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कौन सा स्टाल चाहिए, शपथ पर लिखकर देना होगा ठेकेदारों को
Updated Tue, 18 Sep 2018 01:16 AM IST
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रमिंद्र सिंह
अंबाला कैंट। दिल्ली रेल मंडल के अधीन आने वाले प्रदेश के विभिन्न रेलवे स्टेशनों के कैटरिंग ठेकेदारों से रेलवे अब शपथ पत्र मांग कर यह पूछ रही है कि उन्हें भविष्य में कौन सा एक स्टाल चाहिए। यानि जिस ठेकेदार के पास पहले से ही तीन-चार या उससे अधिक स्टाल है उनके स्टालों की संख्या पर रेलवे अब पूरी तरह से कैंची चलाने की तैयारी में है। नई कैटरिंग पॉलिसी एवं अदालती आदेशों का हवाला देते हुए यह शपथ पत्र रेलवे द्वारा ठेकेदारों से मांगे जा रहे हैं और अभी से इसका विरोध शुरू हो गया है। उधर, अंबाला पहुंचे अखिल भारतीय रेलवे खानपान लाइसेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र गुप्ता व अन्य ने इसका विरोध जताया है। उनका कहना है कि अदालत जब तक इस मसले पर पूरा फैसला नहीं देती तब तक ठेकेदारों से ऐसा शपथ पत्र लेना पूरी तरह से गलत है और एसोसिएशन इसका विरोध जताएगी।
दिल्ली रेल मंडल ने अपने अधीन आने वाले हरियाणा के बहादुरगढ़, रोहतक, जींद, जाखल, फरीदाबाद, वल्लभगढ़, पलवल, सोनीपत, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, गुरुग्राम, गोहाना, कैथल रेलवे स्टेशनों पर यह आदेश जारी कर दिए हैं। हरियाणा के अलावा दिल्ली, यूपी के गाजियाबाद, मेरठ, देवबंद, मुजफ्फरनगर एवं अन्य स्टेशनों पर भी यह आदेश जारी किए गए हैं। रेलवे द्वारा वर्ष 2017 में नई कैटरिंग पॉलिसी लागू की गई थी और इसके तहत स्टेशनों पर पुराने खानपान स्टालों के नए सिरे से टेंडर किए जाने थे। रेलवे का तर्क था कि वर्षों से पुराने ठेकेदार एक स्टेशन पर कई स्टाल चला रहे हैं। मगर, मामले को लेकर पहले ही रेलवे खानपान एसोसिएशन ने रेलवे के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया था और कोर्ट ने पुराने लाइसेंस ठेकेदारों को अपनी आजीविका चलाने के लिए प्रत्येक स्टेशन पर एक स्टाल प्रदान के आदेश जारी किए थे। इन्हीं आदेशों को लेकर एसोसिएशन ने दोबारा से याचिका दायर की थी जिसपर अभी सुनवाई चल रही है। एसोसिएशन का आरोप था कि रेलवे छोटे लाइसेंस ठेकेदारों को खत्म कर उनकी आजीविका छीनना चाह रही है और एक साथ विभिन्न स्टेशनों पर बड़ी कंपनियों को लाकर कई स्टाल अलॉट करने का प्रयास कर रही है। मामले को लेकर गत दिनों कोर्ट में सुनवाई के दौरान रेलवे को फटकार भी लगाई गई जिसके बाद आनन-फानन में रेलवे ने अब अगली सुनवाई से पहले स्टाल संचालकों से शपथ पत्र मांगने आरंभ कर दिए हैं।
बड़ी कंपनियों को स्टेशन में लाने का प्रयास कर रही रेलवे : गुप्ता
उधर, सोमवार अंबाला पहुंचे अखिल भारतीय रेलवे खानपान लाइसेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र गुप्ता ने रेलवे खानपान नीति 2017 की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस नीति में यात्रियों व छोटे ठेकेदारों का नहीं बल्कि बड़ी कंपनियों का ध्यान रखा गया है। मंडलस्तर पर एक ठेकेदार पांच यूनिट (स्टाल) ले सकता है, इसका मतलब यह हुआ रेलवे के 68 मंडलों में एक ही व्यक्ति पांच-पांच यूनिट यानि कुल 340 यूनिट ले सकता है। ऐसा प्रावधान रेलवे ने केवल बड़ी कंपनियों के लिए किया है। रेलवे खानपान के साथ लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा है और इसे ध्यान में रखते हुए रेलवे को कार्य करना चाहिए।
