{"_id":"575484d44f1c1bd645109810","slug":"agitation-of-jat","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़कें छोड़ खेत किनारे बैठकर दिया जाटों ने धरना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सड़कें छोड़ खेत किनारे बैठकर दिया जाटों ने धरना
अमर उजाला/ब्यूरो/अंबाला
Updated Mon, 06 Jun 2016 01:30 AM IST
विज्ञापन
जाट प्रदरश्ान के दाौरान माौजूद पुलिस
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आरक्षण की मांग को लेकर नारायणगढ़ इलाके में जाट समुदाय के लोगों ने जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले धरना दिया। सड़क और रेलमार्ग जाम नहीं करने की प्रशासन की हिदायत के कारण जाटों ने नारायणगढ़-हुसैनी रोड पर सड़क से पीछे हटकर खेत किनारे धरना दिया।
पुलिस ने इस आंदोलन के मद्देनजर अप्रिय घटना से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर रखी थी। अतिरिक्त फोर्स नारायणगढ़ में बुलाई जा चुकी थी, जबकि रेलवे स्टेशन से भी जाटों को दूर रखने का जिम्मा जीआरपी को सौंपा जा चुका था। खैर, जाट अंबाला में न तो सड़कों पर आए और न रेलमार्गों पर, लेकिन किसी प्रशासनिक व पुलिस अफसर ने भी उनके धरना स्थल पर जाकर उनका कोई मांग पत्र लेने व उनकी बात सुनने की जहमत नहीं उठाई।
जाटों को उनका हक दे सरकार : जसविंदर
पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार जाट समुदाय के लोगों ने अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले नारायणगढ़-रायपुररानी-चंडीगढ़ स्टेट हाईवे नंबर 1 के नजदीक हुसैनी मौजा में टैंट लगा कर धरना दिया। यह संघर्ष समिति के जिला प्रधान जसविंद्र दनौरा की अगुवाई में शुरू किया गया। धरने पर बैठे जिला प्रधान जसविंद्र दनौरा, पूर्व जिला परिषद मेंबर लाभ सिंह भूखडी, कर्म सिंह, जरनैल सिंह, जगमाल सिंह, सतपाल बतौरा आदि का कहना है कि जाट समुदाय की आर्थिक स्थिति आज बदतर हो चली है। कृषि आज घाटे का सौदा हो चला है, जबकि भूमि की जोत लगातार घटती जा रही है। ऐसे में समुदाय के युवाओं के लिए रोजगार का संकट पैदा होता जा रहा है। धरने पर बैठे लोगों की मांग थी की उन्हें हाल ही में दिया गया आरक्षण बहाल किया जाए। जाटों ने कहा कि उनका धरना शांतिपूर्वक है और लोकतांत्रिक ढंग से हक मांगना सब का अधिकार है। जिला प्रधान जसविंद्र सिंह ने बताया कि उनका धरना प्रतिदिन सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक जारी रहेगा। उनका यह भी कहना था कि समिति के राष्ट्रीय व प्रदेश स्तरीय नेताओं के निर्देशानुसार इसमें फेरबदल किया जा सकता है। धरने की अध्यक्षता समिति के जिलाध्यक्ष जसविंद्र धनौरा ने किया।
विज्ञापन
इन क्षेत्रों पर रही पुलिस की नजर
जिले में धारा 144 लगी थी। साथ ही निर्देश जारी किए गए कि पुलिस की गश्त जारी रहे। इसी लेकर जिले में स्थित सभी सरकारी और निजी संपत्तियों, सरकारी कार्यालयों, स्कूल, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के आवास के 200 मीटर के दायरे में 5 या 5 से अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया गया है। पुलिस दिनभर इन जगहों की गश्त करती रही।
स्टेशन पूरी तरह से सील
जाट आंदोलन को लेकर पुलिस दिनभर जहां अलर्ट रही, वहीं कैंट रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड को पूरी तरह से सील कर दिया गया। स्टेशन पर जीआरपी और आरपीएफ ने चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान स्टेशन पर यात्रियों का सामान चेक किया गया। जीआरपी थाने में एसएचओ ओमपाल ने बैठक ली और कर्मचारियों को सुरक्षा संबंधी दिशा निर्देश दिए। उधर, कैंट के बस स्टैंड पर भी पुलिस ने चेकिंग अभियान चलाया और यात्रियों को सुरक्षा को लेकर आवश्यक निर्देश दिए।
महत्वपूर्ण ठिकानों से दूर रहे जाट
पुलिस के बंदोबस्त पूरी तरह से चाक चौबंद थे। यही कारण था कि जिले के महत्वपूर्ण ठिकानों की ओर जाटों का रुख नहीं रहा। जिले के सिर्फ नारायणगढ़ हलके में ही जाट संघर्ष समिति के बैनर के तले जाटों ने धरना दिया। हालांकि इस पर भी पुलिस की पूरी नजर रही और पुलिस की गश्त दिनभर धरनास्थल के आसपास रही।
