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अमेरिका में चमका अधोई का नाम, गुरविंदर सिंह रोजा पार्क ट्रेवलाइजर अवार्ड से सम्मानित
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बराड़ा। अंबाला के एक छोटे से गांव अधोई से न्यूयार्क गए गुरविंदर सिंह खालसा ने विश्व में सिख समाज का सिर गर्व से ऊंचा किया है। उन्हें अमेरिका के बफेलो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पगड़ी पहनकर प्लेन पर चढ़ने से रोका गया तो उन्होंने सिख समाज की शान पगड़ी को उतारने से मना करते हुए फ्लाइट पर चढ़ने से ही मना कर दिया। बाद में सिख समाज के लोगों में हस्ताक्षर अभियान चलाया, जिसके चलते उन्हें शुक्रवार को संयुक्त राज्य अमेरिका के इंडियाना राज्य में आयोजित विविधता पुरस्कार डिनर में ‘रोजा पार्क ट्रेवलाइजर अवॉर्ड’ से नवाजा गया। यह पुरस्कार भारतीय अल्पसंख्यक व्यापार पत्रिका (आईएमबीएम) द्वारा आयोजित किया गया।
दरअसल गुरविंदर सिंह को वर्ष 2007 में न्यूयॉर्क के बफेलो नियाग्रा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर टीएसए सिक्योरिटी एजेंसी ने पगड़ी को उतार कर चेकिंग ब्लेट पर रखने को कहा था, लेकिन गुरविंदर सिंह ने इसे पगड़ी का अपमान बताते हुए मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने उस हवाई यात्रा को छोड़ दिया। पगड़ी के मान की खातिर उन्होंने हस्ताक्षर अभियान चलाकर टीएसए की इस नीति को बदलने की मुहिम शुरू की। नीति बदलने के लिए 20 हजार हस्ताक्षर करने थे, लेकिन उन्होंने 67 हजार हस्ताक्षर एकत्रित कर लिए। इसके बाद सिक्योरिटी एजेंसी को नियम में बदलाव करना पड़ा। अब सिखों को एयरपोर्ट पर चेकिंग के दौरान पगड़ी नहीं उतारनी पड़ती है।
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दरअसल गुरविंदर सिंह को वर्ष 2007 में न्यूयॉर्क के बफेलो नियाग्रा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर टीएसए सिक्योरिटी एजेंसी ने पगड़ी को उतार कर चेकिंग ब्लेट पर रखने को कहा था, लेकिन गुरविंदर सिंह ने इसे पगड़ी का अपमान बताते हुए मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने उस हवाई यात्रा को छोड़ दिया। पगड़ी के मान की खातिर उन्होंने हस्ताक्षर अभियान चलाकर टीएसए की इस नीति को बदलने की मुहिम शुरू की। नीति बदलने के लिए 20 हजार हस्ताक्षर करने थे, लेकिन उन्होंने 67 हजार हस्ताक्षर एकत्रित कर लिए। इसके बाद सिक्योरिटी एजेंसी को नियम में बदलाव करना पड़ा। अब सिखों को एयरपोर्ट पर चेकिंग के दौरान पगड़ी नहीं उतारनी पड़ती है।
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