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दुल्हन बनी तुलसी, ठाकुर जी लाए बारात
Ambala
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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अंबाला। कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी पर माता तुलसी और शालिग्राम (ठाकुर) जी का विवाह समारोहों का आयोजन किया। जिले के तमाम मंदिरों में जहां ये विवाह कार्यक्रम उल्लास के साथ संपन्न हुए, वहीं इस अवसर पर मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटी रही।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने अपने दो पक्ष तैयार किए। एक तो तुलसी माता की ओर से जिसे सजा धजाकर दुल्हन बनाया गया और दूसरा पक्ष ठाकुर जी की ओर ओर से। ठाकुर जी पक्ष के श्रद्धालु बाकायदा विवाह के रीति-रिवाज के तहत ठाकुर जी की बारात लेकर मंदिरों में पहुंचे। जहां तुलसी माता को दुल्हन की तरह सजाया गया था। उसके बाद मंदिरों में विधिविधान के साथ विवाह को संपन्न कराया।
छावनी के शिव मंदिर सत्संग भवन ट्रस्ट की ओर से शिव मंदिर हाउसिंग बोर्ड में तुलसी और ठाकुर जी का विवाह धूमधाम से किया। इस अवसर पर ठाकुर जी को दूल्हा बनाकर भक्त मंदिर तक लाए। जबकि इस दौरान कीर्तन और भजन करते हुए श्रद्धालु झूमते हुए चले जा रहे थे। इस दौरान मंदिर की प्रधान मालती शर्मा ने परंपरानुसार कृष्ण जी की लोरियां सुनाई और विवाह की तमाम रस्मों को पूरा करवाया। विधिविधान के तहत तुलसी माता व ठाकुर जी के फेरे करवाए गए। ठाकुर जी की ओर से केके शर्मा ने सारी परंपराएं निभाई। जबकि तुलसी माता के पक्ष से देवेंद्र कपिल ने तमाम परंपराएं निभाई। विवाह के दौरान कृष्ण शर्मा, पुष्पा अग्रवाल, राजिंद्र गुलाटी, नीलम सूरी, प्रेम, उषा गुप्ता आदि श्रद्धालु भी उपस्थित रहे।
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उधर, इसी उपलक्ष्य में नारायणगढ़ के नगरखेड़ा और कालीमाता मंदिर में तुलसी माता ठाकुर जी के साथ विवाह का आयोजन किया। जहां नगरखेड़ा से शहर की महिलाओं ने बैंडबाजों के साथ श्रद्धा और भाव के साथ तुलसी माता की शोभा यात्रा निकाली। महिला कीर्तन मंडली ने कीर्तन का आयोजन किया।
उधर, अंबाला शहर में तुलसी-ठाकुर जी का विवाह श्री शनि देव कमेटी, सेक्टर-8 हाऊसिंग बोर्ड में संपन्न करवाया गया। ठाकुर जी की बारात गेंडामल धर्मशाला से आई थी। बारात का स्वागत पूरे जोर शोर के साथ हुआ और बारातियों की मिलनी भी पूरे रीति-रिवाज से कराई गई तथा रिबन कटाई की रस्म हुई। शादी में दान-दहेज का घरेलू सामान भी दिया गया। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के प्रधान विभिषण शर्मा और अन्य लोग उपस्थित रहे।
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इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने अपने दो पक्ष तैयार किए। एक तो तुलसी माता की ओर से जिसे सजा धजाकर दुल्हन बनाया गया और दूसरा पक्ष ठाकुर जी की ओर ओर से। ठाकुर जी पक्ष के श्रद्धालु बाकायदा विवाह के रीति-रिवाज के तहत ठाकुर जी की बारात लेकर मंदिरों में पहुंचे। जहां तुलसी माता को दुल्हन की तरह सजाया गया था। उसके बाद मंदिरों में विधिविधान के साथ विवाह को संपन्न कराया।
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छावनी के शिव मंदिर सत्संग भवन ट्रस्ट की ओर से शिव मंदिर हाउसिंग बोर्ड में तुलसी और ठाकुर जी का विवाह धूमधाम से किया। इस अवसर पर ठाकुर जी को दूल्हा बनाकर भक्त मंदिर तक लाए। जबकि इस दौरान कीर्तन और भजन करते हुए श्रद्धालु झूमते हुए चले जा रहे थे। इस दौरान मंदिर की प्रधान मालती शर्मा ने परंपरानुसार कृष्ण जी की लोरियां सुनाई और विवाह की तमाम रस्मों को पूरा करवाया। विधिविधान के तहत तुलसी माता व ठाकुर जी के फेरे करवाए गए। ठाकुर जी की ओर से केके शर्मा ने सारी परंपराएं निभाई। जबकि तुलसी माता के पक्ष से देवेंद्र कपिल ने तमाम परंपराएं निभाई। विवाह के दौरान कृष्ण शर्मा, पुष्पा अग्रवाल, राजिंद्र गुलाटी, नीलम सूरी, प्रेम, उषा गुप्ता आदि श्रद्धालु भी उपस्थित रहे।
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उधर, इसी उपलक्ष्य में नारायणगढ़ के नगरखेड़ा और कालीमाता मंदिर में तुलसी माता ठाकुर जी के साथ विवाह का आयोजन किया। जहां नगरखेड़ा से शहर की महिलाओं ने बैंडबाजों के साथ श्रद्धा और भाव के साथ तुलसी माता की शोभा यात्रा निकाली। महिला कीर्तन मंडली ने कीर्तन का आयोजन किया।
उधर, अंबाला शहर में तुलसी-ठाकुर जी का विवाह श्री शनि देव कमेटी, सेक्टर-8 हाऊसिंग बोर्ड में संपन्न करवाया गया। ठाकुर जी की बारात गेंडामल धर्मशाला से आई थी। बारात का स्वागत पूरे जोर शोर के साथ हुआ और बारातियों की मिलनी भी पूरे रीति-रिवाज से कराई गई तथा रिबन कटाई की रस्म हुई। शादी में दान-दहेज का घरेलू सामान भी दिया गया। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के प्रधान विभिषण शर्मा और अन्य लोग उपस्थित रहे।