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-्सीबीएसई के विद्यार्थी हैं अधिकतर, जिनको नहीं मिल रहा एडमिशन
Updated Sat, 05 May 2018 01:12 AM IST
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सीबीएसई से नौवीं और 11वीं पास विद्यार्थियों को नहीं मिल रहा दाखिला
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
नियम 134-ए के तहत कई स्टूडेंट्स ऐसे हैं, जिनका एडमिशन नियमों के फेर में उलझ गया है। ये वे स्टूडेंट्स हैं, जो सीबीएसई से नौवीं और 11वीं के विद्यार्थी हैं। लेकिन सीबीएसई के नियम मुताबिक इन बच्चों की एडमिशन अब तक अटकी हैं। दूसरी ओर जिन बच्चों ने आवेदन करने के दौरान मनमाफिक स्कूल भरे थे, उन्हें भी उनकी पसंद का एडमिशन नहीं मिल पाया, वे भी भटक रहे हैं।
यहा फंस रहा पेच
नियम 134-ए के तहत सीबीएसई के नौवीं और 11वीं के बच्चों ने परीक्षा दी। इन बच्चों ने परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन नियम उनकी एडमिशन में आड़े आ गया है। सीबीएसई का नियम है कि जो विद्यार्थी नौवीं और 11वीं जिस सीबीएसई स्कूल से कर रहा है, उसे दसवीं और 12वीं भी उसी स्कूल से ही पास करनी होगी। ऐसे बच्चे का एडमिशन विशेष परिस्थितियों में दूसरे स्कूल में नहीं हो सकता है। दूसरी ओर शिक्षा नियमावली 134-ए में यह प्रावधान है कि जिस स्कूल का बच्चा इस नियमावली के तहत परीक्षा पास कर रहा है, उसे उस स्कूल में एडमिशन नहीं दिया जा सकता। अकेले सिटी ब्लॉक में ही ऐसे विद्यार्थियों की संख्या करीब 53 है, जो एडमिशन के लिए पेंडिंग हैं। अब इन बच्चों की एडमिशन का क्या होगा अभी पता नहीं है, शिक्षा विभाग भी पसोपेश की स्थिति में है।
दूसरी ओर अभी भी अभिभावक अपने बच्चों को पूरी तरह से एडमिशन नहीं दिला पाए हैं। जिन अभिभावकों ने आवेदन करते समय स्कूल सेलेक्ट करने के ऑप्शन भरे थे, उसके अनुसार एडमिशन नहीं मिल रहे हैं। अब यह अभिभावक शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं। इनका कहना है कि पहले विभाग ने कहा कि जो स्कूल अलॉट है, उनमें एडमिशन करवा ली जाए। लेकिन कई ऐसे अभिभावक हैं जिनके बच्चों को जो स्कूल दिए गए हैं, वह काफी दूर हैं। इसी तरह कई अभिभावकों ने बताया कि निजी स्कूल से फोन आ रहे हैं कि उनके कागजातों की वेरिफिकेशन करवाई जानी हैं, जिसके लिए विजिट किया जाएगा।
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यह कहते हैं लोग
नियम 134-ए को लेकर विभाग पहले से तैयारी नहीं करता। जो बच्चे इसके तहत परीक्षा देना चाहते हैं, उनके अभिभावकों की मीटिंग खंड स्तर पर की जाए और सारे नियम आदि बताए जाएं, तो बेहतर होगा। नियम पूरे न बताने के कारण ही यह समस्या आती है। दूसरी ओर सरकारी कर्मचारियों के बच्चे भी निजी स्कूल में पढ़ते हैं, तो कैसे इन पर ठोस कार्रवाई होगी। - एडवोकेट अजय गुप्ता, प्रधान पेरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन अंबाला
सरकार ने बेशक नियम 134-ए को लागू कर बेहतर कार्य किया है, लेकिन निजी स्कूलों को कैसे इसके लिए तैयार करना है, उस पर काम नहीं किया गया। शिक्षा विभाग, निजी स्कूलों और बच्चों के अभिभावकों के बीच एक गैप सा पड़ गया है। जब यह पूरा नहीं होता, तब तक एडमिशन के लिए अभिभावक तो भटकेंगे। - रविंदर कुमार बख्शी, एडवोकेट अंबाला कैंट
