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मौत के जोहड़
Updated Sun, 19 Aug 2018 12:52 AM IST
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जोहड़ों पर सुरक्षा व्यवस्था जीरो, न चेतावनी बोर्ड, न ही फेंसिंग
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी/मुलाना/शहजादपुर। जिले के ग्रामीण अंचल में स्थित जोहड़ ‘मौत के जोहड़’ साबित होते जा रहे हैं। इसे प्रशासन व पंचायतों की लापरवाही ही कहा जाएगा कि खतरनाक बने इन जोहड़ों में सुरक्षा के कोई ठोस प्रबंध नहीं हैं जबकि इसके लिए पूरा प्रावधान है। सुरक्षा के लिए प्रशासन से लेकर पंचायतों तक को बजट अलॉट किया जाता है, मगर गांवों में जोहड़ों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। यही कारण है कि शुक्रवार को सौंतली गांव के नए बने जोहड़ में एक ही गांव के तीन बच्चे डूबकर मौत के आगोश में समा गए। यदि सतर्कता एवं सावधानियां बरती होतीं तो शायद यह हादसा न होता। मृतक बच्चे के पिता ने भी प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जोहड़ बनाते समय करीब चौदह फुट गहरा गड्ढा छोड़ दिया गया था और इसी गड्ढे में डूबकर उनके घर का चिराग बुझ गया। हालांकि इस घटना के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। डीसी ने आनन-फानन में सुरक्षा को लेकर एसडीएम, डीडीपीओ एवं अन्य अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं, मगर सवाल है कि धरातल पर यह आदेश कितने कारगर होंगे।
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90 प्रतिशत जोहड़ खुले
जिले के गांव में जोहड़ों की हालत इस समय दयनीय है। करीब 90 प्रतिशत जोहड़ों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम नहीं हैं। कुछ जोहड़ गांवों के बिल्कुल साथ स्थित हैं जबकि कुछ दूर हैं। प्रशासन द्वारा जोहड़ों की चहारदीवारी व फेंसिंग कराने का प्रावधान है और इसका जिम्मा गांवों की पंचायतों पर है, मगर पंचायतों द्वारा भी सुरक्षा को लेकर कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई जा रही है।
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चहारदीवारी तो दूर, जोहड़ों में उगी हैं जलकुंभी
मुलाना व बराड़ा के प्रत्येक गांव में जोहड़ हैं। किसी गांव में एक तो किसी में चार से पांच जोहड़ हैं। इनमें सफाई तक नहीं हो रही है। मुलाना, धनौरा, तलहेड़ी व सरकपुर गांव को छोड़ कर अन्य गांवों में पंचायत की ओर से चहारदीवारी नहीं की गई है। जोहड़ों में जलकुंभी उगी हुई हैं जिसमें जहरीले जीव पनप रहे हैं। वहीं, नारायणगढ़ व शहजादपुर में भी यही स्थिति है। पंचायतें अपने स्तर पर बच्चों या ग्रामीणों को जागरूक नहीं करतीं। जोहड़ बारिश के दिनों में और खतरनाक हो जाते हैं और ऐसे में समय में यहां चौकसी की पूरी जरूरत है।
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मृतक के पिता ने लगाए आरोप
गांव सौंतली में मृतक जोहड़ में डूबकर मारे गए छात्र हर्षप्रीत के पिता सुरेंद्र सिंह ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब जोहड़ बन रहा था जब इसमें चौदह फुट का गड्ढा रह गया था। इसे जेसीबी से भरने की कोशिश की गई थी, मगर तब जेसीबी वहां नहीं पहुंच सकी और जल्दबाजी में यह काम छोड़ दिया गया था। उन्होंने बताया कि अब शुक्रवार इसी गड्ढे में बच्चे डूब गए जबकि अन्य स्थानों पर जोहड़ की ज्यादा गहराई नहीं है। जोहड़ मात्र पांच फुट तक हैं, यदि पहले ध्यान दिया होता तो यह घटना नहीं होती।
