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ओल्ड एज होम में लगे आधा दर्जन पेड़ को बचाने के लिए बुजुर्ग ने उठाई आवाज
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ओल्ड एज होम में लगे आधा दर्जन पेड़ों को बचाने के लिए बुजुर्गों ने उठाई आवाज
धर्म सिंह
अंबाला सिटी। एक ओर जहां लोग पेड़ों को काटकर भवन निर्माण कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ शहर के ताऊ देवीलाल ओल्डएज होम के बुजुर्ग में यहां लगे पेड़ों को बचाने की गुहार लगा रहे हैं। ओल्डएज होम परिसर में प्रशासन मंदिर का निर्माण करवा रहा है। इस कारण परिसर में लगे आधा दर्जन पेड़ों को काटने की योजना बनाई जा रही है। इसे लेकर वहां रह रहे प्रकृति प्रेमी बुजुर्ग जगजीत सिंह माही ने अधिकारियों से गुहार लगाई है कि वे मंदिर को ओल्ड ऐज होम परिसर के बाहर जगह में बनाएं, ताकि इन पेड़ों को न काटना पड़े।
अंबाला शहर में स्थित ओल्डएज होम में वर्तमान में 25 बुजुर्ग अपने जीवन के अंतिम दिन काट रहे हैं। इनमें 13 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं। वहां रह रहे बुजुर्ग जगजीत सिंह माही ने कहा कि यहां लगे पेड़ मेरे बेटे समान हैं। गर्मी के मौसम में जब होम पर वृक्षों की छत ही नहीं रहेगी तो पूरा होम बढ़ते तापमान से प्रभावित होगा। इसके चलते वहां पर निवास करने वाले बुजुर्गों का जीवन भी तपेगा। माही ने बताया कि उसने हरियाली को बचाने के लिए न्यायाधीश व डीसी से भी गुहार लगाई थी। डीसी ने करीब एक साल पहले होम में वधावन ब्लॉक के उद्घाटन के दौरान स्वयं फलदार पौधे लगाए थे। ठेकेदार का मानना है कि परिसर में मंदिर बनाने के लिए नक्शा पास हो गया है। अब इसमें कुछ भी आगे-पीछे नहीं हो सकता। माही ने कहा कि सरकारें व प्रशासनिक अधिकारी हरियाली की रक्षा करने की बड़ी डींगे तो हांकते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उसी हरियाली को समाप्त करने मे लगे हैं। होम में आंवला, आडू, आम आदि फलों के साथ नीम, पीपल आदि के औषधि व छायादार पौधे भी लगे हैं। होम के बाहर काफी जगह बची है, जहां मंदिर बनाया जा सकता है।
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हाईवे के नजदीक है ओल्ड ऐज होम
बुजुर्ग ओमप्रकाश आदर्श, कुसुम व मेहता ने बताया कि ओल्ड ऐज होम नेशनल हाईवे-वन के नजदीक होने के कारण यहां पर पेड़-पौधे ज्यादा-से-ज्यादा होने चाहिए। चौबीसों घंटे रोड पर आवाजाही के कारण प्रदूषण फैलता रहता है। ऐसे में पेड़-पौधों के होने से पर्यावरण शुद्ध होने का दावा किया जा सकता है।
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हरियाली की तो हार हाल मेें रक्षा होनी चाहिए। ओल्ड एज होम में बुजुर्गों का अकेलापन दूर करने के लिए प्रकृति की सुंदरता अनिवार्य है। उन्हें सांस लेने के लिए शुद्ध वायु चाहिए जो पेड़-पौधों से ही संभव है। जिला प्रशासन को जो भी निर्माण कार्य करवाना है वह होम से बाहर करवा सकता है। पेड़ तो किसी भी सूरत में कटने नहीं चाहिए।
- प्रोफेसर सुरेश देसवाल, ग्रीन मैन
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हमने ठेकेदार को पेड़ न उखाड़ने के लिए बोल दिया है। वह अपना कार्य कैसे भी करे लेकिन पेड़ न उखाड़े। फलदार और छायादार पौधों की रक्षा होनी जरूरी है।
