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Ambala News: 11 साल की बच्ची के पेट से निकाला छह किलो का ट्यूमर
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अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल में किशोरी के अंडाशय से निकाली गई गांठ दिखाती हुई सर्जन डॉ. रिद्ध
- जीवनदान : नागरिक अस्पताल के सर्जनों ने 4 घंटे चले जटिल ऑपरेशन के बाद हासिल की बड़ी सफलता
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। कैंट नागरिक अस्पताल में सर्जन की टीम ने 11 वर्षीय बच्ची के पेट से 6 किलो का ट्यूमर निकालकर जीवनदान दिया है। यह गांठ किशोरी के अंडाशय से करीब 4 घंटे चले जटिल व संवेदनशील ऑपरेशन के बाद निकाली है। डॉक्टर भी अंडाशय से निकली 5 से 6 किलोग्राम वजनी गांठ को देखकर हैरान थे।
परिजनों के मुताबिक, महज 11 साल की यह बच्ची काफी समय से पेट में असहनीय दर्द और लगातार बढ़ती सूजन से तड़प रही थी। परिजन उसे इलाज के लिए कई बड़े निजी अस्पतालों व डॉक्टरों के पास ले गए लेकिन हर जगह इस गंभीर बीमारी को लेकर अनदेखी की जाती रही। सही समय पर सही इलाज न मिलने के कारण गांठ का आकार बढ़कर लगभग 6 किलो तक पहुंच गया, जिसने बच्ची के पेट के अंदरूनी अंगों और मुख्य रक्त वाहिकाओं को बुरी तरह दबा दिया था, जिससे उसकी जान को सीधा खतरा पैदा हो गया था।
पेट में फैला हुआ था टेराटोमा का जाल
सर्जन डॉ. रिद्धि गर्ग ने बताया कि बच्ची को लेकर परिजन कैंट के नागरिक अस्पताल में उनकी ओपीडी में पहुंचे थे। जांच में पता चला कि यह एक टेराटोमा नामक ट्यूमर नुमा गांठ थी, जो बेहद जटिल मानी जाती है। यह बेहद क्रिटिकल था और सर्जरी के दौरान ब्लीडिंग व एनेस्थीसिया का भारी जोखिम था। लेकिन उनकी टीम ने करीब 4 घंटे तक चले मैराथन ऑपरेशन के बाद बच्ची के अंगों को सुरक्षित रखते हुए इस भारी-भरकम ट्यूमर को शरीर से अलग कर दिया। सफल ऑपरेशन के बाद बच्ची अब पूरी तरह खतरे से बाहर है और उसकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। कैंट नागरिक अस्पताल में सर्जन की टीम ने 11 वर्षीय बच्ची के पेट से 6 किलो का ट्यूमर निकालकर जीवनदान दिया है। यह गांठ किशोरी के अंडाशय से करीब 4 घंटे चले जटिल व संवेदनशील ऑपरेशन के बाद निकाली है। डॉक्टर भी अंडाशय से निकली 5 से 6 किलोग्राम वजनी गांठ को देखकर हैरान थे।
परिजनों के मुताबिक, महज 11 साल की यह बच्ची काफी समय से पेट में असहनीय दर्द और लगातार बढ़ती सूजन से तड़प रही थी। परिजन उसे इलाज के लिए कई बड़े निजी अस्पतालों व डॉक्टरों के पास ले गए लेकिन हर जगह इस गंभीर बीमारी को लेकर अनदेखी की जाती रही। सही समय पर सही इलाज न मिलने के कारण गांठ का आकार बढ़कर लगभग 6 किलो तक पहुंच गया, जिसने बच्ची के पेट के अंदरूनी अंगों और मुख्य रक्त वाहिकाओं को बुरी तरह दबा दिया था, जिससे उसकी जान को सीधा खतरा पैदा हो गया था।
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पेट में फैला हुआ था टेराटोमा का जाल
सर्जन डॉ. रिद्धि गर्ग ने बताया कि बच्ची को लेकर परिजन कैंट के नागरिक अस्पताल में उनकी ओपीडी में पहुंचे थे। जांच में पता चला कि यह एक टेराटोमा नामक ट्यूमर नुमा गांठ थी, जो बेहद जटिल मानी जाती है। यह बेहद क्रिटिकल था और सर्जरी के दौरान ब्लीडिंग व एनेस्थीसिया का भारी जोखिम था। लेकिन उनकी टीम ने करीब 4 घंटे तक चले मैराथन ऑपरेशन के बाद बच्ची के अंगों को सुरक्षित रखते हुए इस भारी-भरकम ट्यूमर को शरीर से अलग कर दिया। सफल ऑपरेशन के बाद बच्ची अब पूरी तरह खतरे से बाहर है और उसकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है।
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