तूबर- 119
15 अक्तूबर- 125
16 अक्तूबर- 126
17 अक्तूबर- 180
18 अक्तूबर- 145
नोट- वायु प्रदूषण माइक्रोग्राम प्रतिघनमीटर में है।
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इस जिले में अब तक 69 सूचनाएं फानों में आग लगाने की प्राप्त हो चुकी हैं। इन सूचनाओं में से 35 सूचनाएं सही नहीं पाई गई और 34 सूचनाएं सही पाई गईं। इन सभी के चालान किए गये हैं। इन चालानों के माध्यम से 85 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। एक मामले में कार्रवाई की जा रही है। अंबाला में अभी वायु प्रदूषण येलो अलर्ट पर है। इसका मतलब होता है सतर्क रहें।
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मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर आएगा लाल निशान
वहीं दूसरी तरफ फसल अवशेष जलाने वाले किसानों के लिए मुसीबत बढ़ने वाली है। सरकार के निर्देशों पर अब धान की फसल के अवशेषों को जलाने वाले लोगों के मेरी फसल मेरा ब्यौरा रिकार्ड में लाल निशान की एंट्री दर्ज की जाएगी। इस लाल एंट्री को दर्ज करने का प्रावधान पोर्टल पर कर दिया गया है। इस लाल एंट्री की प्रविष्टि खेत के खसरा नंबर के अनुसार दर्ज किया जाएगा। लाल निशान की प्रविष्टि होने पर किसान की अगले दो सत्रों तक ई-खरीद पोर्टल के माध्यम से फसल बेचने पर प्रतिबंध लग जाएगा।
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अवशेषों को मशीन से मिट्टी में मिलाएं
डीसी पार्थ गुप्ता ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत अवशेषों को मशीनों की सहायता से मिट्टी में मिलाने पर किसानों को प्रति एकड़ एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि धान अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी तथा वातावरण को स्वच्छ रखने में सहायता मिलेगी। जिला के किसान हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, रिवर्सिबल एमबी प्लॉव और जीरो टिल सीड ड्रील की सहायता से धान अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन कर सकते हैं।
ये होते हैं फसल अवशेष
फसल अवशेष खेत में पौधे का वह हिस्सा होते हैं जो फसल की कटाई के बाद खेत में ही छोड़ दिया जाता है। भूसा, पत्ते, तना, डंठल आदि फसल अवशेष कहलाते हैं। गेहूं, धान व अन्य दूसरी फसलों से काफी मात्रा में फसल अवशेष मिलते हैं। हर बार किसान इन्हें आग के हवाले कर देते हैं जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है।
फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान
- मिट्टी की उर्वरक शक्ति कम हो जाती है।
- मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीवाणु और केचुएं मर जाते हैं।
- जैविक कार्बन जलकर नष्ट हो जाता है।
- वातावरण में वायु प्रदूषण होता है।
- स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं।
बीते पांच दिनों में यह रहा अंबाला का एक्यूआई
14 अक्तूबर- 119
15 अक्तूबर- 125
16 अक्तूबर- 126
17 अक्तूबर- 180
18 अक्तूबर- 145
नोट- वायु प्रदूषण माइक्रोग्राम प्रतिघनमीटर में है।