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टांय-टांय फिस साबित हुई अंबाला को इंडिस्ट्रयल हब के तौर पर विकसित करने की योजना
Updated Mon, 20 Aug 2018 12:16 AM IST
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अंबाला को इंडस्ट्रियल हब बनाने की योजना टांय-टांय फिस
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। भविष्य में दिल्ली के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए अंबाला को इंडस्ट्रियल हब के तौर पर विकसित करने की योजना टांय-टांय फिस साबित हो रही है। विभिन्न राज्यों व शहरों को लगती सीमाओं के कारण अंबाला एक केंद्र बिंदु पर है। इस वजह से यहां बड़ी इंडस्ट्री की अपार संभावनाएं हैं। पूर्व में केंद्र सरकार की काउंटर मैगनेट सिटी योजना के तहत अंबाला का चयन किया गया था, मगर सरकारी लापरवाही इस पर हावी होती रही और यहां अब तक रोजगार के अवसर उत्पन्न करने के लिए बड़ा उद्योग स्थापित नहीं हो सका। यदि इंडस्ट्रियल हब अंबाला में स्थापित होता तो उत्तर भारत के छह राज्यों को इसका लाभ मिलता।
हिमाचल प्रदेश व पंजाब की सीमा से लगते और केंद्र शासित चंडीगढ़ से सटे अंबाला को विकसित करने के लिए इंडस्ट्रियल हब बनाने की योजना बनाई गई थी। पटियाला, चंडीगढ़, पंचकूला, कुरुक्षेत्र व यमुनानगर जैसे शहरों से अंबाला महज 50 किलोमीटर की दूरी पर है और सबसे बड़ी बात यह है कि यह सभी शहरों का केंद्र बिंदु भी है। अंबाला में बड़ी इंडस्ट्री लगती है तो इसका सीधा लाभ पास लगते अन्य शहरों को भी निश्चित तौर पर मिलेगा। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश की सीमा भी अंबाला से करीब 55 किलोमीटर दूर है। यहां परिवहन की भी बेहतर सुविधाएं हैं और हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब व उत्तर प्रदेश आने-जाने के लिए अंबाला से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
एनसीआरपीबी ने तैयार की थी योजना
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) ने वर्ष 2009 में अंबाला को काउंटर मैगनेट सिटी (सीएमसी) के रूप में तैयार करने की योजना बनाई थी। अंबाला के योजनागत विकास के लिए बोर्ड द्वारा मास्टर प्लान पहले ही तैयार किया जा चुका है। सर्वे के अनुसार दिल्ली में 2022 तक जनसंख्या का दबाव इतना बढ़ जाएगा कि वहां पर कोई जगह उपलब्ध नहीं होगी। ऐसे में अंबाला को दिल्ली का दबाव कम करने के लिए इंडस्ट्रियल हब के तौर पर विकसित किया जा सकता है। दिल्ली से अंबाला 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। रेल व सड़क परिवहन सुविधा बेहतर होने की वजह से तीन से चार घंटे में यह दूरी तय की जा सकती है। अंबाला पांच-छह राज्यों के लिए हब बन सकता है। केंद्र सरकार द्वारा इसकी जानकारी राज्य सरकार को भी दी गई थी, मगर अभी तक इस पर अमल नहीं हो सका है जिसके चलते अंबाला इंडस्ट्री के तौर पर विकसित नहीं हुआ।
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इसलिए बनना था मैगनेट सिटी
आर्थिक - अंबाला में साइंस की छोटी व मध्यम श्रेणी की इकाइयां हैं। यहां कई दवा कंपनियां हैं। सिटी में उत्तर भारत की प्रमुख थोक कपड़ा मार्केट है। साथ ही मिक्सी उद्योग है। साहा में इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर व फूड पार्क है। योजना बोर्ड का मानना है कि अंबाला की भौगोलिक स्थिति ऐसी है जहां विकास की अपार संभावनाएं हैं।
शिक्षा - नॉलेज सेंटर के रूप में भी अंबाला पिछले कुछ सालों में तरक्की कर रहा है। हरियाणा की पहली डीम्ड यूनिवर्सिटी अंबाला में खुली। इसके अलावा इंजीनियरिंग, मेडिकल व प्रोफेशनल कोर्सेज कराने वाले संस्थान भी पिछले पांच साल में कई गुणा बढ़ गए हैं।
पूर्व की बड़ी योजनाएं जो नहीं हुईं पूरी
- साहा स्थित एचएसआईआईडीसी में वर्ष 2013 में सौ करोड़ की लागत से टेक्नोलॉजी पार्क बनाने के लिए पूर्व सीएम हुड्डा व पूर्व केंद्रीय मंत्री सैलजा द्वारा शिलान्यास तक किया गया था, मगर आज तक यहां एक ईंट तक नहीं लगी।
- पंजोखरा में आईएमटी लगाने के लिए जद्दोजहद हुई, मगर अंत में सरकार को उन किसानों के आगे झुकना पड़ा जिनकी जमीन आईएमटी के लिए एक्वायर की गई थी। योजना रद्द की गई।
अब तक अंबाला में यह बड़े उद्योग
- लघु साइंस उद्योग की वजह से अंबाला कैंट को पहचान मिली है। दो हजार से ज्यादा छोटी-बड़ी साइंस इकाइयां यहां पर स्थित हैं। टर्न ओवर डेढ़ हजार करोड़ से ज्यादा, मगर यह उद्योग आज प्रतिस्पर्धा की दौड़ में पिछड़ रहा है। हालांकि इस उद्योग को फिर से खड़ा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
- सिटी में होलसेल कपड़ा उद्योग है। यहां एक हजार से ज्यादा दुकानें हैं जिनका टर्न ओवर पांच सौ करोड़ से अधिक है।
