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यमुनानगर-चंडीगढ़ वाया नारायणगढ़ रेल लाईन योजना को मिलेगा बजट

Sat, 02 Feb 2019 01:26 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 02 Feb 2019 01:26 AM IST
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यमुनानगर-चंडीगढ़ वाया नारायणगढ़ रेल लाईन योजना को मिलेगा बजट
यमुनानगर-चंडीगढ़ वाया नारायणगढ़ रेल लाइन योजना को मिलेगा बजट
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-अंतरिम बजट में रखा गया प्रस्ताव, नीति आयोग से चर्चा के बाद मिलेगी अंतिम मंजूरी, अब तक सिर्फ सड़क मार्ग से ही करते हैं आवागमन
91 किलोमीटर लंबी चंडीगढ़-यमुनानगर वाया नारायणगढ़ रेल लाइन
876 करोड़ रुपये की परियोजना, केंद्र व राज्य सरकार दोनों राशि प्रदान देंगी
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। शुक्रवार को प्रस्तुत किए गए बजट में यमुनानगर-चंडीगढ़ वाया नारायणगढ़ रेल लाइन योजना को बजट अलॉट करने का प्रावधान किया गया है। मगर, नीति आयोग से मंजूरी के बाद ही योजना को अंतिम मंजूरी मिलेगी। फिलहाल रेलवे की यह परियोजना एक दशक पुरानी है जिस पर अभी फंड ही जारी नहीं हो सका है। अब इस वर्ष बजट अलॉट करने से उम्मीदें जगी हैं।
बजट में मूल राशि पर अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया है। यदि रेल लाइन के लिए राशि जारी होती है तो यह अंबाला संसदीय क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी। दूसरी ओर सांसद कटारिया ने कहा कि अभी इस योजना पर नीति आयोग से मंजूरी मिलने पर ही कार्य आगे बढ़ाया जा सकता है। बजट में 91 किलोमीटर लंबे चंडीगढ़-यमुनानगर वाया नारायणगढ़ रेल लाइन पर अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया है। 876 करोड़ रुपये की इस परियोजना पर केंद्र व राज्य सरकार दोनों द्वारा राशि प्रदान की जानी है। बीते कई वर्षों से रेल लिंक की यह परियोजना फाइलों में दफन थी। मूल राशि पर अब अतिरिक्त राशि का इस बजट में प्रावधान होने पर रेल लाइन बिछने की आस फिर से जगी है।
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दस वर्ष पहले बनी थी योजना
चंडीगढ़-यमुनानगर वाया नारायणगढ़ रेल लाइन बिछाने की योजना यूपीए-2 सरकार के समय 2009 में बनी थी। तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने नई लाइन बिछाने की घोषणा की थी। मगर यह घोषणा मात्र घोषणा बनकर ही रह गई। लाइन बिछाने के लिए सर्वे हुआ और इसकी अनुमानित कीमत भी आंकी गई, पर इसके आगे कार्य नहीं बढ़ सका। रेल मंत्री ममता बनर्जी के बाद रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी, पवन बंसल तक इस परियोजना को लेकर घोषण कर चुके हैं। मगर कार्य आगे नहीं बढ़ सका है।
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जमीन का अड़ंगा
रेल लाइन बिछाने के लिए राज्य सरकार को जमीन रेल मंत्रालय को देनी है जिसपर अभी कोई सहमति नहीं बनी है। यही वजह है कि रेल परियोजना लगातार लटकती जा रही है। बता दें कि क्षेत्र में रेलवे लाइन की मांग दशकों पुरानी है और लगभग चार दशक पहले लगभग सवा सौ किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन का सर्वे भी हो चुका था। नारायणगढ़ क्षेत्र के लोगों के लिए केवल सड़क परिवहन ही आने-जाने का प्रमुख साधन है।

नीति आयोग से चर्चा के बाद फाइनल होगा : कटारिया
सांसद रतन लाल कटारिया ने कहा कि जमीन को लेकर अभी कुछ बातचीत चल रही है और राज्य सरकार व नीति आयोग के बीच बैठक के बाद ही रेल लाइन को लेकर कुछ फाइनल होगा। रेल लाइन बिछाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
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