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Ambala News: अधिवक्ताओं ने पुलिस कर्मियों को दी तीन नए कानूनों की जानकारी
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600... बैठक में भाग लेते पुलिसकर्मी। प्रवक्ता पुलिस
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कुशल अधिवक्ता ओजस ठक्कर और तानिया गोस्वामी ने महिला थाना और थाना साइबर क्राइम के पुलिस कर्मचारियों को तीन नए कानूनों की जानकारी दी।
अधिवक्ताओं न पुलिस कर्मियों को बताया कि तीन नए कानूनों में पहली बार आतंकवाद को परिभाषित किया गया है और इसे दंडनीय अपराध बताया गया है। राजद्रोह की जगह देशद्रोह को अपराध बनाया गया है, जो राष्ट्र की अखंडता, संप्रभुता और एकता के खिलाफ हो। मॉब लिंचिंग के मामले में आजीवन कारावास या मौत की सजा का प्रावधान है। एफआईआर दर्ज करने की समय सीमा तय की गई है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के उपयोग को मान्यता दी गई है और गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग का विकल्प दिया गया है।
जिससे गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। छोटे अपराधों में जल्द निपटारे के लिए समरी ट्रायल का प्रावधान किया गया है। पीड़ित को एफआईआर की प्रति निःशुल्क प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है । मौके पर थाना साइबर क्राइम प्रबंधक निरीक्षक संजय कुमार और महिला थाना प्रबंधक निरीक्षक कनुप्रिया समेत अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। इस दौरान कुछ पुलिस कर्मचारियों ने नए कानूनों के बारे में कुछ प्रश्न किए, जिनका अधिवक्ताओं ने मौके पर ही उत्तर दिया।
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करनाल। कुशल अधिवक्ता ओजस ठक्कर और तानिया गोस्वामी ने महिला थाना और थाना साइबर क्राइम के पुलिस कर्मचारियों को तीन नए कानूनों की जानकारी दी।
अधिवक्ताओं न पुलिस कर्मियों को बताया कि तीन नए कानूनों में पहली बार आतंकवाद को परिभाषित किया गया है और इसे दंडनीय अपराध बताया गया है। राजद्रोह की जगह देशद्रोह को अपराध बनाया गया है, जो राष्ट्र की अखंडता, संप्रभुता और एकता के खिलाफ हो। मॉब लिंचिंग के मामले में आजीवन कारावास या मौत की सजा का प्रावधान है। एफआईआर दर्ज करने की समय सीमा तय की गई है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के उपयोग को मान्यता दी गई है और गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग का विकल्प दिया गया है।
जिससे गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। छोटे अपराधों में जल्द निपटारे के लिए समरी ट्रायल का प्रावधान किया गया है। पीड़ित को एफआईआर की प्रति निःशुल्क प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है । मौके पर थाना साइबर क्राइम प्रबंधक निरीक्षक संजय कुमार और महिला थाना प्रबंधक निरीक्षक कनुप्रिया समेत अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। इस दौरान कुछ पुलिस कर्मचारियों ने नए कानूनों के बारे में कुछ प्रश्न किए, जिनका अधिवक्ताओं ने मौके पर ही उत्तर दिया।
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