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प्राइवेट स्कूलों की फीस में इजाफा

Ambala Updated Mon, 11 Feb 2013 05:32 AM IST
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अंबाला। निजी स्कूलों ने एक बार फिर से फीस में दस से पंद्रह फीसदी का इजाफा कर दिया है। ऐसे में अभिभावकों के अभी से ही पसीने छूटने लगे हैं। इतना ही नहीं प्राइवेट स्कूलों ने अपनी एडमिशन और एनुअल शुल्क भी बढ़ा दिए हैं। इतना ही नहीं अब अभिभावकों को मासिक और एडमिशन फीस के साथ वार्षिक शुल्क भी देना होगा। मगर शिक्षा विभाग का इन स्कूलों और इन स्कूलों द्वारा वसूली जाने वाली विभिन्न वर्गों की फीसों पर कोई लगाम नहीं है। इसकी जानकारी मिलते ही अभिभावक फीसों को भरने के लिए हिसाब लगाने में जुट गए हैं। उधर, लोगों ने निजी स्कूलों की इस मनमानी का विरोध किया है।
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गौरतलब हो कि निजी स्कूलों में नर्सरी में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विभिन्न स्कूलों में वार्षिक फीस 2500 से लेकर 3000 रुपये है। जबकि इसके अतिरिक्त अभिभावकों को एडमिशन फीस के भी अलग से 5000 से 18000 रुपये जमा करवाने पड़ेंगे। बस, इसी चक्कर में अभिभावकों की टेंशन बढ़ गई है।

मासिक के साथ-साथ एनुअल और एडमिशन फीस लेना उचित नहीं है। सरकारी स्कूलों में स्तरीय पढ़ाई नहीं होने के कारण मजबूरी में बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाना पड़ रहा है। सरकार को इस पर अंकुश लगाना चाहिए।
-चरणजीत कौर, अभिभावक-
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प्राइवेट स्कूलों में आम आदमी का अपने बच्चों को पढ़ाना बहुत मुश्किल हो गया है। प्रतिमाह फीस, एनुअल फीस और एडमिशन फीस के नाम पर प्राइवेट स्कूल ठग रहे हैं। लेकिन अभिभावकों के पास दूसरा विकल्प नहीं है। जिला शिक्षा विभाग बताएं, ऐसे में अभिभावक क्या करें?
-कंचन लांबा, अभिभावक-
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सरकारी स्कूलों की कायाकल्प के सरकार की ओर से काफी बजट आता है। लेकिन सरकार कम से कम ये तो सोचे कि इतने बजट और इतनी ज्यादा तनख्वाह देने वाले टीचर्स का फायदा आम लोगों को कितना मिल रहा है? इतने बजट में तो सरकारी स्कूल इतना बढ़िया स्टैडर्ड बना लें कि लोग प्राइवेट स्कूलों की ओर रूख ही न करें।
-अनिल भाटिया, अभिभावक-
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कोई भी अभिभावक अपनी खुशी से प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को नहीं पढ़ाता। अभिभावक इसलिए इन स्कूलों का रुख करते हैं, क्योंकि सरकारी स्कूलों के हालात बदत्तर है। प्राइवेट स्कूल जो स्टैंडर्ड देते हैं, उसका चार्ज करते हैं, ये विषय तो सरकार के लिए सोचनीय है, आखिर सरकार अपने स्कूलों का स्टैंडर्ड क्यों नहीं बढ़ाती?
-रवि कनौजिया, अभिभावक-

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