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Ambala News: कश्यप राजपूत पंजाबी समाज का वार्षिक मेला कल से शुरू
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अंबाला सिटी। देवी नगर में कश्यप राजपूत पंजाबी समाज के 50वें वार्षिक मेले को लेकर सोसाइटी की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 12 अप्रैल से शुरू होने वाले इस दो दिवसीय मेले में शनिवार को माता रानी का जागरण किया जाएगा। जिसमें मुख्यमंत्री नायब सैनी शिरकत करते हुए ज्योति प्रकाश करेंगे। जागरण के बाद रविवार को विभिन्न क्षेत्रों से आए हुए लोग अपने - अपने गोत्र के मंदिरों में पूजन करेंगे। गौरतलब है कि देवी नगर में स्थित मंदिर में कश्यप समाज के 44 मंदिर बनाए गए हैं।
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दो लाख लोगों के लिए बनेगा भोजन
कश्यप राजपूत पंजाबी समाज सेवा सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनूप भारद्वाज कश्यप ने बताया कि इस वर्ष यह मेला बड़ी धूमधाम से आयोजित किया जाएगा। क्योंकि इस वर्ष समाज की नींव रखे को 100 वर्ष पूरे हुए हैं। यहां पर करीब दो लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था के लिए वीरवार से तैयारियां शुरू कर दी हैं। 250 लोग 100 चूल्हों पर दो लाख लोगों का भोजन तैयार करेंगे। दो दिनों तक मंदिर में अटूट भंडारा वितरित किया जाएगा। प्रत्येक वर्ष इस मेले में हरियाणा पंजाब सहित देश के कोने- कोने से लोग यहां पहुंचते हैं। सबसे ज्यादा करनाल, यमुनानगर और अंबाला से समाज के लोग इस मेले में शामिल होने के लिए आते हैं।
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हर गोत्र का अलग मंदिर
अनूप भारद्वाज ने बताया कि इस मंदिर में पूरे कश्यप समाज के 44 गोत्र के लिए अलग- अलग मंदिर बनाए गए हैं। समाज के लोग इन्हीं 44 गोत्रों में विवाह करते हैं। करीब 100 वर्ष पूर्व समाज के पूर्वजों ने यहां पर स्थान लिया था। मेले के अलावा सोसाइटी द्वारा गरीब कन्याओं के विवाह, लंगर लगाने जैसे कई सामाजिक कार्य भी करती है। मंदिर में बेसहारा गौ वंश के लिए एक छोटी की गोशाला भी बनाई गई है। वर्तमान में यहां पर 10 गौवंश रहते हैं।
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दो लाख लोगों के लिए बनेगा भोजन
कश्यप राजपूत पंजाबी समाज सेवा सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनूप भारद्वाज कश्यप ने बताया कि इस वर्ष यह मेला बड़ी धूमधाम से आयोजित किया जाएगा। क्योंकि इस वर्ष समाज की नींव रखे को 100 वर्ष पूरे हुए हैं। यहां पर करीब दो लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था के लिए वीरवार से तैयारियां शुरू कर दी हैं। 250 लोग 100 चूल्हों पर दो लाख लोगों का भोजन तैयार करेंगे। दो दिनों तक मंदिर में अटूट भंडारा वितरित किया जाएगा। प्रत्येक वर्ष इस मेले में हरियाणा पंजाब सहित देश के कोने- कोने से लोग यहां पहुंचते हैं। सबसे ज्यादा करनाल, यमुनानगर और अंबाला से समाज के लोग इस मेले में शामिल होने के लिए आते हैं।
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हर गोत्र का अलग मंदिर
अनूप भारद्वाज ने बताया कि इस मंदिर में पूरे कश्यप समाज के 44 गोत्र के लिए अलग- अलग मंदिर बनाए गए हैं। समाज के लोग इन्हीं 44 गोत्रों में विवाह करते हैं। करीब 100 वर्ष पूर्व समाज के पूर्वजों ने यहां पर स्थान लिया था। मेले के अलावा सोसाइटी द्वारा गरीब कन्याओं के विवाह, लंगर लगाने जैसे कई सामाजिक कार्य भी करती है। मंदिर में बेसहारा गौ वंश के लिए एक छोटी की गोशाला भी बनाई गई है। वर्तमान में यहां पर 10 गौवंश रहते हैं।
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