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- लड़कियां बोली महज दो हजार रुपये दे रहे थे मेहनताना, मारपीट करने का भी लगाया आरोप
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:35 AM IST
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अंबाला सिटी। सिटी हुड ग्राउंड में चल रही अपोलो सर्कस में शनिवार प्रशासन ने छापा मारकर आठ नबालिक लड़कियों को छुड़वाया। बताया जा रहा है कि ज्यादातर लड़कियां असम की रहने वाली है और उन्हें यहां बहुत कम मेहनताने में जबरदस्ती रखा गया था। जैसे प्रशासन की टीम ने छापा मारा तो लड़कियां टीम के समक्ष रोने लगी और सर्कस चलाने वालों के चंगुल से स्वयं को छुड़वाने की गुहार लगाने लगी। फिलहाल लड़कियों का मेडिकल करवाकर उनकी काउंसिलिंग करवाई जाएगी जिसके बाद इस पूरे मामले से पर्दा उठ पाएगा। छापे के दौरान टीम में एसडीएम सतेंद्र सिहाग, जिला बाल संरक्षण अधिकारी मेघा सिंगला, डॉ राजेंद्र राय व अन्य मौजूद रहे।
अपोलो सर्कस में छापे के दौरान असम से लाई गई आठ नाबालिग लड़कियों को टीम ने रेस्क्यू करवाया है। प्रशासन की टीम को जैसे ही लड़कियों ने देखा तो वह रोने लगी थी। टीम ने पूरी सर्कस परिसर को चेक किया और पूछताछ की। बाल संरक्षण अधिकारी मेघा सिंघला ने कहा कि यह मामला मानव तस्करी से भी जुड़ा हो सकता है इसलिए इस मामले में हर पहलू की गहनता से पड़ताल की जाएगी। बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि लड़कियों का मेडिकल होगा ताकि सही स्थिति सामने आ सके। टीम में शामिल डॉक्टर ने बताया कि लड़कियां जब उनसे मिली तो देखते ही लिपट कर रोने लगी थी और यहां से ले जाने की मांग कर रही थी।
दस से 15 हजार में लाया गया था
काउंसिलिंग के दौरान लड़कियों ने बताया कि उन्हें 10 से 15 हजार रुपये में घर से लाया गया था। उन्हें झांसा दिया गया था कि उन्हें सही तरीके से रखा जाएगा और खिलाया व पढ़ाया भी जाएगा। मगर यहां ऐसा कुछ भी नहीं था। उन्हें दो हजार रुपये महीना ही दिया जाता है। गलती करने पर मारापीटा तक जाता है।
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विवादों में सर्कस
अपोलो सर्कस पूरी तरह से विवादों में घिर गई है। इससे पहले सर्कस के खिलाफ पुलिस को भी शिकायत सौंपी गई थी जिसमें जानवरों के गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया था। आरोप था कि जानवरों पर क्रूरुता की जा रही है जिस वजह से उनका जीवन खतरे में पड़ रहा है। इसके अलावा अन्य आरोप भी लगाए गए थे। मामले की जांच पुलिस ने की थी, मगर इसके आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
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अपोलो सर्कस में छापे के दौरान असम से लाई गई आठ नाबालिग लड़कियों को टीम ने रेस्क्यू करवाया है। प्रशासन की टीम को जैसे ही लड़कियों ने देखा तो वह रोने लगी थी। टीम ने पूरी सर्कस परिसर को चेक किया और पूछताछ की। बाल संरक्षण अधिकारी मेघा सिंघला ने कहा कि यह मामला मानव तस्करी से भी जुड़ा हो सकता है इसलिए इस मामले में हर पहलू की गहनता से पड़ताल की जाएगी। बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि लड़कियों का मेडिकल होगा ताकि सही स्थिति सामने आ सके। टीम में शामिल डॉक्टर ने बताया कि लड़कियां जब उनसे मिली तो देखते ही लिपट कर रोने लगी थी और यहां से ले जाने की मांग कर रही थी।
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दस से 15 हजार में लाया गया था
काउंसिलिंग के दौरान लड़कियों ने बताया कि उन्हें 10 से 15 हजार रुपये में घर से लाया गया था। उन्हें झांसा दिया गया था कि उन्हें सही तरीके से रखा जाएगा और खिलाया व पढ़ाया भी जाएगा। मगर यहां ऐसा कुछ भी नहीं था। उन्हें दो हजार रुपये महीना ही दिया जाता है। गलती करने पर मारापीटा तक जाता है।
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विवादों में सर्कस
अपोलो सर्कस पूरी तरह से विवादों में घिर गई है। इससे पहले सर्कस के खिलाफ पुलिस को भी शिकायत सौंपी गई थी जिसमें जानवरों के गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया था। आरोप था कि जानवरों पर क्रूरुता की जा रही है जिस वजह से उनका जीवन खतरे में पड़ रहा है। इसके अलावा अन्य आरोप भी लगाए गए थे। मामले की जांच पुलिस ने की थी, मगर इसके आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।