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- जीएसटी को लेकर उलटी गिनती आरंभ -
Updated Mon, 26 Jun 2017 11:47 PM IST
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कारोबारी नहीं सुलझा पा रहे जीएसटी की उलझन
अंबाला कैंट। जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स को लेकर अभी तक भ्रम की स्थिति है। कारोबारी अभी भी इस पसोपेश में हैं कि कारोबार आगे चलकर आसान होगा या फिर और जटिल हो जाएगा।
कारोबारियों का एक वर्ग ऐसा भी है, जो आगे अपने कारोबार को लेकर परेशान है। यह छोटे कारोबारी हैं, जिनका साल भर की टर्नओवर ही दस से बीस लाख रुपये है। यह कारोबारी अब कैसे अपने कामकाज को आगे बढ़ाएं यह समझ से परे है। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे दुकानदार सहित शहरी इलाकों की छोटी इकाइयां शामिल हैं। इनकी मानें, तो बेशक जीएसटी एक जुलाई से लागू किया जा रहा है, लेकिन यह पेचीदगियां काफी समय तक झेलनी पड़ेंगी। एक्सपर्ट भी मानते हैं कि छोटे कारोबारियों के लिए जीएसटी काफी पेचीदगियां लाएगा।
यह आ सकती हैं मुख्य पेचीदगियां
- जीएसटी के लिए दी गई ऑनलाइन साइट ही क्रैश होती रहती है
- जिस कारोबारी का रजिस्ट्रेशन जीएसटी में नहीं हुआ है, उसके लिए कारोबार मुश्किल है
- लोगों में जीएसटी को लेकर पूरी तरह से जागरूकता नहीं है
- जीएसटी के चलते कारोबारियों को कई तरह की कागजी कार्रवाइयों से गुजरना होगा
- छोटे कारोबारियों को अपने अकाउंट के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी
- यदि किसी कारोबारी से सामान खरीदना है और वह जीएसटी में रजिस्टर्ड नहीं है, तो
परचून का काम पिछले करीब पंद्रह सालों से कर रहा हूं। अब जीएसटी शुरू होने जा रहा है। अब समझ नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए? अभी तक तो जीएसटी ही समझ में नहीं आ रहा, रजिस्ट्रेशन कैसे करें? कारोबार को लेकर चिंता है कि जो सालों से चला आ रहा है, कहीं उस पर असर न पड़ जाए?
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- अजय कुमार, अंबाला कैंट
बेशक यह कारोबारियों के लिए, सरकार के अनुसार, फायदे का सौदा हो, लेकिन कई ऐसे छोटे और मध्यम दर्जे के कारोबारी हैं, जिनके लिए जीएसटी काफी पेचीदगियों भरा है। ऐसे हालात में जीएसटी कारोबारियों के लिए परेशानी ही पैदा करेगा। जीएसटी लागू करने से पहले कारोबारियों को जागरूक तो करते, लेकिन सेमीनार के नाम पर भी कुछ नहीं हुआ। अब यही कारण है कि कारोबारियों में असमंजस की स्थिति है।
- अमित कुमार, अंबाला सिटी
जीएसटी को लेकर काफी कुछ हो रहा है, लेकिन मेरा मानना है कि कई पहलू इस में काफी परेशानियां खड़ी करेंगे। यह प्रक्रिया काफी जटिल है और कई कारोबारियों को इसे समझने में दिक्कतें होगी। यही दिक्कतें पहले दूर की जानी चाहिएं थी, जो नहीं की गईं। हो सकता है कि देश के कारोबारी दो हिस्सों में बंट जाए, एक वह जो जीएसटी के तहत है और दूसरा वह जो जीएसटी में रजिस्टर्ड नहीं है।
- दविंदर पाल सिंह लांब, एडवोकेट
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अंबाला कैंट। जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स को लेकर अभी तक भ्रम की स्थिति है। कारोबारी अभी भी इस पसोपेश में हैं कि कारोबार आगे चलकर आसान होगा या फिर और जटिल हो जाएगा।
कारोबारियों का एक वर्ग ऐसा भी है, जो आगे अपने कारोबार को लेकर परेशान है। यह छोटे कारोबारी हैं, जिनका साल भर की टर्नओवर ही दस से बीस लाख रुपये है। यह कारोबारी अब कैसे अपने कामकाज को आगे बढ़ाएं यह समझ से परे है। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे दुकानदार सहित शहरी इलाकों की छोटी इकाइयां शामिल हैं। इनकी मानें, तो बेशक जीएसटी एक जुलाई से लागू किया जा रहा है, लेकिन यह पेचीदगियां काफी समय तक झेलनी पड़ेंगी। एक्सपर्ट भी मानते हैं कि छोटे कारोबारियों के लिए जीएसटी काफी पेचीदगियां लाएगा।
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यह आ सकती हैं मुख्य पेचीदगियां
- जीएसटी के लिए दी गई ऑनलाइन साइट ही क्रैश होती रहती है
- जिस कारोबारी का रजिस्ट्रेशन जीएसटी में नहीं हुआ है, उसके लिए कारोबार मुश्किल है
- लोगों में जीएसटी को लेकर पूरी तरह से जागरूकता नहीं है
- जीएसटी के चलते कारोबारियों को कई तरह की कागजी कार्रवाइयों से गुजरना होगा
- छोटे कारोबारियों को अपने अकाउंट के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी
- यदि किसी कारोबारी से सामान खरीदना है और वह जीएसटी में रजिस्टर्ड नहीं है, तो
परचून का काम पिछले करीब पंद्रह सालों से कर रहा हूं। अब जीएसटी शुरू होने जा रहा है। अब समझ नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए? अभी तक तो जीएसटी ही समझ में नहीं आ रहा, रजिस्ट्रेशन कैसे करें? कारोबार को लेकर चिंता है कि जो सालों से चला आ रहा है, कहीं उस पर असर न पड़ जाए?
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- अजय कुमार, अंबाला कैंट
बेशक यह कारोबारियों के लिए, सरकार के अनुसार, फायदे का सौदा हो, लेकिन कई ऐसे छोटे और मध्यम दर्जे के कारोबारी हैं, जिनके लिए जीएसटी काफी पेचीदगियों भरा है। ऐसे हालात में जीएसटी कारोबारियों के लिए परेशानी ही पैदा करेगा। जीएसटी लागू करने से पहले कारोबारियों को जागरूक तो करते, लेकिन सेमीनार के नाम पर भी कुछ नहीं हुआ। अब यही कारण है कि कारोबारियों में असमंजस की स्थिति है।
- अमित कुमार, अंबाला सिटी
जीएसटी को लेकर काफी कुछ हो रहा है, लेकिन मेरा मानना है कि कई पहलू इस में काफी परेशानियां खड़ी करेंगे। यह प्रक्रिया काफी जटिल है और कई कारोबारियों को इसे समझने में दिक्कतें होगी। यही दिक्कतें पहले दूर की जानी चाहिएं थी, जो नहीं की गईं। हो सकता है कि देश के कारोबारी दो हिस्सों में बंट जाए, एक वह जो जीएसटी के तहत है और दूसरा वह जो जीएसटी में रजिस्टर्ड नहीं है।
- दविंदर पाल सिंह लांब, एडवोकेट