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जिले में मात्र 22 कर्मचारी लड़ रहे मलेरिया की जंग

Fri, 12 Aug 2016 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला कैंट।
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला कैंट। Updated Fri, 12 Aug 2016 12:01 AM IST
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22-impolise-maliriya
पानी
अंबाला कैंट। अंबाला में मलेरिया से लड़ना स्वास्थ्य विभाग के लिए काफी मुश्किल दिख रहा है। विभाग में 89 पद खाली पड़े हैं, जबकि मात्र 22 कर्मचारी ही पूरे जिले में मलेरिया की जंग लड़ रहे हैं। ऐसे हालातों में लोगों की सेहत पर कितना खतरा मंडरा रहा है, साफ देखा जा सकता है। पिछले काफी समय से ये हालात बने हुए हैं, लेकिन अभी तक कोई रास्ता नहीं निकाला गया है। मजबूरी में विभाग की ओर से ठेके पर कर्मचारी रखने की इजाजत दी जाती है, लेकिन यह भी सीमित समय के लिए है।
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अब है मलेरिया का खतरा
इन दिनों बरसाती सीजन है और इस में मलेरिया सहित अन्य बीमारियों का खतरा है। खासकर मच्छरों से पैदा होने वाली बीमारियों को लेकर विभाग भी सतर्कता बरत रहा है। बारिश के बाद जिन इलाकों में पानी जमा है, वहां आसपास यह खतरा सबसे ज्यादा है। हालांकि निजी चिकित्सकों का कहना है कि अभी से ही मलेरिया, टाइफाइड बुखार के मरीज सामने आने लगे हैं। यह सब बरसाती पानी में पैदा होने वाले मच्छरों आदि के कारण है। ऐसे में लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।
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111 में से 89 पद खाली
स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया विंग में एंटी लारवा स्प्रे करने के लिए कर्मचारियों की संख्या काफी कम है। विभाग की मानें तो 89 पद खाली हैं, जबकि बाइस कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। कईं बार उच्चाधिकारियों से सीमित समय के लिए काम करने हेतु कर्मचारी रखने की इजाजत मिलती है, लेकिन उसमें भी लोगों की रुचि नहीं है। दूसरी ओर जिस तरह से यह स्थिति सामने आ रही है, वह कईं सालों से है। विभाग भी दावा करता है कि जहां तक संभव हो सकता है, काम किया जा रहा है, लेकिन बरसाती सीजन में जितना खतरा है, उसे देखते हुए कर्मचारियों की यह संख्या काफी कम है।
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लाखों की आबादी पर है खतरा
जिला की लाखों की आबादी पर कर्मचारियों की यह कमी भारी पड़ सकती है। मच्छरों का लारवा खत्म करने के लिए कर्मचारी कम हैं, जबकि जिला में 430 गांव हैं। इसके अलावा अरबन एरिया अलग से है। विभाग भी मानता है कि इस बरसाती सीजन में मच्छरों व अन्य कारणों से होने वाली बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है, लेकिन विभाग भी अपनी मजबूरी बताकर पल्ला झाड़ रहा है।
यह कहती है जनता
कैंट के रहने वाले आशीष रस्तोगी, प्रदीप शर्मा, संतोष कुमार खींची, पुरुषोतम शर्मा, मनीष भारद्वाज, रंजीत मलिक, दुष्यंत छाबड़ा, महेंद्र वर्मा, सिटी के रहने वाले दिनेश गुप्ता, महेश कुमार, रॉकी, विकास गुप्ता, इंद्रजीत सिंह, सौरभ शर्मा, युवराज वालिया, जितेंद्र आहूजा का कहना है कि बरसाती सीजन में जहां-तहां पानी जमा रहता है, जिनमें मच्छर पनप रहते हैं। लेकिन हैरानी है कि विभाग लोगों का इलाज करने के लिए तैयारी करता है, लेकिन इस पानी में मच्छर न पनपें इसके लिए कुछ खास तैयारी नहीं रहती। अब कर्मचारी नहीं हैं या फिर कोई अन्य कारण है, लेकिन इसका सीधा असर तो जनता पर पड़ रहा है। सरकार भी ऐसे कारणों को दूर करने का गंभीरता से प्रयास करे।

वर्जन
विभाग के पूरे प्रयास हैं कि एंटी लारवा स्प्रे, फोगिंग आदि करवाई जाए। विभाग के पास कर्मचारियों की कमी है, जबकि उच्चाधिकारियों को कहा गया है। फिर भी जितना स्टाफ है, उसके साथ ही पूरी कोशिश रहती है कि लोग जलजनित अथवा मच्छरों से होने वाली बीमारियों से लोगों को बचाया जा सके। लोगों का भी आह्वान है कि वे आसपास खड़े पानी में मिट्टी का तेल डालें, ताकि मच्छर का लारवा खत्म हो सके और खतरा टले।
- डॉ. विनोद गुप्ता, सीएमओ अंबाला
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