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- कैंट व सिटी तहसील में सक्रिय रहते हैं भ्रष्टाचार
Updated Sun, 25 Mar 2018 12:59 AM IST
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खसरा नंबर के नाम पर ली जा रही मोटी रकम, तहसीलों में सक्रिय दलाल झटपट करा रहे काम
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट/सिटी।
ट्विन सिटी की तहसीलों में भ्रष्टाचार चरम पर हैं। अगर किसी को रजिस्ट्री करानी हो तो यहां भागदौड़ करनी पड़ती है, दस्तावेज अधूरे होने का नाम लेकर टरका दिया जाता है। हां, अगर तहसीलों में सक्रिय दलाल के मार्फत आप काम कराएंगे तो फटाफट हो सकता है। यह हम या आप नहीं बल्कि निगरानी समिति की रिपोर्ट बता रही है।
दरअसल सरकार ने गत दिनों गुपचुप तरीके से सभी जिलों की निगरानी समितियों से तहसील की कार्यप्रणाली को लेकर रिपोर्ट मांगी थी। समितियों ने रिपोर्ट बनाई तो उसमें चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई, जोकि कुछ दिन पहले ही सीधे तौर पर सरकार को सौंप दी गई हैं। इसके बाद अभी तीन दिन पहले ही कैंट उप तहसील से नायब तहसीलदार का तबादला भी हो चुका है।
निगरानी समितियों के पदाधिकारी आरोप लगा रहे हैं कि यहां रजिस्ट्री के नाम पर कभी खसरा नंबर न होने पर मोटी रकम वसूली जाती है तो कभी पिछली रजिस्ट्री को लेकर अड़चन डाल दी जाती है। तहसीलों में कई दलाल सक्रिय है, यदि पैसे दिए जाएं तो झटपट काम हो जाता है। इतना ही नहीं तहसीलों में न तो तहसीलदार, न ही एसडीएम और अन्य अधिकारी समय पर ऑफिस आते हैं। इससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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खसरा नंबर नहीं, यही गड़बड़ी की वजह
कैंट में निगरानी समिति ने जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें खसरा नंबर को लेकर आपत्तियां जताई गई हैं। बताते हैं कि तहसील में कई खसरा नंबर की इस समय रजिस्ट्री नहीं हो रही है और यही से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि अक्सर लोगों की रजिस्ट्री तहसील में इस वजह से नहीं होती क्योंकि खसरा नंबर लिस्ट में नहीं है। यहीं पर दलाल सक्रिय हो जाते हैं और राशि लेकर रजिस्ट्री करा देते हैं। इतना ही नहीं समिति रिपोर्ट में यह भी कहा है कि यदि खसरा नंबर हटा दिए जाएं तो तहसील में भ्रष्टाचार खत्म हो सकता है और सामान्य रेट पर रजिस्ट्री करनी पड़ेगी। इसके अलावा एप्वाइंटमेंट सिस्टम भी गलत बताया गया है। रजिस्ट्री सामान्य एवं रुटीन तौर पर होने को कहा गया है। समिति ने यह भी कहा है कि तहसील में कई दलाल इस समय सक्रिय है जोकि भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।
उपायुक्त के मौखिक आदेशों पर काम कर रहे तहसीलदार
सिटी तहसील से भी जो रिपोर्ट प्रेषित की गई है उसमें कई गड़बड़ी बताई गई हैं। समिति संयोजक द्वारा प्रेषित की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि तहसीलदार केवल उपायुक्त के मौखिक आदेशों पर काम करते हैं जबकि नियमों की अवहेलना करते हैं। यदि पुश्तैनी जायदाद बेचनी हो तो पिछली रजिस्ट्री नहीं होने की सूरत में आनाकानी की जाती है और नई रजिस्ट्री कराने में अड़चन पैदा की जाती है। मगर साल 2014 से पहले ऐसा नहीं था, तब निगम रिकार्ड के मुताबिक रजिस्ट्री हो जाती थी। इस वजह से तहसील में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कारण जनता सिटी तहसील में परेशान हो रही है। साथ ही तहसीलदार और एसडीएम भी समय पर ऑफिस में नहीं होते। रजिस्ट्री कराने के लिए आने वाले लोगों का पूरा दिन इंतजार में बीत जाता है।
