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सुरक्षित स्कूल सुरक्षित बच्चे विषय पर संगोष्ठी आयोजित
Updated Sat, 18 Nov 2017 01:02 AM IST
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डीएवी में सुरक्षित स्कूल, सुरक्षित बच्चे पर संगोष्ठी
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
डीएवी स्कूल में सुरक्षित स्कूल, सुरक्षित बच्चे विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान प्राध्यापक राजीव धीमान ने कहा कि हरियाणा विद्यालय शिक्षा अधिनियम व शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में शिक्षण संस्थाओं में शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों को सुरक्षित व सुखद वातावरण प्रदान करने के लिए विभिन्न आयामों का विस्तृत वर्णन है, आवश्यकता उनकी सही ढंग से अनुपालन करने की है। असुरक्षित, भययुक्त और तनावपूर्ण वातावरण में बच्चे का सर्वांगीण विकास संभव ही नहीं है। संगोष्ठी में बाल सुरक्षा के लिए की गई आवश्यक तैयारियों की भी समीक्षा की गई। विद्यालय के उप प्रधानाचार्य राजीव गोयल ने बताया कि बदलते समय के साथ शिक्षण संस्थाओं की भूमिका में व्यापक बदलाव आया है। वहीं प्रिंसिपल रमेश बंसल ने कहा कि विद्यालय प्रबंधन से लेकर शिक्षण पद्धति का वैज्ञानिकीकरण हो गया है। पूरी प्रक्रिया का केंद्र बिंदु वह विद्यार्थी है जिसकी रुचि, अभिरुचि और क्षमताओं का सम्मान करते हुए उसे समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी बनाने का दायित्व पूरी शिक्षा व्यवस्था का है। संगोष्ठी में शिक्षकों को बाल-मनोविज्ञान, बाल-अधिकारों विशेषकर पोस्को एक्ट सड़क-सुरक्षा तथा किशोरावस्था में होने वाले विभिन्न विकारों की जानकारी देने की आवश्यकता बारे भी बताया गया। इस मौके पर संयोजक ईशु सेठी, गीता शर्मा आदि मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
डीएवी स्कूल में सुरक्षित स्कूल, सुरक्षित बच्चे विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान प्राध्यापक राजीव धीमान ने कहा कि हरियाणा विद्यालय शिक्षा अधिनियम व शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में शिक्षण संस्थाओं में शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों को सुरक्षित व सुखद वातावरण प्रदान करने के लिए विभिन्न आयामों का विस्तृत वर्णन है, आवश्यकता उनकी सही ढंग से अनुपालन करने की है। असुरक्षित, भययुक्त और तनावपूर्ण वातावरण में बच्चे का सर्वांगीण विकास संभव ही नहीं है। संगोष्ठी में बाल सुरक्षा के लिए की गई आवश्यक तैयारियों की भी समीक्षा की गई। विद्यालय के उप प्रधानाचार्य राजीव गोयल ने बताया कि बदलते समय के साथ शिक्षण संस्थाओं की भूमिका में व्यापक बदलाव आया है। वहीं प्रिंसिपल रमेश बंसल ने कहा कि विद्यालय प्रबंधन से लेकर शिक्षण पद्धति का वैज्ञानिकीकरण हो गया है। पूरी प्रक्रिया का केंद्र बिंदु वह विद्यार्थी है जिसकी रुचि, अभिरुचि और क्षमताओं का सम्मान करते हुए उसे समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी बनाने का दायित्व पूरी शिक्षा व्यवस्था का है। संगोष्ठी में शिक्षकों को बाल-मनोविज्ञान, बाल-अधिकारों विशेषकर पोस्को एक्ट सड़क-सुरक्षा तथा किशोरावस्था में होने वाले विभिन्न विकारों की जानकारी देने की आवश्यकता बारे भी बताया गया। इस मौके पर संयोजक ईशु सेठी, गीता शर्मा आदि मौजूद रहे।