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स्पैट में 75 फीसदी अंक हासिल करना होगा मुश्किल
Ambala
Updated Mon, 24 Dec 2012 05:31 AM IST
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अंबाला। स्पैट जांच दे रहे अधिकतर विद्यार्थी बिना तैयारी के दमखम दिखा रहे हैं। राज्य सरकार ने स्पैट हर विद्यार्थी के लिए जरूरी किया गया है। करीब अस्सी प्रतिशत विद्यार्थी बिना तैयारी के ही मैदान में उतर रहे हैं। यही कारण है कि इन खिलाड़ियों के लिए 75 प्रतिशत अंक हासिल करना सपना बनकर रह सकता है। खेल विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बिना तैयारी के स्पैट को क्लीयर करना मुश्किल है।
गौरतलब है कि खेल विभाग ने इस बार हर विद्यार्थी के लिए स्पैट खेलना जरूरी किया है। यह फरमान खिलाड़ियों पर भारी पड़ सकता है।
जिले में करीब डेढ़ हजार राजकीय, निजी, अनुदान प्राप्त स्कूल हैं। लेकिन इनमें से करीब अस्सी प्रतिशत विद्यार्थी ऐसे हैं, जो या तो कभी-कभार ही मैदानों में उतरें हैं या फिर उतरे ही नहीं हैं। यही कारण है कि इन अस्सी प्रतिशत विद्यार्थियों को स्पैट बैटरी टेस्ट का पहला राउंड क्लीयर करना ही मुश्किल भरा साबित हो रहा है। पहले राउंड में 30 मीटर फ्लाइंग स्टार्ट, स्टेंडिंग ब्राड जंप, 6×10 मीटर शटल रन शामिल हैं। इनमें हर आयु वर्ग के लिए अलग-अलग टाइमिंग दी गई है, जिसमें उनको यह खेल पार करना है। इनमें ही खिलाड़ियों को 75 प्रतिशत अंक हासिल करने हैं।
खेल विशेषज्ञों की मानें, तो यह स्पैट टेस्ट तभी क्लीयर हो पाएगा, जब खिलाड़ी नियमित प्रेक्टिस करें और मैदान में आएं। लेकिन अंबाला में, स्कूल स्तर पर, ऐसा नहीं है। क्योंकि अधिकतर विद्यार्थी कम ही खेलों में भाग ले रहे हैं और शौकिया ही मैदानों में उतरते हैं। यही कमी उनकी नाकामी का कारण बनेगी। स्पैट का शेड्यूल इस तरह से तैयार किया गया है कि उन खिलाड़ियों को ही आगे आने का मौका मिलेगा, जो नियमित हैं और अपना प्रदर्शन सुधारने का दम रखते हैं। यही हालात अंबाला के अधिकतर खिलाड़ियों को पीछे धकेल देंगे।
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क्या कहते हैं खेल विशेषज्ञ
अंबाला। इस बारे में खेल विशेषज्ञ महेंद्र कुमार, हेमंत शर्मा का कहना है स्पैट का खाका काफी कड़ा है और खिलाड़ी के लिए मेहनत जरूरी है। इसके लिए जरूरी है कि खिलाड़ी रोजाना मैदान में आए और अपनी परफारमेंस को या तो बरकरार रखे या फिर उसे सुधारे। यह तभी होगा, जब नियमित प्रेक्टिस होगी। स्कूल स्तर पर ही विद्यार्थियों को इसके लिए प्रेरित करना चाहिए और एक पीरियड इसके लिए जरूरी किया जाए।
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गौरतलब है कि खेल विभाग ने इस बार हर विद्यार्थी के लिए स्पैट खेलना जरूरी किया है। यह फरमान खिलाड़ियों पर भारी पड़ सकता है।
जिले में करीब डेढ़ हजार राजकीय, निजी, अनुदान प्राप्त स्कूल हैं। लेकिन इनमें से करीब अस्सी प्रतिशत विद्यार्थी ऐसे हैं, जो या तो कभी-कभार ही मैदानों में उतरें हैं या फिर उतरे ही नहीं हैं। यही कारण है कि इन अस्सी प्रतिशत विद्यार्थियों को स्पैट बैटरी टेस्ट का पहला राउंड क्लीयर करना ही मुश्किल भरा साबित हो रहा है। पहले राउंड में 30 मीटर फ्लाइंग स्टार्ट, स्टेंडिंग ब्राड जंप, 6×10 मीटर शटल रन शामिल हैं। इनमें हर आयु वर्ग के लिए अलग-अलग टाइमिंग दी गई है, जिसमें उनको यह खेल पार करना है। इनमें ही खिलाड़ियों को 75 प्रतिशत अंक हासिल करने हैं।
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खेल विशेषज्ञों की मानें, तो यह स्पैट टेस्ट तभी क्लीयर हो पाएगा, जब खिलाड़ी नियमित प्रेक्टिस करें और मैदान में आएं। लेकिन अंबाला में, स्कूल स्तर पर, ऐसा नहीं है। क्योंकि अधिकतर विद्यार्थी कम ही खेलों में भाग ले रहे हैं और शौकिया ही मैदानों में उतरते हैं। यही कमी उनकी नाकामी का कारण बनेगी। स्पैट का शेड्यूल इस तरह से तैयार किया गया है कि उन खिलाड़ियों को ही आगे आने का मौका मिलेगा, जो नियमित हैं और अपना प्रदर्शन सुधारने का दम रखते हैं। यही हालात अंबाला के अधिकतर खिलाड़ियों को पीछे धकेल देंगे।
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क्या कहते हैं खेल विशेषज्ञ
अंबाला। इस बारे में खेल विशेषज्ञ महेंद्र कुमार, हेमंत शर्मा का कहना है स्पैट का खाका काफी कड़ा है और खिलाड़ी के लिए मेहनत जरूरी है। इसके लिए जरूरी है कि खिलाड़ी रोजाना मैदान में आए और अपनी परफारमेंस को या तो बरकरार रखे या फिर उसे सुधारे। यह तभी होगा, जब नियमित प्रेक्टिस होगी। स्कूल स्तर पर ही विद्यार्थियों को इसके लिए प्रेरित करना चाहिए और एक पीरियड इसके लिए जरूरी किया जाए।