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चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश
डीसी शरणदीप कौर बराड़ ने अधिकारियों व पंचायतों को सुरक्षा मानकों पर ध्यान देने व उनकी पालना करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि वर्षा के दिनों में तालाब व नदियों में अधिक पानी होने के कारण हादसे हो जाते हैं। इन घटनाओं से बचने के लिए लोग तालाब और नदियों में नहाने इत्यादि के लिए न जाएं क्योंकि पानी का तेज बहाव और गहराई जानलेवा हो सकती है। डीसी ने ग्राम पंचायतों के साथ-साथ स्थानीय निकाय के अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि अपने क्षेत्र में गहरे तालाबों और गांवों व शहर के नजदीक से गुजरने वाली नदियों के किनारे पर चेतावनी बोर्ड लगवाएं कि लोग पानी में प्रवेश न करें। अंबाला जिला शिवालिक की पहाड़ियों से सटा हुआ है और इसके साथ-साथ हिमाचल का भी समीपवर्ती क्षेत्र है। वर्षा के दिनों में नदियों व नालों में पहाड़ों से तेज गति से पानी आता है और तेज बहाव वाले पानी में नहाने और तालाब व नदी के अंदर जाने से अकसर दुर्घटना की संभावना रहती है। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस संबंध में जरूरी सूचना से संबंधित सूचना पट्ट/फ्लेक्स आदि सामग्री नदियों के पास लगवाना सुनिश्चित करें ताकि लोग इस बारे सचेत हो सकें।
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यह हुए पूर्व में हादसे
-कुछ माह पहले गांव गोला व धनौरा गांव में दो बच्चों की जोहड़ में डूब जाने के कारण मौत हो गई थी। गांव के निवासी सुरेश पाल, सतीश कुमार व संतोष ने बताया कि जोहड़ों में सफाई न होने के कारण जलकुंभी खड़ी है।
-इससे पहले बराड़ा के जोहड़ में साहा का एक व्यक्ति डूब गया था। उसे रात के अंधेरे में जोहड़ में जलकुंभी होने के कारण पानी नजर नहीं आया था। उसकी लाश अगले दिन जोहड़ से गोताखोरों की मदद से निकाली गई थी।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी/मुलाना/शहजादपुर। जिले के ग्रामीण अंचल में स्थित जोहड़ ‘मौत के जोहड़’ साबित होते जा रहे हैं। इसे प्रशासन व पंचायतों की लापरवाही ही कहा जाएगा कि खतरनाक बने इन जोहड़ों में सुरक्षा के कोई ठोस प्रबंध नहीं हैं जबकि इसके लिए पूरा प्रावधान है। सुरक्षा के लिए प्रशासन से लेकर पंचायतों तक को बजट अलॉट किया जाता है, मगर गांवों में जोहड़ों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। यही कारण है कि शुक्रवार को सौंतली गांव के नए बने जोहड़ में एक ही गांव के तीन बच्चे डूबकर मौत के आगोश में समा गए। यदि सतर्कता एवं सावधानियां बरती होतीं तो शायद यह हादसा न होता। मृतक बच्चे के पिता ने भी प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जोहड़ बनाते समय करीब चौदह फुट गहरा गड्ढा छोड़ दिया गया था और इसी गड्ढे में डूबकर उनके घर का चिराग बुझ गया। हालांकि इस घटना के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। डीसी ने आनन-फानन में सुरक्षा को लेकर एसडीएम, डीडीपीओ एवं अन्य अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं, मगर सवाल है कि धरातल पर यह आदेश कितने कारगर होंगे।
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90 प्रतिशत जोहड़ खुले
जिले के गांव में जोहड़ों की हालत इस समय दयनीय है। करीब 90 प्रतिशत जोहड़ों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम नहीं हैं। कुछ जोहड़ गांवों के बिल्कुल साथ स्थित हैं जबकि कुछ दूर हैं। प्रशासन द्वारा जोहड़ों की चहारदीवारी व फेंसिंग कराने का प्रावधान है और इसका जिम्मा गांवों की पंचायतों पर है, मगर पंचायतों द्वारा भी सुरक्षा को लेकर कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई जा रही है।