समिति द्वारा सरकार को तहसीलों को लेकर भेजी गई रिपोर्ट की कोई जानकारी नहीं है। यदि इस संबंध में कोई भी सुधार के दिशा-निर्देश मिलेंगे तो उनको अमल में लाया जाएगा। -अभिषेक बबियान, जिला राजस्व अधिकारी, अंबाला।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट/सिटी।
ट्विन सिटी की तहसीलों में भ्रष्टाचार चरम पर हैं। अगर किसी को रजिस्ट्री करानी हो तो यहां भागदौड़ करनी पड़ती है, दस्तावेज अधूरे होने का नाम लेकर टरका दिया जाता है। हां, अगर तहसीलों में सक्रिय दलाल के मार्फत आप काम कराएंगे तो फटाफट हो सकता है। यह हम या आप नहीं बल्कि निगरानी समिति की रिपोर्ट बता रही है।
दरअसल सरकार ने गत दिनों गुपचुप तरीके से सभी जिलों की निगरानी समितियों से तहसील की कार्यप्रणाली को लेकर रिपोर्ट मांगी थी। समितियों ने रिपोर्ट बनाई तो उसमें चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई, जोकि कुछ दिन पहले ही सीधे तौर पर सरकार को सौंप दी गई हैं। इसके बाद अभी तीन दिन पहले ही कैंट उप तहसील से नायब तहसीलदार का तबादला भी हो चुका है।
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निगरानी समितियों के पदाधिकारी आरोप लगा रहे हैं कि यहां रजिस्ट्री के नाम पर कभी खसरा नंबर न होने पर मोटी रकम वसूली जाती है तो कभी पिछली रजिस्ट्री को लेकर अड़चन डाल दी जाती है। तहसीलों में कई दलाल सक्रिय है, यदि पैसे दिए जाएं तो झटपट काम हो जाता है। इतना ही नहीं तहसीलों में न तो तहसीलदार, न ही एसडीएम और अन्य अधिकारी समय पर ऑफिस आते हैं। इससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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खसरा नंबर नहीं, यही गड़बड़ी की वजह
कैंट में निगरानी समिति ने जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें खसरा नंबर को लेकर आपत्तियां जताई गई हैं। बताते हैं कि तहसील में कई खसरा नंबर की इस समय रजिस्ट्री नहीं हो रही है और यही से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि अक्सर लोगों की रजिस्ट्री तहसील में इस वजह से नहीं होती क्योंकि खसरा नंबर लिस्ट में नहीं है। यहीं पर दलाल सक्रिय हो जाते हैं और राशि लेकर रजिस्ट्री करा देते हैं। इतना ही नहीं समिति रिपोर्ट में यह भी कहा है कि यदि खसरा नंबर हटा दिए जाएं तो तहसील में भ्रष्टाचार खत्म हो सकता है और सामान्य रेट पर रजिस्ट्री करनी पड़ेगी। इसके अलावा एप्वाइंटमेंट सिस्टम भी गलत बताया गया है। रजिस्ट्री सामान्य एवं रुटीन तौर पर होने को कहा गया है। समिति ने यह भी कहा है कि तहसील में कई दलाल इस समय सक्रिय है जोकि भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।
उपायुक्त के मौखिक आदेशों पर काम कर रहे तहसीलदार
सिटी तहसील से भी जो रिपोर्ट प्रेषित की गई है उसमें कई गड़बड़ी बताई गई हैं। समिति संयोजक द्वारा प्रेषित की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि तहसीलदार केवल उपायुक्त के मौखिक आदेशों पर काम करते हैं जबकि नियमों की अवहेलना करते हैं। यदि पुश्तैनी जायदाद बेचनी हो तो पिछली रजिस्ट्री नहीं होने की सूरत में आनाकानी की जाती है और नई रजिस्ट्री कराने में अड़चन पैदा की जाती है। मगर साल 2014 से पहले ऐसा नहीं था, तब निगम रिकार्ड के मुताबिक रजिस्ट्री हो जाती थी। इस वजह से तहसील में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कारण जनता सिटी तहसील में परेशान हो रही है। साथ ही तहसीलदार और एसडीएम भी समय पर ऑफिस में नहीं होते। रजिस्ट्री कराने के लिए आने वाले लोगों का पूरा दिन इंतजार में बीत जाता है।
समिति द्वारा सरकार को तहसीलों को लेकर भेजी गई रिपोर्ट की कोई जानकारी नहीं है। यदि इस संबंध में कोई भी सुधार के दिशा-निर्देश मिलेंगे तो उनको अमल में लाया जाएगा। -अभिषेक बबियान, जिला राजस्व अधिकारी, अंबाला।