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मानसून की बेरुखी से किसान परेशान, बरसात का इंतजार
Updated Mon, 16 Jul 2018 01:10 AM IST
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मानसून दे रहा दोखा, धान को लेकर किसानों की बढ़ी चिंता
अमर उजाला ब्यूरो
बराड़ा। मानसून की बेरुखी के कारण धान उत्पादक किसान परेशान हैं। खासकर मझोले किसानों के लिए समस्या खड़ी होती दिख रही है। रोपाई के बाद सिंचाई जरूरी है, लेकिन जिस तरह से बारिश की उम्मीद है, वह नहीं हो पाई है।
बराड़ा इलाके में धान रोपाई के बाद किसानों को उम्मीद थी कि इस बार मानसून साथ देगा। दूसरी ओर मौसम विभाग ने भी दावा किया था कि मानसून सामान्य रहेगा, लेकिन इस समय बारिश न होने के कारण किसानों की दिक्कतें बढ़ रही हैं। सबसे ज्यादा असर मझोले किसानों पर पड़ रहा है। दिन में बादल तो छा रहते हैं, लेकिन यह सिर्फ बारिश की आस दिखाकर चले जाते हैं। किसान बारिश के इंतजार में हैं, जबकि खेतों में खड़े धान के पौधे पानी के बिना सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं।
यह कहते हैं किसान
किसान धर्मेंद्र रूकड़ी, मोहन लाल, भगवान सिंह, संजीव मेहता, दयाराम, सुभाष का कहना है कि पहले मौसम विभाग ने 28 जून से 1 जुलाई तक अलर्ट जारी किया, उसके बाद 1 से 3 जुलाई तक, और उसके बाद 12 व 13 जुलाई को भी बरसात के आसार बताए गए थे, लेकिन ये दावे महज दावे ही रह गए। उनका कहना है कि ट्यूबवेल के सहारे धान को बचाने की कोशिश जरूर की जा रही है लेकिन बारिश के बिना ट्यूबवेल भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। इससे फसल को नुकसान नुकसान होगा। यदि अच्छी बारिश नहीं हुई तो खेतों में पानी रुकना नामुमकिन हो जाता है। पौधों की वृद्धि व और विकास रुक जाता है। ऐसे खेतों में खरपतवार बढ़ने लगते हैं। फिर उनकों निकालने पर लेबर खर्च भी बढ़ जाता है। रोपाई के तुरंत बाद किसान खरपतवार को खत्म करने के लिए खेतों में महंगी दवा डालते हैं। ट्यूबवेल की बिजली के लिए आठ घंटे का शेडयूल बनाया हुआ है, जोकि बरसात के न होने के कारण बहुत कम है। धान के खेत सूखने से दरारें पड़ने लगी हैं। जब तक बारिश नहीं होती तब तक बची हुई रोपाई करने में समस्या ही रहेगी। डीजल इतना महंगा है कि किसान जनरेटर चलाकर धान की फसल तैयार करेंगे जो फायदे के बजाय घाटे का सौदा होगा करने की बजाय घाटा । उन किसानों को चिंता ज्यादा सता रही है जिन्होंने कर्जा लेकर धान की रोपाई की है। सही मायने में बिना बरसात खेती को आघात वाली बात हो रही है।
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इस माह 106 एमएम बारिश
जिले में जुलाई में मात्र 106 एमएम बारिश रिकार्ड की गई है। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई के दौरान अंबाला में 1 जुलाई को 20 एमएम, 11 जुलाई को 85 एमएम तथा 13 जुलाई को 1 एमएम बारिश हुई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
बराड़ा। मानसून की बेरुखी के कारण धान उत्पादक किसान परेशान हैं। खासकर मझोले किसानों के लिए समस्या खड़ी होती दिख रही है। रोपाई के बाद सिंचाई जरूरी है, लेकिन जिस तरह से बारिश की उम्मीद है, वह नहीं हो पाई है।
बराड़ा इलाके में धान रोपाई के बाद किसानों को उम्मीद थी कि इस बार मानसून साथ देगा। दूसरी ओर मौसम विभाग ने भी दावा किया था कि मानसून सामान्य रहेगा, लेकिन इस समय बारिश न होने के कारण किसानों की दिक्कतें बढ़ रही हैं। सबसे ज्यादा असर मझोले किसानों पर पड़ रहा है। दिन में बादल तो छा रहते हैं, लेकिन यह सिर्फ बारिश की आस दिखाकर चले जाते हैं। किसान बारिश के इंतजार में हैं, जबकि खेतों में खड़े धान के पौधे पानी के बिना सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं।
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यह कहते हैं किसान
किसान धर्मेंद्र रूकड़ी, मोहन लाल, भगवान सिंह, संजीव मेहता, दयाराम, सुभाष का कहना है कि पहले मौसम विभाग ने 28 जून से 1 जुलाई तक अलर्ट जारी किया, उसके बाद 1 से 3 जुलाई तक, और उसके बाद 12 व 13 जुलाई को भी बरसात के आसार बताए गए थे, लेकिन ये दावे महज दावे ही रह गए। उनका कहना है कि ट्यूबवेल के सहारे धान को बचाने की कोशिश जरूर की जा रही है लेकिन बारिश के बिना ट्यूबवेल भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। इससे फसल को नुकसान नुकसान होगा। यदि अच्छी बारिश नहीं हुई तो खेतों में पानी रुकना नामुमकिन हो जाता है। पौधों की वृद्धि व और विकास रुक जाता है। ऐसे खेतों में खरपतवार बढ़ने लगते हैं। फिर उनकों निकालने पर लेबर खर्च भी बढ़ जाता है। रोपाई के तुरंत बाद किसान खरपतवार को खत्म करने के लिए खेतों में महंगी दवा डालते हैं। ट्यूबवेल की बिजली के लिए आठ घंटे का शेडयूल बनाया हुआ है, जोकि बरसात के न होने के कारण बहुत कम है। धान के खेत सूखने से दरारें पड़ने लगी हैं। जब तक बारिश नहीं होती तब तक बची हुई रोपाई करने में समस्या ही रहेगी। डीजल इतना महंगा है कि किसान जनरेटर चलाकर धान की फसल तैयार करेंगे जो फायदे के बजाय घाटे का सौदा होगा करने की बजाय घाटा । उन किसानों को चिंता ज्यादा सता रही है जिन्होंने कर्जा लेकर धान की रोपाई की है। सही मायने में बिना बरसात खेती को आघात वाली बात हो रही है।
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इस माह 106 एमएम बारिश
जिले में जुलाई में मात्र 106 एमएम बारिश रिकार्ड की गई है। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई के दौरान अंबाला में 1 जुलाई को 20 एमएम, 11 जुलाई को 85 एमएम तथा 13 जुलाई को 1 एमएम बारिश हुई है।