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- मामला पंचकूला में दंगे भड़काने के आरोप में नामजद किए गए सुरेंद्र धीमान का
Updated Sun, 03 Sep 2017 11:49 PM IST
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- मामला पंचकूला में दंगे भड़काने के आरोप में नामजद किए गए सुरेंद्र धीमान का
- बचाव में सामने आई सुरेंद्र की पत्नी, बोली डेरा के अखबार ने नहीं दी उनकी 12 लाख रुपये कमीशन
- डेरे के समर्थक नहीं, केवल जॉब तक थे सीमित
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। पंचकूला में 25 अगस्त को बलात्कारी बाबा को सजा के बाद दंगा भड़काने के आरोप में पकड़े गए सुरेंद्र धीमान के बचाव में अब उनका परिवार सामने आ गया है। पंचकूला में निजी स्कूल में टीचर सुरेंद्र की पत्नी ऊषा धीमान ने कहा कि उनके पति सुरेंद्र धीमान डेरा के अखबार में केवल जॉब तक ही सीमित थे। सुरेंद्र ने बीते वर्ष दिसंबर माह में अखबार से रिजाइन कर दिया था, मगर उसका नाम वहां दर्ज था। पंचकूला में डेरामुखी की पेशी से पहले पंचकूला के नामचर्चा घर से कीर्तन हेड का सुरेंद्र को फोन आया कि व्यवस्था बनाए रखने के लिए उसकी मदद चाहिए। सुरेंद्र केवल मदद करने के मकसद से वहां गया था। ऊषा ने बताया कि वह डेरे के कोई समर्थक नहीं है, उलटा जिस अखबार में सुरेंद्र ने काम किया उसने सुरेंद्र को आज तक 12 लाख रुपये विज्ञापन कमीशन की राशि उसे आज तक नहीं दी।
पंचकूला में होने के कारण मांगी थी मदद
ऊषा ने बताया कि उनके पति सुरेंद्र धीमान दिल्ली में कु छ वर्ष पहले जॉब करते थे। मगर सिरसा डेरे के संपर्क में आने के बाद उन्हें यहां पर जॉब मिल गई। वह कंप्यूटर पर विज्ञापन डिजाइनिंग आदि में कार्य करते थे। ऊषा ने कहा वह करीब चार वर्षों तक सिरसा में रहे, मगर डेरे की गतिविधियों में कभी शामिल नहीं हुए। केवल जॉब तक की सीमित थे। सिरसा में उन्हें व बच्चों को माहौल अनुकूल नहीं लगा। इसके बाद उन्हें पंचकूला में शिफ्ट कर दिया गया। यहां वह अखबार के लिए सरकारी विज्ञापन लाते थे। मगर उनकी विज्ञापन कमीशन की राशि उन्हें नहीं दी गई। बीते वर्ष जुलाई माह से 12 लाख रुपये कमीशन की राशि का विवाद चल रहा था और दिसंबर 2017 में सुरेंद्र ने अखबार से रिजाइन कर दिया था। वह अन्य स्थानों पर जॉब तलाश रहे थे। पंचकूला नामचर्चा घर के पदाधिकारियों से संपर्क थे, लेकिन वह वहां पर जाते नहीं थे। अब डेरामुखी की 25 अगस्त को अदालत में पेशी से पहले सुरेंद्र से मदद मांगी गई थी। सुरेंद्र अखबार में होने की वजह से पुलिस व प्रशासन स्तर पर पैठ रखता था। ऊषा ने बताया कि उनके पति से पेशी से पहले पुलिस व प्रशासन के साथ बैठकें भी की। जिस दिन दंगा भड़का उस दिन वह केवल वहां पर मौजूद थे। ऊषा ने कहा दंगे भड़काने में उनका कोई हाथ नहीं है। इसकी पूरी जानकारी पंचकूला पुलिस को भी उनके द्वारा दी गई है।
यह था मामला
बता दें कि सुरेंद्र धीमान को पंचकूला पुलिस ने डेरामुखी की पेशी के बाद हुए दंगों को भड़काने, राष्ट्रद्रोह व अन्य मामले में नामजद किया था। सुरेंद्र के अलावा चार अन्य को भी नामजद किया गया था। मूलरूप से अंबाला कैंट में डिफेंस कालोनी निवासी सुरेंद्र स्थानीय एयरफोर्स स्कूल में टीचर भी रह चुका है। सुरेंद्र ने गत दिनों पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था जिसके बाद पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर सात दिन के रिमांड पर लिया है।
