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Ambala News: स्कूल और आंगनबाड़ियाें के 43 फीसद बच्चे बीमार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Dec 2024 01:41 AM IST
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43% of children in schools and Anganwadis are ill
सीएमओ कार्यालय अंबाला। संवाद
अंबाला सिटी। जिले के सरकारी स्कूल और आंगनबाड़ियों में जाने वाले करीब 43 फीसद बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें कुपोषण से लेकर एनीमिया जैसी बीमारियां हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रत्येक वर्ष कराए जा रहे सर्वे में ये आंकड़ा सामने आया है।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में इस वर्ष 44 हजार 809 आंगनबाड़ी के बच्चों और 65 हजार 435 सरकारी स्कूलों के बच्चों की जांच हुई थी। इसमें सामने आया कि आंगनबाड़ी के 18 हजार 420 बच्चे और 28 हजार 380 सरकारी स्कूलों के बच्चे ऐसे हैं, जिनमें जन्म से कोई ना कोई बीमारी या कुपोषण की समस्या है।
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चार श्रेणियों में होती है ये जांच
कार्यक्रम के तहत जांच अभियान को चार श्रेणियों में किया जाता है। इसमें जन्मदोष, कमियां, बाल्यावस्था की बीमारियां और विकासात्मक विलंब और अशक्तता शामिल है। इस वर्ष अप्रैल माह से लेकर नवंबर तक हुई जांच में जन्मदोष के 173 बच्चे, बाल्यावस्था की बीमारियाें के 28924 बच्चे, विकासात्मक विलंब के 3912 बच्चे और अशक्तता के 9642 बच्चे सामने आए हैं। इन्हें उपचार के लिए परामर्श दिया जा रहा है।
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जन्मजात हृदय रोग संबंधी करीब 79 बच्चे सामने आए हैं। इसके साथ ही एनिमिया ग्रस्त 1454, विटामिन ए की कमी के 1426, विटामिन डी की कमी के 1515 बच्चे, कुपोषण के 425 बच्चे इसके साथ ही 11337 बच्चों को त्वचा संबंधी बीमारियां मिली है। वहीं 3086 बच्चे ऐसे हैं जिन्हें आंखों संबंधी समस्याएं हैं।
जांच करती हैं 10 टीमें
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला अंबाला में 10 टीमें प्रत्येक वर्ष कार्य कर रही हैं। इन टीमों में कुल 40 कर्मचारी है जो जिले के 762 सरकारी स्कूल और 1213 आंगनबाड़ियों में जाकर बच्चों की जांच करते हैं।
प्रत्येक वर्ष स्कूली बच्चों की एक बार और आंगनबाड़ियों में जाने वाले बच्चों की दो बार जांच होती है। यहां के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इसलिए उनकी दो बार जांच कराई जाती है। जांच के बाद बच्चों को डीआईसी सेंटर में भेजा जाता है। यहां से ह्रदय रोग और पैरों की बीमारी संबंधी उपचार की कार्रवाई शुरू होती है।
23 बच्चों की हृदय संबंधी सर्जरी
इस वर्ष ह्रदय संबंधी बीमारियों के कुल 79 बच्चे सामने आए हैं। इनमें से 23 को सर्जरी के लिए भेजा गया है। अन्य बच्चों में मामूली समस्या थी। इन्हें दवाओं से ठीक किया जा सकता है। वर्ष 2013 से लेकर अब कार्यक्रम के तहत 504 गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों का उपचार करवाया गया है। जिसके लिए विभाग ने पैनल के निजी और सरकारी अस्पतालों को चार करोड़ 57 लाख 98041 रुपए का भुगतान किया है।

वर्जन
कार्यक्रम के तहत स्कूली और आंगनबाड़ी के बच्चों की जांच होती है। कई बार माता-पिता उपचार के लिए मना कर देते हैं। लेकिन अगर समय रहते बच्चे का उपचार करवाया जाए तो आगे चलकर बच्चे को परेशानी नहीं होती। इन दिनों विभाग की ओर से आंगनबाड़ियों में सबसे अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
डॉ. बलजिंद्र कौर, डिप्टी सीएमओ राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, स्वास्थ्य विभाग अंबाला।
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