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कॉलेज शिक्षकों ने काले बिल्ले लगाकर जताया विरोध
Updated Sun, 23 Sep 2018 12:45 AM IST
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शिक्षकों ने काले बिल्ले लगाकर जताया विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। शनिवार को प्रदेशभर के कॉलेज शिक्षकों ने कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के आह्वान पर काले बिल्ले लगाकर कक्षाएं लेते हुए विरोध जताया। कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के प्रधान डॉ. राजवीर सिंह ने बताया कि कॉलेज शिक्षक वर्ग, शिक्षा विभाग की ओर से हरियाणा सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को अधीक्षक महाविद्यालय, निदेशक शिक्षा विभाग पंचकूला ने मनमर्जी माफिक अनुवाद करके पूरी अधिसूचना को बदल दिया।
इसको लेकर जब बाद में आरटीआई के तहत सूचना मांगी गई तो अधीक्षक महाविद्यालय-4 ने ऐसा कोई भी दस्तावेज होने से इंकार कर दिया और पल्ला झाड़ लिया, जबकि अधिकारी पिछले डेढ़ वर्ष से शिक्षकों के पदोन्नति के मामलों को वापस कर रहा है जो कि 2006 व 2009 के बीच नियुक्त हुए थे और अब इन शिक्षकों में भय का माहौल है तथा सातवें वेतनमान में इनका वेतन बढ़ने की बजाय घट रहा है। इसके साथ ही शिक्षा विभाग पीएचडी और एमफिल की वेतन वृद्धि को भी मूल वेतन में न जोड़ने पर अड़ा हुआ है, जबकि हरियाणा सरकार की ओर से यूजीसी से स्पष्टीकरण की मांग भी की जा चुकी हैै और पीएचडी एमफिल की वेतन वृद्धि मूल वेतन में विलय होंगी इसके बारे में भी बताय गया है, लेकिन कई वर्ष बीत जाने पर भी शिक्षा विभाग इसकी अनुपालना नहीं कर रहा है, जिसके कारण शिक्षकों को न केवल विलय न होने का नुकसान हो रहा है, बल्कि सालाना वेतन वृद्धि में भी पिछले 10 वर्षों से नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही बताया कि नेट और स्लेट में भी अंतर कर दिया है। जहां नेट भारत सरकार द्वारा आयोजित होता है, स्लेट हरियाणा सरकार द्वारा करवाया जाता था। दोनों की ही हरियाणा राज्य में समान रूप से मान्य थे। परंतु शिक्षा विभाग ने इन दोनों में भी अंतर करते हुए स्लेट पास किए हुए प्राध्यापकों को भी इंक्रीमेंट से वंचित रखा गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। शनिवार को प्रदेशभर के कॉलेज शिक्षकों ने कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के आह्वान पर काले बिल्ले लगाकर कक्षाएं लेते हुए विरोध जताया। कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के प्रधान डॉ. राजवीर सिंह ने बताया कि कॉलेज शिक्षक वर्ग, शिक्षा विभाग की ओर से हरियाणा सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को अधीक्षक महाविद्यालय, निदेशक शिक्षा विभाग पंचकूला ने मनमर्जी माफिक अनुवाद करके पूरी अधिसूचना को बदल दिया।
इसको लेकर जब बाद में आरटीआई के तहत सूचना मांगी गई तो अधीक्षक महाविद्यालय-4 ने ऐसा कोई भी दस्तावेज होने से इंकार कर दिया और पल्ला झाड़ लिया, जबकि अधिकारी पिछले डेढ़ वर्ष से शिक्षकों के पदोन्नति के मामलों को वापस कर रहा है जो कि 2006 व 2009 के बीच नियुक्त हुए थे और अब इन शिक्षकों में भय का माहौल है तथा सातवें वेतनमान में इनका वेतन बढ़ने की बजाय घट रहा है। इसके साथ ही शिक्षा विभाग पीएचडी और एमफिल की वेतन वृद्धि को भी मूल वेतन में न जोड़ने पर अड़ा हुआ है, जबकि हरियाणा सरकार की ओर से यूजीसी से स्पष्टीकरण की मांग भी की जा चुकी हैै और पीएचडी एमफिल की वेतन वृद्धि मूल वेतन में विलय होंगी इसके बारे में भी बताय गया है, लेकिन कई वर्ष बीत जाने पर भी शिक्षा विभाग इसकी अनुपालना नहीं कर रहा है, जिसके कारण शिक्षकों को न केवल विलय न होने का नुकसान हो रहा है, बल्कि सालाना वेतन वृद्धि में भी पिछले 10 वर्षों से नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही बताया कि नेट और स्लेट में भी अंतर कर दिया है। जहां नेट भारत सरकार द्वारा आयोजित होता है, स्लेट हरियाणा सरकार द्वारा करवाया जाता था। दोनों की ही हरियाणा राज्य में समान रूप से मान्य थे। परंतु शिक्षा विभाग ने इन दोनों में भी अंतर करते हुए स्लेट पास किए हुए प्राध्यापकों को भी इंक्रीमेंट से वंचित रखा गया।
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