फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   - अकेले तोपखाना परेड निवासियों की 3100 वोट कटी

- अकेले तोपखाना परेड निवासियों की 3100 वोट कटी

Tue, 19 Dec 2017 12:14 AM IST
Updated Tue, 19 Dec 2017 12:14 AM IST
विज्ञापन
- अकेले तोपखाना परेड निवासियों की 3100 वोट कटी
बोर्ड क्षेत्र के हजारों निवासियों की कटी वोट
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र के हजारों निवासियों की वोट कटने से बवाल खड़ा हो गया है। बोर्ड ने कुछ दिनों पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए उन लोगों की वोट काट दी है जिन्होंने बोर्ड से बिना अनुमति मकान निर्मित बीते वर्षों में किए हैं। बोर्ड के इस रुख से हजारों निवासियों पर अब बेघर होने का खतरा भी मंडराने लगा है और वह वोट काटने के मसले को उन्हें बेघर करने का पहला कदम मान रहे हैं। इसी मसले पर सोमवार को तोपखाना परेड के शनि मंदिर में क्षेत्र निवासियों की हंगामे दार बैठक हुई जिसमें विरोध की रूपरेखा तय की गई। लोगों ने कहा कि वह अंग्रेजों के समय से यहां पर बसे हैं और उन्हें यहां पर बसाने के बजाए उजाड़ना सही नहीं है। इस मसले को लेकर क्षेत्रवासी भविष्य में विरोध प्रदर्शन भी कर सकते हैं।
तोपखाना परेड के शनि मंदिर में नवयुवक शक्य समाज की अध्यक्षता में बैठक हुई जिसमें सभा प्रधान संदीप के अलावा संजय, नीरज, मनीष, राहुल, गुलशन, कृष्ण लाल, ईश्वर, अजीत, गणेशी, कपित, सुषमा, कांता, राज दुलारी, सावित्री, संतोश, मुकेश व दर्जनों लोगों ने हिस्सा लिया। लोगों ने कहा कि वह दशकों से यहां पर बसे हैं और उनकी कई पीढ़ियां यहां पर खेतीबाड़ी कर बीत गई है। मगर अब उन्हें बेघर करने का प्रयास किया जा रहा है जोकि सही नहीं है। लोगों ने कहा कि इस मसले का पुरजोर तरीके से विरोध जताया जाएगा, वह मर जाएंगे मगर अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। बैठक के दौरान लोगों ने अगली रणनीति पर विचार किया। उनका कहना था कि सेना व कैंटोनमेंट बोर्ड प्रशासन से उन्हें जमीन पर मकान बनाने की इजाजत देने का आग्रह किया जाएगा। यदि बात नहीं बनती तो आगे विरोध की राह अपनाई जा सकती है। सोमवार को करीब दो घंटे तक मंदिर परिसर में क्षेत्रवासियों की बैठक चली।
विज्ञापन

परेड की 3200 वोट कटी
बता दें कि कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा तोपखाना परेड के अलावा, दुधला मंडी, गुलाब मंडी, रिसाला बाजार, शहजादा मंडी आदि क्षेत्रों की लगभग 5100 वोट काटी गई है जिसमें से सबसे ज्यादा करीब 3200 वोट तोपखाना परेड निवासियों की है।
विज्ञापन
विज्ञापन

केवल बोर्ड चुनावों में नहीं ले सकेंगे हिस्सा
बोर्ड द्वारा जिन लोगों की वोटें काटी गई है वह भविष्य में अब कैंटोनमेंट बोर्ड के चुनावों में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। इसके विपरीत लोक सभा और विधानसभा चुनावों में मतदान करने का अधिकार उनके पास रहेगा। बोर्ड द्वारा कैंटोनमेंट बोर्ड एक्ट के कैंटोनमेंट इलेक्ट्राल रूल के तहत यह वोटें काटी गई है।
अंबाला नहीं, देशभर कैंटोनमेंट बोर्ड में कटी वोट
सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश के पंचमड़ी कैंटोनमेंट बोर्ड के निवासियों का जमीन के मालिकाना हक को लेकर केस चल रहा था। इस मामले में कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय के हक में निर्णय दिया था। इसके तहत अंबाला के साथ-साथ देशभर की 62 कैंटोनमेंट बोर्ड में यह आदेश प्रभावी हुए हैं। अंबाला में तोपखाना परेड क्षेत्र में 1843 में अंग्रेजों ने लोगों को खेतीबाड़ी करने के लिए बसाया था। ऊयहां पर कानपुर, इटावा, मेरठ एवं हरदोई आदि जगहों से किसानों को लाया गया था। करीब 200 एकड़ जमीन पर सेना की जरुरतों के लिए खेतीबाड़ी की जाती थी। तभी से यहां पर सैकड़ों परिवार खेतीबाड़ी कर जीवन यापन कर रहे हैं। हालांकि यह जमीन कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीन है जोकि लीज पर खेती के लिए किसानों को दी गई थी। मगर समय के साथ यहां पर लोगों ने अपने मकान भी बनाए जिसको लेकर अब कैंटोनमेंट बोर्ड को सेना प्रशासन लगातार आपत्ति जता रहा है। उनका कहना कि इस जमीन का प्रयोग केवल खेतीबाड़ी के लिए हो सकता है जबकि यहां पर हुए निर्माण अवैध है। दूसरी ओर यहां पर बसे लोग जमीन का मालिकाना हक वर्षों से मांग रहे हैं।
सूरजभान ने किए थे प्रयास, अब कोई साथ नहीं
तोपखाना परेड निवासियों को यहां जमीन का मालिकाना हक देने के प्रयास स्व. सूरजभान द्वारा करीब दस-बारह वर्ष पहले किए गए थे। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे सूरजभान एससी-बीसी आयोग के चेयरमैन थे। तोपखाना परेड में 80 प्रतिशत तक आबादी एससी-बीसी वर्ग से है। सूरजभान ने रक्षा मंत्रालय से पत्राचार कर यहां निवासियों की मदद के प्रयास किए थे। मगर उनकी मृत्यु के बाद अब लोगों की मदद को कोई नेता आगे नहीं आ रहा है जिस वजह से लोगों में भय का माहौल व्याप्त है।

कोट्स
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर उन लोगों की वोट काटी गई है जिन्होंने बिना कैंटोनमेंट बोर्ड की अनुमति व बिना नक्शा पास करवाए मकान निर्मित किए हैं। सेना द्वारा दशकों पहले यह जमीन सिर्फ खेतीबाड़ी के लिए लीज पर किसानों को दी गई थी, मगर समय बीतने के साथ-साथ लोगों ने निर्माण कर लिए जिनपर आपत्ति है। जिन लोगों की वोट कटी है उन्हें सिर्फ कैंटोनमेंट बोर्ड चुनावों में वोटिंग का अधिकार नहीं होगा।
वरूण कालिया, सीईओ, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed