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नेत्रहीनों की दुनिया बदलेगी बाल वैज्ञानिकों की स्मार्ट स्टिक
Updated Fri, 07 Sep 2018 01:17 AM IST
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नेत्रहीनों की दुनिया बदलेगी स्मार्ट स्टिक
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। आविष्कार दुनिया को उस मुकाम पर पहुंचा देंगे जहां असंभव शब्द ही समाप्त हो जाएगा। एक समय था जब नेत्रहीनों को अपना काम पूरा करने के लिए किसी के सहारे की जरूरत होती थी लेकिन आज दुनिया उस शताब्दी में पहुंच चुकी है जहां हर असंभव चीज संभव हो चुकी है। अंबाला के बाल वैज्ञानिकों ने ऐसी सेंसर युक्त स्टिक तैयार की है जो नेत्रहीनों को रास्ता बताएगी। स्कूली विद्यार्थियों ने किडो बॉटिक्स संस्था की मदद से इस ‘इलेक्ट्रॉनिक ब्लाइंड स्टिक’ का निर्माण किया है। किडो बॉटिक्स अंबाला के छठी कक्षा के विद्यार्थी दक्ष गोयल, दसवीं कक्षा के विद्यार्थी आर्यन अग्रवाल व आठवीं कक्षा के विद्यार्थी आकाश कुशवाहा अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते हैं जिन्होंने संस्था के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम कर कामयाबी अर्जित की है।
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यह खासियत है स्टिक की
स्टिक में लगा अल्ट्रासोनिक सेंसर व्यक्ति जिस दिशा में बढ़ रहा होगा उसमें मौजूद अवरोध को काफी दूर से ही बिना किसी तार के पहचान लेगा और उसे ऑडियो संकेत में बदल देगा। इसके अलावा स्टिक आग, तापमान, बारिश और अकेले घर में होने पर भी रक्षा करेगी। स्टिक में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिस्टम भी है। अगर इस छड़ी को इस्तेमाल करने वाला इंसान तय दिशा से दूसरी ओर मुड़ता है तो यह स्टिक वाइब्रेट करती है और सही दिशा की ओर संकेत देती है। इस स्टिक का इस्तेमाल करने वाले बुजुर्ग के दिल की धड़कन अगर तेज होती है तो यह अपने आप आपातकालीन सेवाओं को सूचित कर देगी।
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छोटी उम्र से ही विद्यार्थियों की वैज्ञानिक रुचि की पहचान कर रही संस्था
किडो बॉटिक्स संस्था की डायरेक्टर ज्योति गुप्ता ने बताया कि नई पीढ़ी की यह स्टिक न सिर्फ बुजुर्गों को अपने घर का रास्ता ढूंढने में मदद करेगी बल्कि उनके दिल की धड़कन और शरीर के तापमान पर भी नजर रखेगी। उन्होंने बताया कि तीनों बच्चे छह माह से संस्था के साथ जुड़े हैं, जिनके साथ मिलकर संस्था इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी। संस्था ने विद्यार्थियों को गाइड किया और स्टिक बनाने में 90 प्रतिशत कार्य विद्यार्थियों द्वारा किया गया है। संस्था के साथ अन्य विद्यार्थी भी जुड़े हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। आविष्कार दुनिया को उस मुकाम पर पहुंचा देंगे जहां असंभव शब्द ही समाप्त हो जाएगा। एक समय था जब नेत्रहीनों को अपना काम पूरा करने के लिए किसी के सहारे की जरूरत होती थी लेकिन आज दुनिया उस शताब्दी में पहुंच चुकी है जहां हर असंभव चीज संभव हो चुकी है। अंबाला के बाल वैज्ञानिकों ने ऐसी सेंसर युक्त स्टिक तैयार की है जो नेत्रहीनों को रास्ता बताएगी। स्कूली विद्यार्थियों ने किडो बॉटिक्स संस्था की मदद से इस ‘इलेक्ट्रॉनिक ब्लाइंड स्टिक’ का निर्माण किया है। किडो बॉटिक्स अंबाला के छठी कक्षा के विद्यार्थी दक्ष गोयल, दसवीं कक्षा के विद्यार्थी आर्यन अग्रवाल व आठवीं कक्षा के विद्यार्थी आकाश कुशवाहा अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते हैं जिन्होंने संस्था के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम कर कामयाबी अर्जित की है।
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यह खासियत है स्टिक की
स्टिक में लगा अल्ट्रासोनिक सेंसर व्यक्ति जिस दिशा में बढ़ रहा होगा उसमें मौजूद अवरोध को काफी दूर से ही बिना किसी तार के पहचान लेगा और उसे ऑडियो संकेत में बदल देगा। इसके अलावा स्टिक आग, तापमान, बारिश और अकेले घर में होने पर भी रक्षा करेगी। स्टिक में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिस्टम भी है। अगर इस छड़ी को इस्तेमाल करने वाला इंसान तय दिशा से दूसरी ओर मुड़ता है तो यह स्टिक वाइब्रेट करती है और सही दिशा की ओर संकेत देती है। इस स्टिक का इस्तेमाल करने वाले बुजुर्ग के दिल की धड़कन अगर तेज होती है तो यह अपने आप आपातकालीन सेवाओं को सूचित कर देगी।
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छोटी उम्र से ही विद्यार्थियों की वैज्ञानिक रुचि की पहचान कर रही संस्था
किडो बॉटिक्स संस्था की डायरेक्टर ज्योति गुप्ता ने बताया कि नई पीढ़ी की यह स्टिक न सिर्फ बुजुर्गों को अपने घर का रास्ता ढूंढने में मदद करेगी बल्कि उनके दिल की धड़कन और शरीर के तापमान पर भी नजर रखेगी। उन्होंने बताया कि तीनों बच्चे छह माह से संस्था के साथ जुड़े हैं, जिनके साथ मिलकर संस्था इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी। संस्था ने विद्यार्थियों को गाइड किया और स्टिक बनाने में 90 प्रतिशत कार्य विद्यार्थियों द्वारा किया गया है। संस्था के साथ अन्य विद्यार्थी भी जुड़े हैं।
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