जाट आंदोलन के अल्टीमेटम को लेकर चौकसी बरती गई है। नारायणगढ़ में जाटों ने धरना दिया। इस पर पूरी नजर रखी गई। फिलहाल स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। धरना शांतिपूर्ण रहा। अल्टीमेटम को लेकर पुलिस पहले से ही तैयारी कर चुकी है।
- मनीषा चौधरी, डीसीपी ग्रामीण
विज्ञापन
पुलिस ने इस आंदोलन के मद्देनजर अप्रिय घटना से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर रखी थी। अतिरिक्त फोर्स नारायणगढ़ में बुलाई जा चुकी थी, जबकि रेलवे स्टेशन से भी जाटों को दूर रखने का जिम्मा जीआरपी को सौंपा जा चुका था। खैर, जाट अंबाला में न तो सड़कों पर आए और न रेलमार्गों पर, लेकिन किसी प्रशासनिक व पुलिस अफसर ने भी उनके धरना स्थल पर जाकर उनका कोई मांग पत्र लेने व उनकी बात सुनने की जहमत नहीं उठाई।
विज्ञापन
जाटों को उनका हक दे सरकार : जसविंदर
पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार जाट समुदाय के लोगों ने अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले नारायणगढ़-रायपुररानी-चंडीगढ़ स्टेट हाईवे नंबर 1 के नजदीक हुसैनी मौजा में टैंट लगा कर धरना दिया। यह संघर्ष समिति के जिला प्रधान जसविंद्र दनौरा की अगुवाई में शुरू किया गया। धरने पर बैठे जिला प्रधान जसविंद्र दनौरा, पूर्व जिला परिषद मेंबर लाभ सिंह भूखडी, कर्म सिंह, जरनैल सिंह, जगमाल सिंह, सतपाल बतौरा आदि का कहना है कि जाट समुदाय की आर्थिक स्थिति आज बदतर हो चली है। कृषि आज घाटे का सौदा हो चला है, जबकि भूमि की जोत लगातार घटती जा रही है। ऐसे में समुदाय के युवाओं के लिए रोजगार का संकट पैदा होता जा रहा है। धरने पर बैठे लोगों की मांग थी की उन्हें हाल ही में दिया गया आरक्षण बहाल किया जाए। जाटों ने कहा कि उनका धरना शांतिपूर्वक है और लोकतांत्रिक ढंग से हक मांगना सब का अधिकार है। जिला प्रधान जसविंद्र सिंह ने बताया कि उनका धरना प्रतिदिन सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक जारी रहेगा। उनका यह भी कहना था कि समिति के राष्ट्रीय व प्रदेश स्तरीय नेताओं के निर्देशानुसार इसमें फेरबदल किया जा सकता है। धरने की अध्यक्षता समिति के जिलाध्यक्ष जसविंद्र धनौरा ने किया।
विज्ञापन
इन क्षेत्रों पर रही पुलिस की नजर
जिले में धारा 144 लगी थी। साथ ही निर्देश जारी किए गए कि पुलिस की गश्त जारी रहे। इसी लेकर जिले में स्थित सभी सरकारी और निजी संपत्तियों, सरकारी कार्यालयों, स्कूल, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के आवास के 200 मीटर के दायरे में 5 या 5 से अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया गया है। पुलिस दिनभर इन जगहों की गश्त करती रही।
स्टेशन पूरी तरह से सील
जाट आंदोलन को लेकर पुलिस दिनभर जहां अलर्ट रही, वहीं कैंट रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड को पूरी तरह से सील कर दिया गया। स्टेशन पर जीआरपी और आरपीएफ ने चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान स्टेशन पर यात्रियों का सामान चेक किया गया। जीआरपी थाने में एसएचओ ओमपाल ने बैठक ली और कर्मचारियों को सुरक्षा संबंधी दिशा निर्देश दिए। उधर, कैंट के बस स्टैंड पर भी पुलिस ने चेकिंग अभियान चलाया और यात्रियों को सुरक्षा को लेकर आवश्यक निर्देश दिए।
महत्वपूर्ण ठिकानों से दूर रहे जाट
पुलिस के बंदोबस्त पूरी तरह से चाक चौबंद थे। यही कारण था कि जिले के महत्वपूर्ण ठिकानों की ओर जाटों का रुख नहीं रहा। जिले के सिर्फ नारायणगढ़ हलके में ही जाट संघर्ष समिति के बैनर के तले जाटों ने धरना दिया। हालांकि इस पर भी पुलिस की पूरी नजर रही और पुलिस की गश्त दिनभर धरनास्थल के आसपास रही।
जाट आंदोलन के अल्टीमेटम को लेकर चौकसी बरती गई है। नारायणगढ़ में जाटों ने धरना दिया। इस पर पूरी नजर रखी गई। फिलहाल स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। धरना शांतिपूर्ण रहा। अल्टीमेटम को लेकर पुलिस पहले से ही तैयारी कर चुकी है।
- मनीषा चौधरी, डीसीपी ग्रामीण