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अंबाला कैंट। दिल्ली रेल मंडल के अधीन आने वाले प्रदेश के विभिन्न रेलवे स्टेशनों के कैटरिंग ठेकेदारों से रेलवे अब शपथ पत्र मांग कर यह पूछ रही है कि उन्हें भविष्य में कौन सा एक स्टाल चाहिए। यानि जिस ठेकेदार के पास पहले से ही तीन-चार या उससे अधिक स्टाल है उनके स्टालों की संख्या पर रेलवे अब पूरी तरह से कैंची चलाने की तैयारी में है। नई कैटरिंग पॉलिसी एवं अदालती आदेशों का हवाला देते हुए यह शपथ पत्र रेलवे द्वारा ठेकेदारों से मांगे जा रहे हैं और अभी से इसका विरोध शुरू हो गया है। उधर, अंबाला पहुंचे अखिल भारतीय रेलवे खानपान लाइसेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र गुप्ता व अन्य ने इसका विरोध जताया है। उनका कहना है कि अदालत जब तक इस मसले पर पूरा फैसला नहीं देती तब तक ठेकेदारों से ऐसा शपथ पत्र लेना पूरी तरह से गलत है और एसोसिएशन इसका विरोध जताएगी।
दिल्ली रेल मंडल ने अपने अधीन आने वाले हरियाणा के बहादुरगढ़, रोहतक, जींद, जाखल, फरीदाबाद, वल्लभगढ़, पलवल, सोनीपत, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, गुरुग्राम, गोहाना, कैथल रेलवे स्टेशनों पर यह आदेश जारी कर दिए हैं। हरियाणा के अलावा दिल्ली, यूपी के गाजियाबाद, मेरठ, देवबंद, मुजफ्फरनगर एवं अन्य स्टेशनों पर भी यह आदेश जारी किए गए हैं। रेलवे द्वारा वर्ष 2017 में नई कैटरिंग पॉलिसी लागू की गई थी और इसके तहत स्टेशनों पर पुराने खानपान स्टालों के नए सिरे से टेंडर किए जाने थे। रेलवे का तर्क था कि वर्षों से पुराने ठेकेदार एक स्टेशन पर कई स्टाल चला रहे हैं। मगर, मामले को लेकर पहले ही रेलवे खानपान एसोसिएशन ने रेलवे के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया था और कोर्ट ने पुराने लाइसेंस ठेकेदारों को अपनी आजीविका चलाने के लिए प्रत्येक स्टेशन पर एक स्टाल प्रदान के आदेश जारी किए थे। इन्हीं आदेशों को लेकर एसोसिएशन ने दोबारा से याचिका दायर की थी जिसपर अभी सुनवाई चल रही है। एसोसिएशन का आरोप था कि रेलवे छोटे लाइसेंस ठेकेदारों को खत्म कर उनकी आजीविका छीनना चाह रही है और एक साथ विभिन्न स्टेशनों पर बड़ी कंपनियों को लाकर कई स्टाल अलॉट करने का प्रयास कर रही है। मामले को लेकर गत दिनों कोर्ट में सुनवाई के दौरान रेलवे को फटकार भी लगाई गई जिसके बाद आनन-फानन में रेलवे ने अब अगली सुनवाई से पहले स्टाल संचालकों से शपथ पत्र मांगने आरंभ कर दिए हैं।
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बड़ी कंपनियों को स्टेशन में लाने का प्रयास कर रही रेलवे : गुप्ता
उधर, सोमवार अंबाला पहुंचे अखिल भारतीय रेलवे खानपान लाइसेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र गुप्ता ने रेलवे खानपान नीति 2017 की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस नीति में यात्रियों व छोटे ठेकेदारों का नहीं बल्कि बड़ी कंपनियों का ध्यान रखा गया है। मंडलस्तर पर एक ठेकेदार पांच यूनिट (स्टाल) ले सकता है, इसका मतलब यह हुआ रेलवे के 68 मंडलों में एक ही व्यक्ति पांच-पांच यूनिट यानि कुल 340 यूनिट ले सकता है। ऐसा प्रावधान रेलवे ने केवल बड़ी कंपनियों के लिए किया है। रेलवे खानपान के साथ लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा है और इसे ध्यान में रखते हुए रेलवे को कार्य करना चाहिए।
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