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वेतन न मिलने से नाराज डोर-टू-डोर सफाई कर्मचारियों ने दिया सामूहिक इस्तीफा
Updated Sun, 30 Sep 2018 01:09 AM IST
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वेतन न मिलने से नाराज डोर-टू-डोर सफाई कर्मचारियों ने दिया सामूहिक इस्तीफा
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। डोर-टू-डोर सफाई कर्मचारियों को चार महीनों से वेतन नहीं मिला है। वह ठेकेदार व प्रशासन के खिलाफ धरने-प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन जब बात न बनी तो कर्मियों ने शनिवार को सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया। इससे अंबाला में सफाई व्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि ठेकेदार से वे कई बार वेतन की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें वेतन नहीं दिया गया जिस कारण वह आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उनके पास बच्चों की स्कूल फीस तक देने के लिए रुपये नहीं हैं। यहां तक अब उन्हें दुकानदारों ने राशन उधार देना भी बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जब नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर से गुहार लगाई तो उन्होंने यह कहते हुए वापस भेज दिया कि वह ठेकेदार से बात करेंगे, लेकिन कई दिन बाद भी उन्हें वेतन नहीं मिला जिस कारण अब उन्होंने लोगों के घरों से कूड़ा उठाना बंद कर दिया है। ठेकेदार भी अब उनसे बात नहीं करता। उन्होंने कहा कि उन्हें तो यह भी नहीं पता कि ठेकेदार का कार्यालय कहां है और उनका कितना पीएफ कटता है। वह इससे पहले भी अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। डोर-टू-डोर सफाई कर्मचारियों को चार महीनों से वेतन नहीं मिला है। वह ठेकेदार व प्रशासन के खिलाफ धरने-प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन जब बात न बनी तो कर्मियों ने शनिवार को सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया। इससे अंबाला में सफाई व्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि ठेकेदार से वे कई बार वेतन की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें वेतन नहीं दिया गया जिस कारण वह आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उनके पास बच्चों की स्कूल फीस तक देने के लिए रुपये नहीं हैं। यहां तक अब उन्हें दुकानदारों ने राशन उधार देना भी बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जब नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर से गुहार लगाई तो उन्होंने यह कहते हुए वापस भेज दिया कि वह ठेकेदार से बात करेंगे, लेकिन कई दिन बाद भी उन्हें वेतन नहीं मिला जिस कारण अब उन्होंने लोगों के घरों से कूड़ा उठाना बंद कर दिया है। ठेकेदार भी अब उनसे बात नहीं करता। उन्होंने कहा कि उन्हें तो यह भी नहीं पता कि ठेकेदार का कार्यालय कहां है और उनका कितना पीएफ कटता है। वह इससे पहले भी अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं।