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महाभारत की आज के दौर में प्रासंगिता पर गोष्ठी आयोजित
Updated Sun, 21 Oct 2018 12:45 AM IST
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महाभारत ऐसा महाकाव्य जिसमें वेदव्यास ने दुनिया को आचार संहिता दी : डॉ. मिश्रा
आर्य गर्ल्स कॉलेज में महाभारत की आज के दौर में प्रासंगिकता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
फोटो नंबर :: 09, 10
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। आर्य गर्ल्स कॉलेज में ‘वर्तमान कालिक विभिन्न द्वंद्वों में महाभारत के विभिन्न आयाम’ का महामंथन विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन संस्कृत विभाग एवं अंग्रेजी विभाग के संयुक्त प्रयास द्वारा हरियाणा संस्कृत अकादमी पंचकूला के सहयोग से किया गया। प्राचार्य अनुपमा आर्या ने मुख्यातिथि एडीजीपी आरसी मिश्रा, अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश उपाध्याय (पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़), मुख्य वक्ता डॉ. राजेश्वर प्रसाद मिश्र (कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र), प्रो. विरेंद्र कुमार विद्यालंकार (पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़), विशिष्ट अतिथि डॉ. हुकुम सिंह (परीक्षा नियंत्रक, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र), डॉ. कामदेव झा (प्रिंसिपल डीएवी) तथा प्रो. आशुतोष (एसडी कॉलेज, अंबाला छावनी) का महाविद्यालय में स्वागत किया और उनसे सभागार को परिचित कराया।
डॉ. आशुतोष ने सभा के सामने महाभारत के संदर्भ में, महाकाव्य की विशेषताएं बताते हुए आधुनिक युग में इसकी प्रासंगिकता पर प्रश्न उठाए तथा इनका उत्तर खोजने की प्रेरणा दी। डॉ. आरसी मिश्रा ने बताया कि महाभारत ऐसा महाकाव्य है जिसमें वेदव्यास ने दुनिया को आचार संहिता दी। ये लोकमंगल हेतु लिखा गया, जिसमें समाज की मनोदशाओं को पात्र रूप में लाया गया। इसमें पुरुषार्थ के माध्यम से आध्यात्मिकता को प्राप्त करने का मार्ग दिखाया गया। प्रो. वीरेंद्र अलंकार ने कहा कि महाभारत का दर्शन पुरुषार्थ है। अर्जुन के मोह और साहित्यिक रचनाओं को अलग मानते हुए कहा कि काव्य में रचनाओं को अलग मानते हुए कहा कि काव्य में रचयिता प्रमुख हैं और रचना इतिहास से भिन्न हो सकती है।
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आर्य गर्ल्स कॉलेज में महाभारत की आज के दौर में प्रासंगिकता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
फोटो नंबर :: 09, 10
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। आर्य गर्ल्स कॉलेज में ‘वर्तमान कालिक विभिन्न द्वंद्वों में महाभारत के विभिन्न आयाम’ का महामंथन विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन संस्कृत विभाग एवं अंग्रेजी विभाग के संयुक्त प्रयास द्वारा हरियाणा संस्कृत अकादमी पंचकूला के सहयोग से किया गया। प्राचार्य अनुपमा आर्या ने मुख्यातिथि एडीजीपी आरसी मिश्रा, अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश उपाध्याय (पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़), मुख्य वक्ता डॉ. राजेश्वर प्रसाद मिश्र (कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र), प्रो. विरेंद्र कुमार विद्यालंकार (पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़), विशिष्ट अतिथि डॉ. हुकुम सिंह (परीक्षा नियंत्रक, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र), डॉ. कामदेव झा (प्रिंसिपल डीएवी) तथा प्रो. आशुतोष (एसडी कॉलेज, अंबाला छावनी) का महाविद्यालय में स्वागत किया और उनसे सभागार को परिचित कराया।
डॉ. आशुतोष ने सभा के सामने महाभारत के संदर्भ में, महाकाव्य की विशेषताएं बताते हुए आधुनिक युग में इसकी प्रासंगिकता पर प्रश्न उठाए तथा इनका उत्तर खोजने की प्रेरणा दी। डॉ. आरसी मिश्रा ने बताया कि महाभारत ऐसा महाकाव्य है जिसमें वेदव्यास ने दुनिया को आचार संहिता दी। ये लोकमंगल हेतु लिखा गया, जिसमें समाज की मनोदशाओं को पात्र रूप में लाया गया। इसमें पुरुषार्थ के माध्यम से आध्यात्मिकता को प्राप्त करने का मार्ग दिखाया गया। प्रो. वीरेंद्र अलंकार ने कहा कि महाभारत का दर्शन पुरुषार्थ है। अर्जुन के मोह और साहित्यिक रचनाओं को अलग मानते हुए कहा कि काव्य में रचनाओं को अलग मानते हुए कहा कि काव्य में रचयिता प्रमुख हैं और रचना इतिहास से भिन्न हो सकती है।
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