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खत्म होते दिख रहा हड़ताल का असर

Tue, 30 Oct 2018 12:52 AM IST
Updated Tue, 30 Oct 2018 12:52 AM IST
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खत्म होते दिख रहा हड़ताल का असर
नहीं दिखा हड़ताल का असर, 125 बसें चलीं
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। रोडवेज कर्मियों की हड़ताल के 14वें दिन में इसका असर खत्म होते दिखा। सोमवार को अंबाला डिपो से करीब 125 बसों को रूट पर निकाला गया जिससे यात्रियों को काफी राहत मिली। वहीं यूनियन नेताओं की गिरफ्तारी से कर्मियों में रोष है। कर्मियों की हड़ताल को रोजाना कोई न कोई राजनीतिक दल या विभाग समर्थन देने पहुंच रहा है। कुछ दिन पूर्व स्थिति काफी गंभीर भी रही, लेकिन सोमवार को स्थिति काफी हद तक सामान्य हो चुकी है।
गौरतलब है कि प्राइवेट बसों को किलोमीटर स्कीम के तहत रोडवेज बेड़े में शामिल करने के विरोध में कई दिन से रोडवेज कर्मियों की हड़ताल चल रही है। यह अब तक की सबसे बड़ी हड़ताल मानी जा रही है। रोडवेज की हड़ताल को अन्य विभागों की यूनियनों ने भी समर्थन दिया है। आज बिजली कर्मियों ने भी सभी सब डिवीजनो ंपर धरना देते हुए कामकाज ठप्प रखा। बिजली यूनियन नेताओं ने कहा है कि मंगलवार से रोडवेज की हड़ताल के समर्थन में वे दो दिन की प्रदेशव्यापी हड़ताल करेंगे। इस हड़ताल में जेई कैटेगिरी तक के कर्मचारी भाग लेंगे।
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सरकार अघोषित आपातकाल कर रही लागू : महावीर
तालमेल कमेटी सदस्य व हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन संबंधित सर्व कर्मचारी संघ के डिपो सचिव महावीर पाई ने कहा कि हरियाणा सरकार ने रोडवेज कर्मचारियों के प्रति जो दमनात्मक रवैया अपनाया हुआ है इससे एक बार फिर आपातकाल की काली यादें ताजा हो गई हैं। कर्मचारी नेता पवन सांभली व महावीर पाई द्वारा जारी बयान में कहा गया कि रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल को कर्मचारी संगठनों जन संगठनों ग्राम पंचायतों खाप पंचायतों वह दूसरे राज्यों के कर्मचारी संगठनों से मिल रहे जन समर्थन को देखकर प्रदेश की सरकार बौखला गई है।
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4 दिन और बढ़ी हड़ताल
कर्मचारी नेता महावीर पाई ने बताया कि हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल कमेटी वार्ता के लिए हर समय तैयार है। सरकार के मौजूदा हठधर्मी रवैये को देखते हुए तालमेल कमेटी द्वारा हड़ताल को 4 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। उन्होंने कहा कि रोडवेज कर्मचारियों के समर्थन में 31 अक्टूबर को पूरे प्रदेश का कर्मचारी अपना कामकाज ठप्प कर देंगे।
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करेंगे अनिश्चितकालीन हड़ताल
हरियाणा राजकीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान रामगोपाल ने कहा कि प्रदेश का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के अलावा एजुसेट चौकीदार पार्ट टाइम स्वीपर ग्रामीण चौकीदार ग्रामीण सफाई कर्मचारी आदि कर्मचारी सर्व कर्मचारी संघ के आह्वान पर 30 अक्तूबर से रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के समर्थन में सरकार के खिलाफ लामबंद होंगे यदि सरकार फिर भी अपने इसी पूंजीपतियों के हितों को बढ़ावा देने वाले फैसले पर अड़ी रहती है तो प्रदेश का कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल करने के लिए मजबूर होगा।
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एक को जमानत, तीन को न्यायिक हिरासत
गत दिवस गिरफ्तार किए गए चार कर्मचारी नेता विक्रम राणा, संदीप ढांडा, रमन सैनी व गुलशन को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से गुलशन को जमानत मिल गई, जबकि अन्य तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। कुछ दिन पूर्व कर्मचारी नेता इंद्र सिंह बधाना को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
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कैश हुआ जमा
रोडवेज अधिकारियों ने बताया कि रविवार को अंबाला डिपो के पास 8.51 लाख रुपये कैश जमा हुए थे। वहीं रोडवेज की हड़ताल का असर पटियाला में भी देखने को मिला है। सूत्रों से पता चला है कि गत दिवस पटियाला में हरियाणा रोडवेज के कुछ कर्मचारियों ने पटियाला डिपो में हरियाणा काउंटर पर ताला जड़ दिया। इसकी जानकारी जीएम अंबाला को मिली, तो उन्होंने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अंबाला से कुछ कर्मचारियों को भेजा और उन्हें सख्त हिदायतें दी कि वे किसी दबाव में न आएं।
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10 पुराने व बाकी नये चालक-परिचालक
रोडवेज अधिकारियों ने बताया कि चालक-परिचालकों के हड़ताल पर रहते हुए केवल 10 पुराने चालक-परिचाल ही रूट पर गए, इसके अलावा करीब 115 बसों में नये चालक-परिचालक रूट पर निकले। वहीं उन्होंने बताया कि अभी भी सवारियों को यात्रा के लिए पार्किंग टिकट ही दी जा रही है, जिसकी कार्बन कॉपी परिचालक रोजाना डिपो में जमा करवाता है, ताकि पता चल सके कि दिन में कितनी टिकट काटी गईं।
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मौत को दावत
रोडवेज कर्मियों की हड़ताल हो या न हो, लेकिन अंबाला जिले व अन्य जिलों में अक्सर कुछ शरारती तत्वों को बसों की छत पर बैठकर सफर करते देखा जाता है। वहीं शहर पॉलीटेक्निक चौक पर रोज शाम 5 बजे जैसे ही कोई रोडवेज की बस गुजरती है तो वहां मौजूद छात्र उन बसों के पीछे भागने लगते हैं और उन बसों की छत, दरवाजे व बस के पीछे लटक कर सफर करते हैं। हालांकि जीएम के आदेश से वहां रोडवेज इंस्पेक्टर की ड्यूटी के अलावा ट्रैफिक कर्मी भी ड्यूटी पर मौजूद होते हैं, लेकिन कोई भी इनको नीचे उतारने के लिए नहीं कहता, ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर कोई हादसा हो जाता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। वहीं यह सवाल भी उठता है कि क्या डिपो में बसों की इतनी कमी है कि सवारियों को बसों पर लटक कर सफर करना पड़ रहा है।

कोट्स
छावनी में हड़ताल का व्यापक असर नहीं है। सुबह 10 बजे तक अड्डे से 85 बसें जा चुकी थीं, जिनमें से अंबाला-लुधियाना, अंबाला-जयपुर, अंबाला-अमृतसर, अंबाला-चंडीगढ़, अंबाला-दिल्ली व अन्य मुख्य रूटों पर बसें भेजी गई हैं। वहीं शाम तक करीब 125 बसों को रूट पर भेजा गया था।
-रामरतन शर्मा, बस अड्डा इंचार्ज, अंबाला छावनी।
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