सीबीएसई के नियमों के चक्कर में कई विद्यार्थियों का एडमिशन लटका है। अब इसको लेकर काम कर रहे हैं, जबकि विभाग के उच्चाधिकारियों से भी बात की जाएगी, ताकि इन बच्चों के एडमिशन को फाइनल किया जा सके। - सुधीर कालड़ा, बीईओ अंबाला सिटी
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
नियम 134-ए के तहत कई स्टूडेंट्स ऐसे हैं, जिनका एडमिशन नियमों के फेर में उलझ गया है। ये वे स्टूडेंट्स हैं, जो सीबीएसई से नौवीं और 11वीं के विद्यार्थी हैं। लेकिन सीबीएसई के नियम मुताबिक इन बच्चों की एडमिशन अब तक अटकी हैं। दूसरी ओर जिन बच्चों ने आवेदन करने के दौरान मनमाफिक स्कूल भरे थे, उन्हें भी उनकी पसंद का एडमिशन नहीं मिल पाया, वे भी भटक रहे हैं।
यहा फंस रहा पेच
नियम 134-ए के तहत सीबीएसई के नौवीं और 11वीं के बच्चों ने परीक्षा दी। इन बच्चों ने परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन नियम उनकी एडमिशन में आड़े आ गया है। सीबीएसई का नियम है कि जो विद्यार्थी नौवीं और 11वीं जिस सीबीएसई स्कूल से कर रहा है, उसे दसवीं और 12वीं भी उसी स्कूल से ही पास करनी होगी। ऐसे बच्चे का एडमिशन विशेष परिस्थितियों में दूसरे स्कूल में नहीं हो सकता है। दूसरी ओर शिक्षा नियमावली 134-ए में यह प्रावधान है कि जिस स्कूल का बच्चा इस नियमावली के तहत परीक्षा पास कर रहा है, उसे उस स्कूल में एडमिशन नहीं दिया जा सकता। अकेले सिटी ब्लॉक में ही ऐसे विद्यार्थियों की संख्या करीब 53 है, जो एडमिशन के लिए पेंडिंग हैं। अब इन बच्चों की एडमिशन का क्या होगा अभी पता नहीं है, शिक्षा विभाग भी पसोपेश की स्थिति में है।
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दूसरी ओर अभी भी अभिभावक अपने बच्चों को पूरी तरह से एडमिशन नहीं दिला पाए हैं। जिन अभिभावकों ने आवेदन करते समय स्कूल सेलेक्ट करने के ऑप्शन भरे थे, उसके अनुसार एडमिशन नहीं मिल रहे हैं। अब यह अभिभावक शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं। इनका कहना है कि पहले विभाग ने कहा कि जो स्कूल अलॉट है, उनमें एडमिशन करवा ली जाए। लेकिन कई ऐसे अभिभावक हैं जिनके बच्चों को जो स्कूल दिए गए हैं, वह काफी दूर हैं। इसी तरह कई अभिभावकों ने बताया कि निजी स्कूल से फोन आ रहे हैं कि उनके कागजातों की वेरिफिकेशन करवाई जानी हैं, जिसके लिए विजिट किया जाएगा।
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नियम 134-ए को लेकर विभाग पहले से तैयारी नहीं करता। जो बच्चे इसके तहत परीक्षा देना चाहते हैं, उनके अभिभावकों की मीटिंग खंड स्तर पर की जाए और सारे नियम आदि बताए जाएं, तो बेहतर होगा। नियम पूरे न बताने के कारण ही यह समस्या आती है। दूसरी ओर सरकारी कर्मचारियों के बच्चे भी निजी स्कूल में पढ़ते हैं, तो कैसे इन पर ठोस कार्रवाई होगी। - एडवोकेट अजय गुप्ता, प्रधान पेरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन अंबाला
सरकार ने बेशक नियम 134-ए को लागू कर बेहतर कार्य किया है, लेकिन निजी स्कूलों को कैसे इसके लिए तैयार करना है, उस पर काम नहीं किया गया। शिक्षा विभाग, निजी स्कूलों और बच्चों के अभिभावकों के बीच एक गैप सा पड़ गया है। जब यह पूरा नहीं होता, तब तक एडमिशन के लिए अभिभावक तो भटकेंगे। - रविंदर कुमार बख्शी, एडवोकेट अंबाला कैंट
सीबीएसई के नियमों के चक्कर में कई विद्यार्थियों का एडमिशन लटका है। अब इसको लेकर काम कर रहे हैं, जबकि विभाग के उच्चाधिकारियों से भी बात की जाएगी, ताकि इन बच्चों के एडमिशन को फाइनल किया जा सके। - सुधीर कालड़ा, बीईओ अंबाला सिटी