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चहारदीवारी तो दूर, जोहड़ों में उगी हैं जलकुंभी
मुलाना व बराड़ा के प्रत्येक गांव में जोहड़ हैं। किसी गांव में एक तो किसी में चार से पांच जोहड़ हैं। इनमें सफाई तक नहीं हो रही है। मुलाना, धनौरा, तलहेड़ी व सरकपुर गांव को छोड़ कर अन्य गांवों में पंचायत की ओर से चहारदीवारी नहीं की गई है। जोहड़ों में जलकुंभी उगी हुई हैं जिसमें जहरीले जीव पनप रहे हैं। वहीं, नारायणगढ़ व शहजादपुर में भी यही स्थिति है। पंचायतें अपने स्तर पर बच्चों या ग्रामीणों को जागरूक नहीं करतीं। जोहड़ बारिश के दिनों में और खतरनाक हो जाते हैं और ऐसे में समय में यहां चौकसी की पूरी जरूरत है।
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मृतक के पिता ने लगाए आरोप
गांव सौंतली में मृतक जोहड़ में डूबकर मारे गए छात्र हर्षप्रीत के पिता सुरेंद्र सिंह ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब जोहड़ बन रहा था जब इसमें चौदह फुट का गड्ढा रह गया था। इसे जेसीबी से भरने की कोशिश की गई थी, मगर तब जेसीबी वहां नहीं पहुंच सकी और जल्दबाजी में यह काम छोड़ दिया गया था। उन्होंने बताया कि अब शुक्रवार इसी गड्ढे में बच्चे डूब गए जबकि अन्य स्थानों पर जोहड़ की ज्यादा गहराई नहीं है। जोहड़ मात्र पांच फुट तक हैं, यदि पहले ध्यान दिया होता तो यह घटना नहीं होती।
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चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश
डीसी शरणदीप कौर बराड़ ने अधिकारियों व पंचायतों को सुरक्षा मानकों पर ध्यान देने व उनकी पालना करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि वर्षा के दिनों में तालाब व नदियों में अधिक पानी होने के कारण हादसे हो जाते हैं। इन घटनाओं से बचने के लिए लोग तालाब और नदियों में नहाने इत्यादि के लिए न जाएं क्योंकि पानी का तेज बहाव और गहराई जानलेवा हो सकती है। डीसी ने ग्राम पंचायतों के साथ-साथ स्थानीय निकाय के अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि अपने क्षेत्र में गहरे तालाबों और गांवों व शहर के नजदीक से गुजरने वाली नदियों के किनारे पर चेतावनी बोर्ड लगवाएं कि लोग पानी में प्रवेश न करें। अंबाला जिला शिवालिक की पहाड़ियों से सटा हुआ है और इसके साथ-साथ हिमाचल का भी समीपवर्ती क्षेत्र है। वर्षा के दिनों में नदियों व नालों में पहाड़ों से तेज गति से पानी आता है और तेज बहाव वाले पानी में नहाने और तालाब व नदी के अंदर जाने से अकसर दुर्घटना की संभावना रहती है। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस संबंध में जरूरी सूचना से संबंधित सूचना पट्ट/फ्लेक्स आदि सामग्री नदियों के पास लगवाना सुनिश्चित करें ताकि लोग इस बारे सचेत हो सकें।
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यह हुए पूर्व में हादसे
-कुछ माह पहले गांव गोला व धनौरा गांव में दो बच्चों की जोहड़ में डूब जाने के कारण मौत हो गई थी। गांव के निवासी सुरेश पाल, सतीश कुमार व संतोष ने बताया कि जोहड़ों में सफाई न होने के कारण जलकुंभी खड़ी है।
-इससे पहले बराड़ा के जोहड़ में साहा का एक व्यक्ति डूब गया था। उसे रात के अंधेरे में जोहड़ में जलकुंभी होने के कारण पानी नजर नहीं आया था। उसकी लाश अगले दिन जोहड़ से गोताखोरों की मदद से निकाली गई थी।