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- मामला पंचकूला में दंगे भड़काने के आरोप में नामजद किए गए सुरेंद्र धीमान का
- बचाव में सामने आई सुरेंद्र की पत्नी, बोली डेरा के अखबार ने नहीं दी उनकी 12 लाख रुपये कमीशन
- डेरे के समर्थक नहीं, केवल जॉब तक थे सीमित
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। पंचकूला में 25 अगस्त को बलात्कारी बाबा को सजा के बाद दंगा भड़काने के आरोप में पकड़े गए सुरेंद्र धीमान के बचाव में अब उनका परिवार सामने आ गया है। पंचकूला में निजी स्कूल में टीचर सुरेंद्र की पत्नी ऊषा धीमान ने कहा कि उनके पति सुरेंद्र धीमान डेरा के अखबार में केवल जॉब तक ही सीमित थे। सुरेंद्र ने बीते वर्ष दिसंबर माह में अखबार से रिजाइन कर दिया था, मगर उसका नाम वहां दर्ज था। पंचकूला में डेरामुखी की पेशी से पहले पंचकूला के नामचर्चा घर से कीर्तन हेड का सुरेंद्र को फोन आया कि व्यवस्था बनाए रखने के लिए उसकी मदद चाहिए। सुरेंद्र केवल मदद करने के मकसद से वहां गया था। ऊषा ने बताया कि वह डेरे के कोई समर्थक नहीं है, उलटा जिस अखबार में सुरेंद्र ने काम किया उसने सुरेंद्र को आज तक 12 लाख रुपये विज्ञापन कमीशन की राशि उसे आज तक नहीं दी।
पंचकूला में होने के कारण मांगी थी मदद
ऊषा ने बताया कि उनके पति सुरेंद्र धीमान दिल्ली में कु छ वर्ष पहले जॉब करते थे। मगर सिरसा डेरे के संपर्क में आने के बाद उन्हें यहां पर जॉब मिल गई। वह कंप्यूटर पर विज्ञापन डिजाइनिंग आदि में कार्य करते थे। ऊषा ने कहा वह करीब चार वर्षों तक सिरसा में रहे, मगर डेरे की गतिविधियों में कभी शामिल नहीं हुए। केवल जॉब तक की सीमित थे। सिरसा में उन्हें व बच्चों को माहौल अनुकूल नहीं लगा। इसके बाद उन्हें पंचकूला में शिफ्ट कर दिया गया। यहां वह अखबार के लिए सरकारी विज्ञापन लाते थे। मगर उनकी विज्ञापन कमीशन की राशि उन्हें नहीं दी गई। बीते वर्ष जुलाई माह से 12 लाख रुपये कमीशन की राशि का विवाद चल रहा था और दिसंबर 2017 में सुरेंद्र ने अखबार से रिजाइन कर दिया था। वह अन्य स्थानों पर जॉब तलाश रहे थे। पंचकूला नामचर्चा घर के पदाधिकारियों से संपर्क थे, लेकिन वह वहां पर जाते नहीं थे। अब डेरामुखी की 25 अगस्त को अदालत में पेशी से पहले सुरेंद्र से मदद मांगी गई थी। सुरेंद्र अखबार में होने की वजह से पुलिस व प्रशासन स्तर पर पैठ रखता था। ऊषा ने बताया कि उनके पति से पेशी से पहले पुलिस व प्रशासन के साथ बैठकें भी की। जिस दिन दंगा भड़का उस दिन वह केवल वहां पर मौजूद थे। ऊषा ने कहा दंगे भड़काने में उनका कोई हाथ नहीं है। इसकी पूरी जानकारी पंचकूला पुलिस को भी उनके द्वारा दी गई है।
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यह था मामला
बता दें कि सुरेंद्र धीमान को पंचकूला पुलिस ने डेरामुखी की पेशी के बाद हुए दंगों को भड़काने, राष्ट्रद्रोह व अन्य मामले में नामजद किया था। सुरेंद्र के अलावा चार अन्य को भी नामजद किया गया था। मूलरूप से अंबाला कैंट में डिफेंस कालोनी निवासी सुरेंद्र स्थानीय एयरफोर्स स्कूल में टीचर भी रह चुका है। सुरेंद्र ने गत दिनों पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था जिसके बाद पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर सात दिन के रिमांड पर लिया है।
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