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Ambala News: दो किमी दायरे में 7 ट्रैफिक लाइटों ने रोकी वाहनों की रफ्तार
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अंबाला छावनी के एसडीएम कार्यालय के नजदीक लगी ट्रेफिक लाइटों से हाइवे पर लगा जाम। सवाद
- 200 करोड़ से बना 444-ए हाईवे वाहन चालकों के लिए बना मुसीबत, छावनी बस अड्डे से टांगरी बांध तक रेंगते हैं वाहन
हरिंदर पाल सिंह
अंबाला। 200 करोड़ रुपये की लागत से बना 444-ए हाईवे छावनी क्षेत्र में वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन गया है। महज दो किलोमीटर के दायरे में सात ट्रैफिक लाइटें लगने से राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह चरमरा गया है। वाहन चालक लगातार जाम में फंसने को मजबूर हैं, जिससे उनका कीमती समय बर्बाद हो रहा है।
छावनी बस अड्डे से महेशनगर क्षेत्र के टांगरी बांध तक का यह हाईवे वाहन चालकों के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। इतनी कम दूरी पर बार-बार रुकने से गाड़ियों की लंबी कतारें लग रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग के नियमों के विपरीत इतनी कम दूरी पर सिग्नल लगाए गए हैं। इन सिग्नलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से हादसों में वृद्धि हुई है।
सात में से केवल तीन चौराहों पर ही पुलिस कर्मी तैनात रहते हैं। बाकी ट्रैफिक लाइटें बिना निगरानी के चल रही हैं। पुलिस बल की कमी के कारण वाहन चालकों में निकलने की जल्दबाजी रहती है। इस वजह से कई छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
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समय निर्धारण में चूक
स्थानीय वाहन चालक सुरजीत, क्षितिज, गुरमीत और लक्की ने बताया कि ट्रैफिक लाइटों का समय निर्धारण वैज्ञानिक तरीके से नहीं किया गया है। व्यस्त रास्तों पर ग्रीन सिग्नल का समय बहुत कम रखा गया है। वहीं, कम ट्रैफिक वाले रास्तों पर अधिक समय दिया जा रहा है। इस तकनीकी खामी के कारण मुख्य रास्तों पर अक्सर जाम लग जाता है।
प्रशासन से मांग
दैनिक यात्रियों और स्थानीय दुकानदारों ने प्रशासन से इस मामले पर ध्यान देने की अपील की है। उनका कहना है कि 200 करोड़ रुपये के हाईवे पर भी रेंगते हुए चलना पड़े तो इसका औचित्य क्या है। लोगों ने सिग्नलों की टाइमिंग दुरुस्त करने की मांग की है। यातायात को सुचारु बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही गई है। इससे जनता को रोज के जाम से राहत मिल सकेगी।
टांगरी बांध से लेकर छावनी बस अड्डे तक जितनी भी ट्रैफिक लाइट लगाई गई हैं, वो भीड़ व सुरक्षा के मद्देनजर लगाई गई है ताकि स्थानीय स्तर पर लोगों को असुविधा न हो, रहीं लाइटों के समय की बात तो इसे चेक करवा लिया जाएगा।
- जोगिंद्र सिंह, यातायात प्रभारी, अंबाला पुलिस
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हरिंदर पाल सिंह
अंबाला। 200 करोड़ रुपये की लागत से बना 444-ए हाईवे छावनी क्षेत्र में वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन गया है। महज दो किलोमीटर के दायरे में सात ट्रैफिक लाइटें लगने से राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह चरमरा गया है। वाहन चालक लगातार जाम में फंसने को मजबूर हैं, जिससे उनका कीमती समय बर्बाद हो रहा है।
छावनी बस अड्डे से महेशनगर क्षेत्र के टांगरी बांध तक का यह हाईवे वाहन चालकों के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। इतनी कम दूरी पर बार-बार रुकने से गाड़ियों की लंबी कतारें लग रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग के नियमों के विपरीत इतनी कम दूरी पर सिग्नल लगाए गए हैं। इन सिग्नलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से हादसों में वृद्धि हुई है।
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सात में से केवल तीन चौराहों पर ही पुलिस कर्मी तैनात रहते हैं। बाकी ट्रैफिक लाइटें बिना निगरानी के चल रही हैं। पुलिस बल की कमी के कारण वाहन चालकों में निकलने की जल्दबाजी रहती है। इस वजह से कई छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
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समय निर्धारण में चूक
स्थानीय वाहन चालक सुरजीत, क्षितिज, गुरमीत और लक्की ने बताया कि ट्रैफिक लाइटों का समय निर्धारण वैज्ञानिक तरीके से नहीं किया गया है। व्यस्त रास्तों पर ग्रीन सिग्नल का समय बहुत कम रखा गया है। वहीं, कम ट्रैफिक वाले रास्तों पर अधिक समय दिया जा रहा है। इस तकनीकी खामी के कारण मुख्य रास्तों पर अक्सर जाम लग जाता है।
प्रशासन से मांग
दैनिक यात्रियों और स्थानीय दुकानदारों ने प्रशासन से इस मामले पर ध्यान देने की अपील की है। उनका कहना है कि 200 करोड़ रुपये के हाईवे पर भी रेंगते हुए चलना पड़े तो इसका औचित्य क्या है। लोगों ने सिग्नलों की टाइमिंग दुरुस्त करने की मांग की है। यातायात को सुचारु बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही गई है। इससे जनता को रोज के जाम से राहत मिल सकेगी।
टांगरी बांध से लेकर छावनी बस अड्डे तक जितनी भी ट्रैफिक लाइट लगाई गई हैं, वो भीड़ व सुरक्षा के मद्देनजर लगाई गई है ताकि स्थानीय स्तर पर लोगों को असुविधा न हो, रहीं लाइटों के समय की बात तो इसे चेक करवा लिया जाएगा।
- जोगिंद्र सिंह, यातायात प्रभारी, अंबाला पुलिस

अंबाला छावनी के एसडीएम कार्यालय के नजदीक लगी ट्रेफिक लाइटों से हाइवे पर लगा जाम। सवाद