- विजय लक्ष्मी, सचिव, रेडक्रॉस सोयायटी
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धर्म सिंह
अंबाला सिटी। एक ओर जहां लोग पेड़ों को काटकर भवन निर्माण कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ शहर के ताऊ देवीलाल ओल्डएज होम के बुजुर्ग में यहां लगे पेड़ों को बचाने की गुहार लगा रहे हैं। ओल्डएज होम परिसर में प्रशासन मंदिर का निर्माण करवा रहा है। इस कारण परिसर में लगे आधा दर्जन पेड़ों को काटने की योजना बनाई जा रही है। इसे लेकर वहां रह रहे प्रकृति प्रेमी बुजुर्ग जगजीत सिंह माही ने अधिकारियों से गुहार लगाई है कि वे मंदिर को ओल्ड ऐज होम परिसर के बाहर जगह में बनाएं, ताकि इन पेड़ों को न काटना पड़े।
अंबाला शहर में स्थित ओल्डएज होम में वर्तमान में 25 बुजुर्ग अपने जीवन के अंतिम दिन काट रहे हैं। इनमें 13 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं। वहां रह रहे बुजुर्ग जगजीत सिंह माही ने कहा कि यहां लगे पेड़ मेरे बेटे समान हैं। गर्मी के मौसम में जब होम पर वृक्षों की छत ही नहीं रहेगी तो पूरा होम बढ़ते तापमान से प्रभावित होगा। इसके चलते वहां पर निवास करने वाले बुजुर्गों का जीवन भी तपेगा। माही ने बताया कि उसने हरियाली को बचाने के लिए न्यायाधीश व डीसी से भी गुहार लगाई थी। डीसी ने करीब एक साल पहले होम में वधावन ब्लॉक के उद्घाटन के दौरान स्वयं फलदार पौधे लगाए थे। ठेकेदार का मानना है कि परिसर में मंदिर बनाने के लिए नक्शा पास हो गया है। अब इसमें कुछ भी आगे-पीछे नहीं हो सकता। माही ने कहा कि सरकारें व प्रशासनिक अधिकारी हरियाली की रक्षा करने की बड़ी डींगे तो हांकते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उसी हरियाली को समाप्त करने मे लगे हैं। होम में आंवला, आडू, आम आदि फलों के साथ नीम, पीपल आदि के औषधि व छायादार पौधे भी लगे हैं। होम के बाहर काफी जगह बची है, जहां मंदिर बनाया जा सकता है।
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हाईवे के नजदीक है ओल्ड ऐज होम
बुजुर्ग ओमप्रकाश आदर्श, कुसुम व मेहता ने बताया कि ओल्ड ऐज होम नेशनल हाईवे-वन के नजदीक होने के कारण यहां पर पेड़-पौधे ज्यादा-से-ज्यादा होने चाहिए। चौबीसों घंटे रोड पर आवाजाही के कारण प्रदूषण फैलता रहता है। ऐसे में पेड़-पौधों के होने से पर्यावरण शुद्ध होने का दावा किया जा सकता है।
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हरियाली की तो हार हाल मेें रक्षा होनी चाहिए। ओल्ड एज होम में बुजुर्गों का अकेलापन दूर करने के लिए प्रकृति की सुंदरता अनिवार्य है। उन्हें सांस लेने के लिए शुद्ध वायु चाहिए जो पेड़-पौधों से ही संभव है। जिला प्रशासन को जो भी निर्माण कार्य करवाना है वह होम से बाहर करवा सकता है। पेड़ तो किसी भी सूरत में कटने नहीं चाहिए।
- प्रोफेसर सुरेश देसवाल, ग्रीन मैन
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हमने ठेकेदार को पेड़ न उखाड़ने के लिए बोल दिया है। वह अपना कार्य कैसे भी करे लेकिन पेड़ न उखाड़े। फलदार और छायादार पौधों की रक्षा होनी जरूरी है।
- विजय लक्ष्मी, सचिव, रेडक्रॉस सोयायटी