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किसान महापंचायत में मिल गेट पर जड़ा ताला, जब तक पेमेंट नहीं, तब तक नहीं उठेंगे धरने से

Thu, 03 Jan 2019 01:16 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 03 Jan 2019 01:16 AM IST
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किसान महापंचायत में मिल गेट पर जड़ा ताला, जब तक पेमेंट नहीं, तब तक नहीं उठेंगे धरने से
फोटो नंबर : : 33, 34, 35, 36, 37
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शुगर मिल बनौंदी पर 95 करोड़ बकाया, किसानों ने धर्मकांटा बंद कर शुरू किया धरना
बोले- पेमेंट मिलने तक नहीं उठेंगे धरने से, बुधवार को बुलाई महापंचायत में लिया निर्णय
रात में भी देंगे धरना, मिल में ही बिस्तर मंगाए और अस्थायी यूल्हे बनाकर शुरू किया खाना बनाना
एसडीएम और डीएसपी के समझाने पर भी नहीं माने, पूरी पेमेंट मांगी
अमर उजाला ब्यूरो
नारायणगढ़। गन्ना किसानों के शुगर मिल बनौंदी पर करीब 95 करोड़ रुपये बकाया हैं जोकि कई आश्वासनों के बाद भी नहीं मिलने पर बुधवार को किसानों ने भाकियू के नेतृत्व में महापंचायत बुलाई। इस दौरान शुगर मिल में ही धरना शुरू करने का निर्णय लिया। मौके पर मौजूद एसडीएम और डीएसपी ने किसानों को शीघ्र राशि दिलवाने का आश्वासन दिया, लेकिन किसानों ने पूरी पेमेंट मांगी और धर्मकांटा को बंद कर वहीं धरना शुरू कर दिया। किसानों ने सरकार और राज्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि जब तक पेमेंट नहीं मिलेगी वह धरने से नहीं उठेंगे। वहीं शाम होते ही किसानों ने मिल में ही बिस्तर मंगवा लिए और अस्थायी चूल्हे बनाकर खाना बनाना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि वह रात को भी मिल में धरना जारी रखेंगे।
यह है मामला
शुगर मिल बनौंदी के पास किसानों का पिछले पिराई सत्र का लगभग 25 करोड़ रुपये बकाया हैं। यही नहीं पिछले डेढ़ माह से चालू इस पिराई सत्र के भी करीब 70 करोड़ रुपये मिल के पास बकाया हो चले हैं। हैरानी वाली बात यह है कि पिछले भुगतान में से भी किसानों को 16 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से काट लगाई जा रही है। उल्लेखनीय है कि प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में किसानों व शुगर मिल प्रतिनिधिमंडल के बीच कई बार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन हर बार किसानों को मायूसी ही मिली है। इसी कारण से भाकियू ने दो जनवरी को महापंचायत बुलाई थी।
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यह कहते हैं यूनियन पदाधिकारी
भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढू़नी, किसान संघर्ष समिति के प्रदेश सलाहकार रमेश राणा, प्रदेशाध्यक्ष रामपाल चहल, कांग्रेस नेता लाभ सिंह भूखड़ी, भाकियू जिला प्रधान गुलाब सिंह, नैब गुर्जर, हरबिलास रज्जूमाजरा ने कहा कि अपने पैसे लेने के लिए वे पिछले छह माह से संघर्षरत हैं लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन दिए गए। मजबूर होकर वे अप्रैल 2017 में खत्म हुए पिराई सत्र के भुगतान लेने के लिए सड़कों पर उतरे हैं। एक तरफ तो सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है, दूसरी ओर सालों से किसान को अपनी फसल का ही पैसा नहीं मिल रहा। चढू़नी ने कहा कि प्रशासन को 31 दिसंबर तक का समय पिछले वर्ष का भुगतान जारी करने के लिए दिया था, अब तो चीनी मिल के पास पिछले वर्ष के पिराई सत्र के करीब 25 करोड़ के साथ-साथ इस बार के पिराई सत्र का भी 70 करोड़ बकाया हो चुका है। अब वे ये सारा भुगतान लेने के बाद ही मिल को चलने देंगे।
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मौके पर ही होगी उच्चस्तरीय मीटिंग
किसानों को समझाने के लिए अधिकारियों ने काफी प्रयास किए, लेकिन वे नहीं माने। मौके पर मौजूद एसडीएम व डीएसपी ने किसानों को बातचीत का न्योता दिया लेकिन भाकियू नेताओं के मुताबिक जिस किसी को भी किसानों से बात करनी है, वे मौके पर आएं। एक बार तो प्रशासनिक अधिकारियों ने 4 जनवरी को बैठक रखने का प्रस्ताव किसानों को दिया लेकिन वे नहीं माने। बात बनती न देख किसानों ने फैसला किया कि जब तक उच्चस्तरीय मीटिंग मौके पर नहीं होगी, तब तक मिल का कांटा बंद रखा जाएगा।
रात में किसानों ने बनाए अस्थायी चूल्हे
धरना स्थल से किसान हटने के लिए तैयार नहीं हैं और रात में किसानों ने मौके पर ही खाना बनाने के लिए अस्थायी चूल्हे तक तैयार कर लिए। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी सुनवाई और पेमेंट नहीं होती, तब तक वे उठने वाले नहीं हैं। रात में भी किसान धरने से हटने वाले नहीं हैं।
किसानों के नाम पर राजनीति शुरू
अपनी बकाया पेमेंट को लेकर धरने पर बैठे किसानों के मामले को लेकर अब राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। इस मामले को लेकर विपक्ष भाजपा को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। बुधवार को भी किसानों के धरना स्थल पर पूर्व सूचना आयुक्त व कांग्रेस नेता अशोक मेहता, बसपा नेता धर्मवीर ढींढसा पहुंचे और किसानों को समर्थन दिया।
कोट्स
जब तक पेमेंट नहीं मिलती, तब तक धरने पर बैठेंगे। सरकार का नुमाइंदा आकर आश्वासन दे तभी धरने से हटेंगे। हमें पूरी सौ करोड़ रुपये की पेमेंट चाहिए। नियम अनुसार मिल प्रबंधन को गन्ने की पेमेंट देनी चाहिए, जो नहीं दी गई। इसी कारण से अब किसानों को सड़कों पर उतरना पड़ा है।

-गुरनाम सिंह चढूनी, प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू।
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उनकी मिल प्रबंधक से बातचीत हुई है। उनका कहना है कि पिछले पिराई सत्र के 21 और चालू सत्र के करीब 60 करोड़ रुपये किसानों के बकाया हैं। सरकार की तरफ से 11 करोड़ रुपये का चेक कल सेंशन हो जाएगा और बेची गई बिजली के भी नौ करोड़ रुपये मिल जाएंगे। इसके अलावा एक करोड़ रुपये शुगर मिल अपनी तरफ से डालकर किसानों का पिछला कर देंगी।
-अदिति, एसडीएम, नारायणगढ़।
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