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मालिकाना हक के लिए डीसी कार्यालय तक प्रदर्शन

Tue, 23 Jul 2019 12:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jul 2019 12:42 AM IST
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Agitaton in Ambala
डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते मालिपरेड के निवासी - फोटो : AMBALA
अंबाला सिटी। कैंट के तोपखाना की जमीन के मालिकाना हक के लिए लंबे अर्से से संघर्षरत इलाके के सैकड़ों लोग सोमवार को डीसी कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए आगे अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी। तोपखाना निवासी मालिकाना हक जनसभा के अध्यक्ष शैलेंद्र की अगुआई में डीसी कार्यालय पहुंचे थे। यहां शैलेंद्र ने बताया कि वे करीब पांच माह से जमीन के मालिकाना हक के लिए आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक मामले में कोई सुध नहीं ली। रोष प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि वह कई बार डीसी शरणदीप कौर बराड़ को ज्ञापन सौंप चुके हैं। एक बार आरटीआई लगाकर भी सूचना मांग चुके हैं, लेकिन मामले में अभी तक न तो कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही आरटीआई के तहत तोपखाना क्षेत्र की जमीन के संबंध में कोई सूचना दी गई।
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शाम तक होती रही बैठक
दोपहर करीब साढ़े 12 बजे तोपखाना निवासी डीसी कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने जमकर नारेबाजी की। करीब 2 बजे तक डीसी से मुलाकात नहीं होने पर मामले को लेकर सीटीएम सुशील कुमार से बैठक हुई, जोकि शाम करीब 5 बजे तक चलती रही। बैठक में आश्वासन के बाद लोगों ने प्रदर्शन खत्म कर दिया।
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भारी पुलिस बल रहा मौजूद
मालिकाना हक को लेकर कैंट के तोपखाना से लोगों के आने की सूचना मिलते ही डीसी कार्यालय के बाहर भारी पुलिसबल तैनात रहा। वहीं शांतिपूर्ण प्रदर्शन के चलते पुलिस ने भी राहत की सांस ली।
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यह है मामला
बीते वर्ष केंद्र सरकार की ओर से इलाके की 261 एकड़ जमीन राज्य सरकार को देने की बात चली थी। इसके बदले में प्रदेश सरकार ने रक्षा मंत्रालय को इस जमीन के कलेक्टर रेट के हिसाब से अदायगी करनी थी, लेकिन यह मामला अधर में लटक गया। इसके बाद लोगों में उनका आश्यिाना उजड़ने का भय हो गया। इसको लेकर स्थानीय निवासियों ने जमीन के हक को लेकर डीसी अंबाला को ज्ञापन सौंपा और आरटीआई लगाकर जानकारी मांगी। इस मामले में जानकारी नहीं मिली तो सोमवार को स्थानीय निवासियों ने डीसी कार्यालय आकर जमकर प्रदर्शन किया।

लीज पर थी जमीन
यह 168 एकड़ जमीन तोपखाना परेड में है, जबकि शेष भूमि दुधला मंडी, गुलाब मंडल में है। यह लीज भूमि है, जहां दशकों से बसे लोग खेती कर रहे हैं। यह भूमि ब्रिटिश हुकूमत के समय 1941 में लीज पर दी गई थी। इसके बाद डीईओ अंबाला ने मई 1975 के बाद लीज को एक्सटेंड नहीं किया। लीज एक्सटेंड नहीं होने के बावजूद लोग यहां बसे थे। शैलेंद्र ने बताया कि एरिया में करीब 1500 परिवार बसते हैं, जिसमें करीब 12 हजार लोग रहते हैं।
मालिकाना हक को लेकर तोपखाना निवासी लोग आज आए थे। उन्होंने आरटीआई के तहत कुछ जानकारी मांगी थी, जोकि उनके साथ बैठक कर दे दी गई है।
- सुशील कुमार, सीटीएम, अंबाला।
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