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प्रदूषण विभाग का दो दर्जन स्क्रीनिंग प्लांटों पर चला डंडा, सील
Updated Sat, 01 Sep 2018 01:08 AM IST
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प्रदूषण विभाग ने 24 स्क्रीनिंग प्लांटों को किया सील
अमर उजाला ब्यूरो
नारायणगढ़। खनन कंपनी का ठेका रद्द होने के बावजूद क्षेत्र में धड़ल्ले से जारी अवैध खनन के लिए जिम्मेदार स्क्रीनिंग प्लांटों पर शुक्रवार को प्रदूषण विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 24 प्लांटों को सील कर दिया। खबर लिखे जाने तक सीलिंग करने की कार्रवाई जारी थी। शुक्रवार को देर सायं तक जारी इस कार्रवाई में प्रदूषण विभाग की पांच टीमें तथा खनन विभाग व पुलिस जुटी हुई थी। इस दौरान संचालक भूमिगत हो गए।
नारायणगढ़ जोन में खनन का ठेका लेने वाली कंपनी का अनुबंध लगभग छह माह पूर्व सस्पेंड किया गया था। इसके पीछे कारण कंपनी द्वारा निर्धारित फीस जमा न करना था। हालांकि कंपनी का ठेका रद्द हो गया था, बावजूद इसके खनन माफिया बरसाती सीजन में क्षेत्र की नदी-नालों से धड़ल्ले से खनन कर रहे थे। पूर्व में भी प्रदूषण विभाग द्वारा लगभग 30 स्क्रीनिंग प्लांट सील किए थे, लेकिन उन प्लांट संचालकों ने भी उस सील को दरकिनार कर दोबारा अपने प्लांट चला लिए।
नारायणगढ़ जोन में चल रहे चार दर्जन प्लांट
नारायणगढ़ जोन में लगभग चार दर्जन स्क्रीनिंग प्लांट चल रहे हैं, जिनमें से अधिकतर के पास न तो कोई एनओसी है और न ही कोई लाइसेंस। राजनैतिक संरक्षण के साये में क्षेत्र के नदी-नालों को अवैध तौर पर चीर रहे इन प्लांट संचालकों ने न केवल प्राकृतिक संपदा को भारी नुकसान पहुंचाया अपितु क्षेत्र की सड़कों पर इन प्लांटों की गाड़ियां आम आदमी के लिए मौत बनकर घूम रही हैं।
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इन गावों में हैं स्क्रीनिंग प्लांट
नारायणगढ़ जोन में मारकंडा, सुकरों, रूण, बेगना, ओमला आदि नदियां होकर गुजरती हैं, इन नदियों के किनारे बसे गांव हमीदपुर, डेरा, शाहपुर, टोका, मियांपुर, टपरियों, कोहड़ा भूरा आदि लगभग एक दर्जन गांवों में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग प्लांट स्थापित हैं, जो चोरी-छिपे अवैध खनन को धड़ल्ले से अंजाम दे रहे हैं।
1 जुलाई से 30 सितंबर तक बैन होता है खनन
सरकारी आदेशों के मुताबिक नदी में किसी भी तरह के खनन पर एक जुलाई से लेकर 30 सितबर तक पूर्णत: रोक लगाई जाती है, जिसकी उल्लंघना करने पर खनन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का प्रावधान है।
कोट्स
बड़े तौर पर की जा रही इस कार्रवाई में लगभग दो दर्जन प्लांटों को सील करने की प्रक्रिया जारी है। प्लांटों के सही आंकलन का ब्यौरा इस सारी कार्रवाई के पूरा होने के बाद ही जारी किया जाएगा।
- विपिन कुमार, एसडीओ, प्रदूषण विभाग।
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अमर उजाला ब्यूरो
नारायणगढ़। खनन कंपनी का ठेका रद्द होने के बावजूद क्षेत्र में धड़ल्ले से जारी अवैध खनन के लिए जिम्मेदार स्क्रीनिंग प्लांटों पर शुक्रवार को प्रदूषण विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 24 प्लांटों को सील कर दिया। खबर लिखे जाने तक सीलिंग करने की कार्रवाई जारी थी। शुक्रवार को देर सायं तक जारी इस कार्रवाई में प्रदूषण विभाग की पांच टीमें तथा खनन विभाग व पुलिस जुटी हुई थी। इस दौरान संचालक भूमिगत हो गए।
नारायणगढ़ जोन में खनन का ठेका लेने वाली कंपनी का अनुबंध लगभग छह माह पूर्व सस्पेंड किया गया था। इसके पीछे कारण कंपनी द्वारा निर्धारित फीस जमा न करना था। हालांकि कंपनी का ठेका रद्द हो गया था, बावजूद इसके खनन माफिया बरसाती सीजन में क्षेत्र की नदी-नालों से धड़ल्ले से खनन कर रहे थे। पूर्व में भी प्रदूषण विभाग द्वारा लगभग 30 स्क्रीनिंग प्लांट सील किए थे, लेकिन उन प्लांट संचालकों ने भी उस सील को दरकिनार कर दोबारा अपने प्लांट चला लिए।
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नारायणगढ़ जोन में चल रहे चार दर्जन प्लांट
नारायणगढ़ जोन में लगभग चार दर्जन स्क्रीनिंग प्लांट चल रहे हैं, जिनमें से अधिकतर के पास न तो कोई एनओसी है और न ही कोई लाइसेंस। राजनैतिक संरक्षण के साये में क्षेत्र के नदी-नालों को अवैध तौर पर चीर रहे इन प्लांट संचालकों ने न केवल प्राकृतिक संपदा को भारी नुकसान पहुंचाया अपितु क्षेत्र की सड़कों पर इन प्लांटों की गाड़ियां आम आदमी के लिए मौत बनकर घूम रही हैं।
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इन गावों में हैं स्क्रीनिंग प्लांट
नारायणगढ़ जोन में मारकंडा, सुकरों, रूण, बेगना, ओमला आदि नदियां होकर गुजरती हैं, इन नदियों के किनारे बसे गांव हमीदपुर, डेरा, शाहपुर, टोका, मियांपुर, टपरियों, कोहड़ा भूरा आदि लगभग एक दर्जन गांवों में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग प्लांट स्थापित हैं, जो चोरी-छिपे अवैध खनन को धड़ल्ले से अंजाम दे रहे हैं।
1 जुलाई से 30 सितंबर तक बैन होता है खनन
सरकारी आदेशों के मुताबिक नदी में किसी भी तरह के खनन पर एक जुलाई से लेकर 30 सितबर तक पूर्णत: रोक लगाई जाती है, जिसकी उल्लंघना करने पर खनन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का प्रावधान है।
कोट्स
बड़े तौर पर की जा रही इस कार्रवाई में लगभग दो दर्जन प्लांटों को सील करने की प्रक्रिया जारी है। प्लांटों के सही आंकलन का ब्यौरा इस सारी कार्रवाई के पूरा होने के बाद ही जारी किया जाएगा।
- विपिन कुमार, एसडीओ, प्रदूषण विभाग।