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नाराज यशोदा वर्करों का हंगामा, मंत्री विज का घेराव
अमर उजाला/ब्यूरो/अंबाला
Updated Thu, 10 Nov 2016 01:27 AM IST
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- फोटो : amar ujala
सरकारी अस्पतालों से हटाई गई यशोदा वर्करों को बुधवार स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मिलने वाले आश्वासन से संतुष्ट न होने पर पहले तो जमकर रोष प्रकट किया। उसके बाद जैसे ही मंत्री अनिल विज जनता दरबार खत्म कर वापिस गाड़ी में बैठकर जाने लगे तो समस्त यशोदा वर्करों ने मंत्री विज की गाड़ी का घेराव कर दिया और जोर-जोर चिल्लाती हुई अपनी मांगों को लेकर विचार विमर्श करने की बात पर अड़ी रही।
उधर, मौजूदा सुरक्षा कर्मचारियों व इलाका पुलिस ने मौके को संभाला और महिलाओं को खदेड़कर मंत्री विज को मौके से रवाना किया। परंतु अचानक दो यशोदा वर्कर मंत्री की सिक्योरिटी में चल रही गाड़ी की चपेट में आकर घायल हो गई। इसके बाद यशोदा वर्कर रेस्ट हाउस के बाहर ही जमा हो गई और मंत्री विज के खिलाफ जमकर रोष प्रकट किया और यशोदा वर्करों को अनदेखा करने के लिए भी आरोप लगाएं।
दरअसल ये यशोदा वर्कर बुधवार को अपनी मांगों को लेकर पहले तो स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज की कोठी पर पहुंच गई थी और उसके बाद सूचना मिलने पर पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाऊस में लगने वाले जनता दरबार में पहुंची थी। जहां मंत्री विज द्वारा उन्हें आशा वर्करों में शामिल होने को कहा और उन्हें वापिस भेज दिया गया। इसके बाद गुस्साई यशोदा वर्करों ने हंगामा कर दिया। उनका कहना है कि उन्हें पांच साल पहले जननी एवं शिशु सुरक्षा के अंतर्गत अस्पतालों में लगाया गया था, जहां जन्मे बच्चों की देखभाल व खानपान का जिम्मा उन्हें सौंपा गया था। लेकिन गत माह सरकार ने उन्हें यशोदा वर्कर से हटवा दिया, जब वह आलाधिकारियों पर पहुंची तो उन्हें आशा वर्करों में शामिल करने का निर्णय लिया। इस निर्णय को लेकर समस्त यशोदा वर्करों ने एतराज भी जताया और इसी मांग को लेकर वह मंत्री विज के पास पहुंची थी।
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इस दौरान सुशीला, रजनी, मीना रानी, ममता, कल्पना, निशा, संगीता, हिना, गुड़िया, कोमल, अंजली, गौरी, पूजा, पुष्पा, राजकिरन, कविता, दर्शना, सविता ने बताया उनकी मांग है कि उनके अनुभव देखकर सरकार कोई फैसला करें और अस्पताल में किसी अन्य पद पर नियुक्त किया जाए। क्योंकि उन्हें अस्पताल के अंदर कार्य करने का अनुभव है। जबकि आशा वर्कर का काम अलग है और उन्हें उसकी जानकारी नहीं है। इसके बाद समस्त यशोदा वर्कर वापिस लौट गई और कहा कि अगर जल्द ही मांगों को विचार विमर्श नहीं किया गया तो धरना प्रदर्शन भी किया जाएगा।
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उधर, मौजूदा सुरक्षा कर्मचारियों व इलाका पुलिस ने मौके को संभाला और महिलाओं को खदेड़कर मंत्री विज को मौके से रवाना किया। परंतु अचानक दो यशोदा वर्कर मंत्री की सिक्योरिटी में चल रही गाड़ी की चपेट में आकर घायल हो गई। इसके बाद यशोदा वर्कर रेस्ट हाउस के बाहर ही जमा हो गई और मंत्री विज के खिलाफ जमकर रोष प्रकट किया और यशोदा वर्करों को अनदेखा करने के लिए भी आरोप लगाएं।
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दरअसल ये यशोदा वर्कर बुधवार को अपनी मांगों को लेकर पहले तो स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज की कोठी पर पहुंच गई थी और उसके बाद सूचना मिलने पर पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाऊस में लगने वाले जनता दरबार में पहुंची थी। जहां मंत्री विज द्वारा उन्हें आशा वर्करों में शामिल होने को कहा और उन्हें वापिस भेज दिया गया। इसके बाद गुस्साई यशोदा वर्करों ने हंगामा कर दिया। उनका कहना है कि उन्हें पांच साल पहले जननी एवं शिशु सुरक्षा के अंतर्गत अस्पतालों में लगाया गया था, जहां जन्मे बच्चों की देखभाल व खानपान का जिम्मा उन्हें सौंपा गया था। लेकिन गत माह सरकार ने उन्हें यशोदा वर्कर से हटवा दिया, जब वह आलाधिकारियों पर पहुंची तो उन्हें आशा वर्करों में शामिल करने का निर्णय लिया। इस निर्णय को लेकर समस्त यशोदा वर्करों ने एतराज भी जताया और इसी मांग को लेकर वह मंत्री विज के पास पहुंची थी।
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इस दौरान सुशीला, रजनी, मीना रानी, ममता, कल्पना, निशा, संगीता, हिना, गुड़िया, कोमल, अंजली, गौरी, पूजा, पुष्पा, राजकिरन, कविता, दर्शना, सविता ने बताया उनकी मांग है कि उनके अनुभव देखकर सरकार कोई फैसला करें और अस्पताल में किसी अन्य पद पर नियुक्त किया जाए। क्योंकि उन्हें अस्पताल के अंदर कार्य करने का अनुभव है। जबकि आशा वर्कर का काम अलग है और उन्हें उसकी जानकारी नहीं है। इसके बाद समस्त यशोदा वर्कर वापिस लौट गई और कहा कि अगर जल्द ही मांगों को विचार विमर्श नहीं किया गया तो धरना प्रदर्शन भी किया जाएगा।