- इसके अलावा इलेक्ट्रिकल एप्लाइलेंस मिक्सी उद्योग एवं दवा उद्योग भी अंबाला में है।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। भविष्य में दिल्ली के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए अंबाला को इंडस्ट्रियल हब के तौर पर विकसित करने की योजना टांय-टांय फिस साबित हो रही है। विभिन्न राज्यों व शहरों को लगती सीमाओं के कारण अंबाला एक केंद्र बिंदु पर है। इस वजह से यहां बड़ी इंडस्ट्री की अपार संभावनाएं हैं। पूर्व में केंद्र सरकार की काउंटर मैगनेट सिटी योजना के तहत अंबाला का चयन किया गया था, मगर सरकारी लापरवाही इस पर हावी होती रही और यहां अब तक रोजगार के अवसर उत्पन्न करने के लिए बड़ा उद्योग स्थापित नहीं हो सका। यदि इंडस्ट्रियल हब अंबाला में स्थापित होता तो उत्तर भारत के छह राज्यों को इसका लाभ मिलता।
हिमाचल प्रदेश व पंजाब की सीमा से लगते और केंद्र शासित चंडीगढ़ से सटे अंबाला को विकसित करने के लिए इंडस्ट्रियल हब बनाने की योजना बनाई गई थी। पटियाला, चंडीगढ़, पंचकूला, कुरुक्षेत्र व यमुनानगर जैसे शहरों से अंबाला महज 50 किलोमीटर की दूरी पर है और सबसे बड़ी बात यह है कि यह सभी शहरों का केंद्र बिंदु भी है। अंबाला में बड़ी इंडस्ट्री लगती है तो इसका सीधा लाभ पास लगते अन्य शहरों को भी निश्चित तौर पर मिलेगा। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश की सीमा भी अंबाला से करीब 55 किलोमीटर दूर है। यहां परिवहन की भी बेहतर सुविधाएं हैं और हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब व उत्तर प्रदेश आने-जाने के लिए अंबाला से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
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एनसीआरपीबी ने तैयार की थी योजना
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) ने वर्ष 2009 में अंबाला को काउंटर मैगनेट सिटी (सीएमसी) के रूप में तैयार करने की योजना बनाई थी। अंबाला के योजनागत विकास के लिए बोर्ड द्वारा मास्टर प्लान पहले ही तैयार किया जा चुका है। सर्वे के अनुसार दिल्ली में 2022 तक जनसंख्या का दबाव इतना बढ़ जाएगा कि वहां पर कोई जगह उपलब्ध नहीं होगी। ऐसे में अंबाला को दिल्ली का दबाव कम करने के लिए इंडस्ट्रियल हब के तौर पर विकसित किया जा सकता है। दिल्ली से अंबाला 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। रेल व सड़क परिवहन सुविधा बेहतर होने की वजह से तीन से चार घंटे में यह दूरी तय की जा सकती है। अंबाला पांच-छह राज्यों के लिए हब बन सकता है। केंद्र सरकार द्वारा इसकी जानकारी राज्य सरकार को भी दी गई थी, मगर अभी तक इस पर अमल नहीं हो सका है जिसके चलते अंबाला इंडस्ट्री के तौर पर विकसित नहीं हुआ।
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इसलिए बनना था मैगनेट सिटी
आर्थिक - अंबाला में साइंस की छोटी व मध्यम श्रेणी की इकाइयां हैं। यहां कई दवा कंपनियां हैं। सिटी में उत्तर भारत की प्रमुख थोक कपड़ा मार्केट है। साथ ही मिक्सी उद्योग है। साहा में इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर व फूड पार्क है। योजना बोर्ड का मानना है कि अंबाला की भौगोलिक स्थिति ऐसी है जहां विकास की अपार संभावनाएं हैं।
शिक्षा - नॉलेज सेंटर के रूप में भी अंबाला पिछले कुछ सालों में तरक्की कर रहा है। हरियाणा की पहली डीम्ड यूनिवर्सिटी अंबाला में खुली। इसके अलावा इंजीनियरिंग, मेडिकल व प्रोफेशनल कोर्सेज कराने वाले संस्थान भी पिछले पांच साल में कई गुणा बढ़ गए हैं।
पूर्व की बड़ी योजनाएं जो नहीं हुईं पूरी
- साहा स्थित एचएसआईआईडीसी में वर्ष 2013 में सौ करोड़ की लागत से टेक्नोलॉजी पार्क बनाने के लिए पूर्व सीएम हुड्डा व पूर्व केंद्रीय मंत्री सैलजा द्वारा शिलान्यास तक किया गया था, मगर आज तक यहां एक ईंट तक नहीं लगी।
- पंजोखरा में आईएमटी लगाने के लिए जद्दोजहद हुई, मगर अंत में सरकार को उन किसानों के आगे झुकना पड़ा जिनकी जमीन आईएमटी के लिए एक्वायर की गई थी। योजना रद्द की गई।
अब तक अंबाला में यह बड़े उद्योग
- लघु साइंस उद्योग की वजह से अंबाला कैंट को पहचान मिली है। दो हजार से ज्यादा छोटी-बड़ी साइंस इकाइयां यहां पर स्थित हैं। टर्न ओवर डेढ़ हजार करोड़ से ज्यादा, मगर यह उद्योग आज प्रतिस्पर्धा की दौड़ में पिछड़ रहा है। हालांकि इस उद्योग को फिर से खड़ा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
- सिटी में होलसेल कपड़ा उद्योग है। यहां एक हजार से ज्यादा दुकानें हैं जिनका टर्न ओवर पांच सौ करोड़ से अधिक है।
- इसके अलावा इलेक्ट्रिकल एप्लाइलेंस मिक्सी उद्योग एवं दवा उद्योग भी अंबाला में है।